global warming kya hai | इससे बचने के उपाय

Global warming – बढ़ते प्रदूषण की वजह से वायुमंडलीय तापमान मे जो डरा  देने वाले परिवर्तन आरहे है लोग अब भी उसके प्रति सजग और जागरूक नहीं हो  रहे जिस वजह से  ग्लोबल वार्मिंग आज के दौर मे वैज्ञानिको के लिए  भी एक चुनौती बन चुकी है | दुनिया भर मे  40 से 50% लोगो की लापरवाही का खामियाजा आज पूरी दुनिया भुगत रही है … 

 

फिर चाहे वो जीव जन्तु हो या मनुष्य | और यह तो अभी शुरुआत है यदि Global warming का आकड़ा  साल दर साल एसे ही बढ़ता रहा तो आने वाले 100 सालो  मे मानव जाती सहित जीवो का आस्तित्त्व धरती से समाप्त हो जाएगा |

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जी हा दोस्तो पिछले कई दशको से वायुमंडलीय तापमान के बढ़ते हुए आकणे डरा देने वाले है |हालाकी मशीनी सुख सुविधा मे डूबे एवंम जीवन की भाग दौड़ मे व्यस्त आम लोगो की मानसिकता पर इसका  कोई गहरा प्रभाव नहीं पड़ रहा | 

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लेकिन दुनियाभर के लोगो द्वारा जाने अनजाने मे  पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाली की जाने वाली छोटी छोटी लापरवाही आने वाले भविष्य और आने वाली पीढ़ियों को साल दर साल इसका खामियाज़ा भुगतना पड़ेगा.

इसलिए यह  भी एक बहुत बड़ी वजह और चिंता का विषय  है जिसके तहत लोग जाने अंजाने मे पर्यावरण को प्रदूषित करने मे छोटी छोटी गलतिया  किए जा रहे है जो की ग्लोबल वार्मिंग को न्योता देने के लिए काफी है |

चलिए जानते है-

global warming क्या है? 

Global warming दो शब्दों से मिलकर बना है  Global + warming जो की शब्द से ही स्पष्ट है.

 

Global  एक अंग्रेजी शब्द है जिसका अर्थ गई धरती, वहीं warming  भी अंग्रेजी शब्द है जिसका अर्थ है गर्मी देने वाला… (वार्म यानी गर्म).

 

इस प्रकार इसका सम्पूर्ण अर्थ हुआ धरती एवम वायूमंडल का गर्म हो जाना.

 

आसान शब्दों में समझें तो  ‘पृथ्वी के तापमान में वृद्धि और इसके कारण मौसम में होने वाला परिवर्तन’  Global warming कहलाता है. 

 

अक्सर आने वाली प्राकृतिक आपदाओं मे से एक हिमप्रपात, जल प्रपात  विनाशकारी आपदाए इसी का परिणाम है. 

 

Global warming होने की मुख्य वजह क्या है? 

Global warming की मुख्य वजह ग्रीन हॉउस गैसे है. यह  वायुमंडल मे फैली गैसों की एक ऐसी परत होती है जो गर्मी को अपने अंदर अवशोषित कर लेती है. जिस वजह से आस पास का वायुमंडल गर्म हो जाता है. फिर हम इसी से जन्म होता है ग्लोबल वार्मिंग का. 

 

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सिर्फ यही नहीं ,जब सूर्य का प्रकाश धरती की ओर आरहा होता है तब यह प्रकाश वायुमंडल मे फैले ग्रीनहौस गैसों की परत से होकर धरती पर पहुचता है, जिस वजह से ग्रीन हाउस गैसों की परत सूर्य से निकने वाली प्रकाश की गर्मी का बहुत सारा हिस्सा अपने अंदर अवशोसित यानि सोख लेती है |

 

जिसका असर हर साल बढ़े हुए वायुमंडलीय तापमान के रूप मे सामने आता है |

जी हाँ दोस्तों, पिछले कुछ दशकों से लगातार

  •  बढ़ती जनसख्या,
  •  शहरीकरण , 
  • पेड़ो का कटाव, 
  • अत्यधिक जहरीला धुआँ छोड़ती चिमनिया,
  • बढ़ते यातायात , 
  • फैक्ट्रियों से निकलने वाला गन्दा पानी तथा
  •  लोगो द्वारा  अनेक प्रकार के मशीनी उपकरणों के इस्तेमाल से उतसर्जित होने वाली गैसे (हीट) इसकी मुख्य  वजह है. 

