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heart attack treatment हार्ट ब्लोकेज का इलाज़

heart attack treatment – हार्ट ब्लोकेज  – अस्पताल मे हार्ट ब्लोकज का इलाज़ दो प्रकार से होता है .एक है एंजिओप्लास्टी द्वारा और दूसरा है बायपास सर्जरी द्वारा।बाईपास सर्जरी की तुलना में एंजियोप्लास्टी अधिक सुरक्षित है और आंकड़ों के अनुसार इस प्रक्रिया के बाद होने वाली जटिलताओं के कारण 1% से भी कम लोग मरते हैं।  

heart attack हृदय की किसी एक धमनी में अवरोध (रक्त की आवाजही मे रुकावट) होने पर प्रायः एंजियोप्लास्टी से समाधान हो सकता है। लेकिन जब एक या अधिक कोरोनरी धमनियों में बहुत अधिक जमाव होने पर या उनकी उपशाखाएं बहुत अधिक सिकुड़ जाए जाए तो बाईपास सर्जरी यानी कोरोनरी आर्टरी बाइपास ग्राफ्टिंग (सीएबीजी) ही एकमात्र विकल्प होता है। निम्न स्थितियों में बाइपास सर्जरी आवश्यक होती है।

heart attack treatment in hindi धरेलु उपचार

अस्पताल मे एसे होता है हार्ट ब्लोकेज का इलाज़ 

हार्ट-ब्लोकेज
heart
हिर्दय की धमनी को ही कोरोनरी आर्टरी कहा जाता है
एसे होता है ऑपरेशन
यह रुकावट वसा के जमाव होने से होती है, जिससे धमनी कठोर हो जाती है व रक्त के निर्बाध बहाव में रुकावट आती है। कई एसे कारण है जिस वजह से रक्त संचार मे रुकावट आती है जैसे हृदय के वाल्व खराब होने, वसा (फैट)
का धमनियों मे जमाव, रक्तचाप बढ़ने (हाई ब्लड प्रेसर),हृदय की मांसपेशी बढ़ने,कोलिस्ट्रोल जमने, रक्त के थक्के जमने और हृदय कमजोर होने से हृदयाघात (हार्ट अटैक) हो जाता है।
heart attack treatment
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यदि समय पर इलाज हो तो बचा जा सकता है। धमनी के पूर्ण बंद होने की स्थिति में हृदयाघात (हार्ट अटैक) की आशंका बढ़ जाती हैं। हृदय की तीन मुख्य धमनियों (कोरोनरी आर्टरी)में से किसी भी 
एक या सभी में अवरोध पैदा हो सकता है। ऐसे में एक हार्ट सर्जरी द्वारा शरीर के किसी भाग से नस निकालकर उसे हृदय की धमनी के रुके हुए स्थान के समानांतर जोड़ दिया जाता है।
यह नई जोड़ी हुई नस धमनी में रक्त प्रवाह पुन: चालू कर देती है। इस शल्य-क्रिया तकनीक को बाईपास सर्जरी कहते हैं।प्रायः छाती के अंदर से मेमेरी आर्टरी या हाथ की रेडिअल आर्टरी या पैर से 
सफेनस वेन निकालकर हृदय की धमनी से जोड़ी जाती है। इस क्रिया में पुरानी रुकी हुई धमनी को हटाते नहीं है, बल्कि उसी धमनी में ब्लाक या रुकावट के 
आगे नई नस जोड़ दी जाती है, इसी से रक्त प्रवाह पुन: सुचारु होता है। धमनी रुकावट के मामले में बायपास सर्जरी सर्वश्रेष्ठ विकल्प होत है।

जाने क्या है बायपास सर्जरी और क्यो की जाती है – हार्ट ब्लोकेज का इलाज़

बायपास सर्जरी (Bypass Surgery) एक सर्जिकल (surgical) प्रक्रिया है जो दिल की ब्लॉक्ड (blocked) या आंशिक रूप से ब्लॉक्ड आर्टरी (blocked artery) के आसपास रक्त प्रवाह को हटाने में मदद करती है।
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यह दिल के लिए एक नया मार्ग बनाने और दिल की मांसपेशियों में रक्त के प्रवाह में सुधार करने के लिए किया जाता है। इस सर्जरी के दौरान, एक स्वस्थ, अच्छी तरह से काम करने वाला ब्लड वेसल (blood vessel) हाथ, छाती या पैर से लिया जाता है और फिर 
दिल में अन्य आर्टरीज़ (arteries) से जोड़ दिया जाता है ताकि ब्लॉक्ड (blocked) या रोगग्रस्त क्षेत्र (diseased area) को बाईपास (Bypass) कर सके।
heart attack treatment हार्ट ब्लोकेज का इलाज़
रक्त के खराब प्रवाह के कारण सांस और सीने में दर्द जैसी समस्याएं बाईपास सर्जरी (Bypass Surgery) के बाद ठीक होने लगती हैं। यह हृदय कार्य (heart unction) में भी सुधार कर सकता है और हृदय रोग (heart disease) के जोखिम को कम कर सकता है।