 

क्या होती है ग्रीन हॉउस गैसे? 

 

धरती पर मानव गतिविधियों और मशीनों द्वारा उतसर्जित होने वाली ये वो गैसे होती है जो अपने अंदर गर्म गैसों एवम गर्म प्रकाश  को सोख लेती है.

यह ग्रीनहाउस गैस धरती से अलग अलग रूप मे और अलग अलग तरीको से उतसर्जित होती रहती है जैसे =

  • मानव गतिविधिया
  • यातायात से निकलते धुए 
  • कार्बन के जलने से फेक्ट्रियो एवम चिमनियों से निकलते धुए 
  • फैक्ट्रियों, दफ्तरों और घरो मे उपयोग होने वाली मशीनों की गर्माहट से निकलने वाली गर्म गैसे जो छोटे कार्बनिक अणु के रूप मे वायुमण्ड मे समाहित होती रहती है. 
  • नदी नालो के गंदे पानी और कचरो के ढेर से गर्म उमस की वजह से निकलती जहरीली गैसे हवा के माध्यम से वायुमंडल मे समाहित हो रही है. 
  • इसके इलावा जंगल के जलने, ज्वाला मुखी फटने और उनके लावा से निकलते गर्म गैसों का उतसर्जन वायुमंडल मे समाता जा रहा है. 

 

ग्रीनहाउस गैसों मे सबसे ज़ादा प्रभावशाली कार्बनडाइऑक्साइड गैस होती है और इसी की मात्रा सबसे अधिक होती है.

क्योंकि पूरी दुनियां मे असंख्य जीव जंतु प्राणी मौजूद है जिनसे हर सेकेंड कार्बनडाईऑक्सायड उतसर्जित होती रहती है. 

 

अगर बात उद्योगिक क्रांति से पहले की करें तो ग्रीन हॉउस गैस ना के बराबर थीं.

लेकिन औद्योगिक क्रांति के बाद इसमें तेजी से बढ़ौतरी हुई है. लेकिन पिछले कुछ दशकों से इसका बढ़ना ज़ादा तेज़ रहा. 

पुराने दर्ज वायुमंडलीय रिकॉर्ड के अनुसार 1970 के बाद से कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में लगभग 79% की वृद्धि हुई. 

 

पिछले 2 दशकों से तापमान मे आई वृद्धि की वजह से ग्लेशियर पिघलने की घटनाए लगातार देखने को मिली है. जिस वजह से समुद्र का जलस्तर काफ़ी ज़ादा बढा है. 

 

चलिए समझते है किन किन गैसों के उत्सृजन एवम जमाव से वायुमण्डल मे ग्रीनहॉउस गैस की परत बनती है. 

 

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कैसे बनती है ग्रीनहाउस गैसों की परत 

ये 5 ग्रीन हाउस गैसे धरती से उत्सर्जित होकर वायुमंडल की तरफ जाकर परत बना देती है |

 

  1. कार्बन डाइऑक्साइड (CO2)
  2. मीथेन (CH4): 
  3. नाइट्रस ऑक्साइड (N2O):
  4. नाइट्रस ऑक्साइड (N2O):
  5. जल वाष्प (water vapour)

 

ये ग्रीन हाउस गैसे कहा से किन वजह से उत्सर्जित होती है |

  1. कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) – कार्बन डाइऑक्साइड जीवाश्म ईंधन (कोयला, प्राकृतिक गैस, और तेल), सॉलिड वेस्ट, पेड़ और लकड़ी के उत्पादों को जलाने, और कुछ रासायनिक प्रतिक्रियाओं (जैसे-सीमेंट का निर्माण) के परिणामस्वरूप वायुमंडल में प्रवेश करती है।

 

  1. मीथेन (CH4): मीथेन कोयले, प्राकृतिक गैस और तेल के उत्पादन और परिवहन के दौरान उत्सर्जित(emitted) किया जाता है।

 

  1. नाइट्रस ऑक्साइड (N2O): नाइट्रस ऑक्साइड कृषि और औद्योगिक गतिविधियों के दौरान, साथ ही जीवाश्म ईंधन और ठोस अपशिष्ट के दहन के दौरान उतसर्जित होता है।

 

  1. फ्लोरिनेटेड गैस: हाइड्रोफ्लोरोकार्बन, पर्फ्यूरोकार्बन, सल्फर हेक्साफ्लोराइड, और नाइट्रोजन ट्राइफ्लोराइड सिंथेटिक, ये सभी बेहद शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैसें हैं जो विभिन्न औद्योगिक प्रक्रियाओं से उत्सर्जित होती हैं।

 

  1. जल वाष्प (water vapour) जब भी तेज़ गर्मी की वजह से धरती पर मौजूद जल वाष्पित होकर वायुमंडल मे प्रवेश करता है तो इनमे कुछ गर्म गैसों मत बादल कर ग्रीन हाउस गैसों मे समाहित हो जाती है |

 

जल वाष्प जलवायु प्रणाली का एक अत्यधिक सक्रिय घटक है जो बारिश या बर्फ में घुलनशील या वायुमंडल में लौटने के लिए वाष्पीकरण की स्थिति में परिवर्तनों में तेजी से प्रतिक्रिया देता है।

 

Global warming history 

Global warming का इतिहास केवल 50 साल पुराना है।ग्लोबल वार्मिंग आज  बड़ी चिंता का कारण है और ये कहा जाता है या यूं कहिए कि देखा जा रहा है कि तथा कथित शहरी विकास के कारण प्रदूषण के स्तर में वृद्धि Global warming का सबसे बड़ा कारण माना जा रहा है।

 

लगभग 100 साल पहले Global warming किसी के जेहन में आया नहीं था।जबकि वैज्ञानिक इस बात कि पुष्टि करने से हिचकते नहीं थे कि आदमी जिस तरह से अपनी गतिविधियों को रूप रेखा दे रहा है इससे जरूर आने वाले समय में संसार के लिए खतरा बन सकता है।और उससे पृथ्वी के तापमान में वृद्धि हो सकती है।

 

1930 में शोधकर्ताओं ने दावा किया कि वायुमंडल में कार्बन उत्सर्जन की मात्रा बढ़ रही है और धीरे धीरे इसका प्रभाव हमारी  पृथ्वी पर प्रभाव डालेगा।

 

मगर उस भविष्यवाणी को उतनी गंभीरता से नहीं लिया गया था।

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ग्लोबलवार्मिंग के वर्तमान और भविष्य मे भयानक  प्रभाव 

यदि Global warming का आकणा साल दर साल एसे ही बढ़ता रहा और यदि इसे रोका न गया  तो आने वाले दस 100 सालों  मे मानव जाती सहित जीवो का आस्तित्त्व धरती से समाप्त हो जाएगा |

अभी वर्तमान मे कुछ इलाकों मे सालों से बारिश ना होने की वजह से जमीनी स्तर का पानी लगातार खत्म होते जारहा है यानी सूखा और बंजर जैसे हालात पैदा हो चुके है.

वहीं दूसरी तरफ ग्लेशियर पिघलना और उससे आने वाली तबाही इसका सबसे बड़ा उदाहरण है.