एसे होती है बाय पास सर्जरी heart attack treatment

heart attack treatment
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बाईपास सर्जरी के आपरेशन के लिए पहले सीने के बीच की हड्डी (स्टरनम) को काटकर हृदय को गम्य बनाने हेतु खोल दिया जाता है। उसके बाद उसे हार्ट-लंग मशीन से जोड़ दिया जाता है जिससे हृदय और फेफड़ों का काम यह मशीन करने लगती है। हृदय को एक ऐसे घोल से धो देते हैं, जिससे उसका तापमान कम हो जाता है और उसका धड़कना भी बंद हो जाता है। उसके बाद ग्राफ्टिंग कार्य किया जाता है। इसके लिए पहले से ही हाथ या पैर की नस या पेट की धमनी का ग्राफ्ट तैयार करके रखा जाता है। इसे आवश्यकतानुसार बाईपास ग्राफ्ट कर दिया जाता है। इसके बाद हृदय और फेफड़ों को रक्त संचार व्यवस्था को हटा लेते हैं, व हृदय की सतह पर दो पेसमेकर के तार लगा देते हैं।
पेसमेकर के तारों को अस्थाई पेसमेकर से जोड़ देते हैं। हृदय की धड़कन के अनियमित होने पर यह पेसमेकर उसे नियंत्रित कर लेता है। छाती की हड्डियों को तारों से मजबूती से सिलकर त्वचा में टांके लगा दिए जाते हैं। यह आपरेशन तीन-चार घंटे की अवधि का हो सकता है और इस बीच रोगी को चार से छह यूनिट तक रक्त चढ़ाना पड़ सकता है।

 

बायपास सर्जरी मे होता है यह रिस्क- heart attack treatment

एक बाईपास सर्जरी (Bypass Surgery) में जटिलता (complication) का जोखिम (risk) आमतौर पर कम होता है, हालांकि यह सर्जरी से पहले आपके समग्र सामान्य स्वास्थ्य (overall general health) पर निर्भर करता है।
यदि आपात (emergency) स्थिति में सर्जरी की गई थी, या यदि आपके पास गुर्दे की बीमारी (kidney disease), मधुमेह (diabeties), लेग्स और इम्फीसेमा (फेफड़ों की बीमारी) {legs or emphysema (lung disease)} में ब्लॉक्ड आर्टरी
(blocked artery) जैसी गंभीर स्वास्थ्य स्थितियां हैं तो जोखिम कारक अधिक होगा। बाईपास सर्जरी (Bypass Surgery) से जुड़े संभावित जोखिम और जटिलताएं हैं:·ब्लीडिंग (bleeding)
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Bypass Surgery

 

एर्थिथमिया (Arrhythmias), दिल की अनुचित धड़कन (improper beating) छाती में घाव की संक्रमण (infectio स्ट्रोक (Stroke) किडनी प्रोब्लेम्स (kidney problems)स्मृति हानि या परेशानी का सामना करते समय सोचना जिसमे स्पष्ट रूप से आम तौर पर 6 महीने में सुधार      होता    है हार्ट अटैक (Heart attack), अगर रक्त के थक्के सर्जरी के ठीक बाद टूट जाता है

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हार्टके इलाज़ (बाइ पास सर्जरी) के बाद क्या न खाए

  • हार्ट की बाइ पास सर्जरी के बाद डॉक्टर खानपान को लेकर अक्सर कई तरहा की सलाह देते है
  • तेल मे तला और बना हुआ कोई भी खाद्द पदार्थ बिलकुल ना खाए।
  • कोलिस्ट्रोल टाइम पीआर चेक करवाते रहे और उसको बैलेन्स करने के लिए डाक्टर की सलाह ले।
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  • अपना बीपी बैलेन्स रखने के लिए रोज़ व्यायाम करे ,योगा करे।
  • सर्जरी के बाद खून को मोटा होने न दे क्यो की धमनियो मे रक्त का थक्का जमने का डर रहता है इसलिए ड्राय फूड कम से कम खाए इसके इलवा एसे और भी कोई भी खाद्द पदार्थ जो रक्त को मोटा करती हो वो न खाए। जैसे सारसो का पिसा हुआ साग इतत्यादी।

 

यदि स्वस्थ जीवन जीना चाहते हो तो – जान लो सेहत से जुड़ी ये खास बाते -health tips in hindi

आज कल  ज़्यादातर लोग धन कमाने मे इतने व्यस्त हो गए हैं की अपनी सेहत की तरफ ध्यान ही नहीं देते।जिसके चलते मोटापा ,मधुमेह ,दिल की बीमारियाँ ,पेट की बीमारी ,जैसी नई नई छोटी बड़ी बीमारियों से घिरे जाते है .

लंबे समय तक जीवन का असली आनंद तभी ले पगोगे जब आप स्वस्थ रहोगे आपका शरीरी निरोगी रहेगा | धन तो फिर भी कमाया जा सकता है लेकिन एक बार स्वस्थ बिगड़ जाए तो बहुत मुश्किल से सुधरता है , या फिर सारी जिंदगी दवाइयों के सहारे चलना पड़ता है |इसलिए जीवन मे धन से जादा एक अच्छी सेहत का होना  जरूरी है |

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