भविष्य मे वायुमंडल मे असंतुलन पैदा हो जाएगा तथा मोसमों मे भारी उतार चढ़ाव आएंगे जिस वजह से धरती का कुछ हिस्सा  जलमग्न हो जाएगा और कुछ हिस्सा सूखा की वजह से नष्ट हो जाएगा |

 

 ग्लेशियर  के बर्फ का पिघलना

Global warming से पृथ्वी पर बहुत बड़ा प्रभाव देखने को मिल रहा है।पृथ्वी की की गर्मी लगातार बढ़ती जा रही है।इसके कारण ग्लेशियर पर जमी बर्फ भी पिघलते जा रही है।जिससे पृथ्वी पर गर्मी का लेवल बढ़ रहा है।

 

 समुद्री स्तर का बढ़ना

Global warming की वजह  पृथ्वी का तापमान बढ़ना और इसकी वजह  ग्लेशियर पर जमी बर्फ पिघलना ।जब बर्फ पिघलती है  और जाकर समुद्र ने मिलती है तो समुद्र का जलस्तर बढ़ता है।

जिसकी वजह से समुद्र के नीचे के द्वीप और शहरों के डूबने का खतरा बना रहता है।

 

यदि इसी तरह से ग्रीनहाउस गैसे उतसर्जित होती रही तो 21वी सदी मे मानव एवम जीव जगह के अस्तित्व की कल्पना नहीं कर सकते. एक दिन धरती जलमग्न हो जाएगी. 

 

 

धरती बंजर हो जाएगी, पानी और नमी खत्म हो जाएगी

 

Global warming के कारण ही दिनों दिन गर्मी बढ़ती जा रही है।जिसका सीधा असर मानव द्वारा उपयोग किये जाने वाले धरती के नीचे जल का भंडार तेजी से खत्म हो जाएगी.

 

वर्तमान मे इसका प्रभाव कई इलाकों मे देखने को मिल  रहा है. वातावरण मे नमी खत्म हो जाएगी जिस वजह से पेड़ पौधे पनप नहीं पाएंगे अतः सूख कर नस्ट हो जाएंगे. जमीने बंजर हो जाएंगी. 

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इंसान जीव जंतु खाने और पानी को तरस जाएंगे.. 

 

रेगिस्तान का प्रसार बढ़ेगा 

ये तो सत्य है कि जब गर्मी ज्यादा होगी और बारिश कम होगी तो पृथ्वी का ज्यादातर हिस्सा सूखेगा जिसकी वजह से वह जमीन फसल के लायक नहीं रहेगी।और कुछ समय बाद वह मरुभूमि या कहे तो रेगिस्तान मे परिवर्तित हो जाएगी। 

 

इस Global warming की वजह से रेगिस्तान का भी प्रसार बढ़ता जा रहा है।

 

बेसमय बारिश का होना 

  Global warming की वजह से वायुमंडल का संतुलन इस हद तक बिगाड़ जाएगा जिस वजह से कुछ इलाकों मे बेमौसम और बेसमय बारिश होती रहेगी  बरसात के मौसम में सूखा और गर्मी के मौसम में जबरदस्त बारिश ।

वर्तमान मे ये कही ना कहीं मौसम के मिज़ाज में बदलाव देखने को मिल रहा है।

इस असमय बारिश से किसानों को सही समय का चुनाव खेती के लिए बहुत मुश्किल हो गया है। फसलों को गहरा नुकसान पहुंचेगा. 

 

भयंकर बाढ़ का खतरा बढ़ेगा 

Global warming की वजह से जलवायु मे इतना जबरदस्त बदलाव आएगा की  एक तरफ जहाँ रेगिस्तान का प्रसार देखने को मिलेगा वहीं दूसरी तरफ कहीं कहीं बाढ़ की तबाही नजर आती दिखेगी. पूरी तरह से वायुमंडलीय संतुलन बिगाड़ जाएगा. 

 

 

चलिए अब विस्तार से समझते है वो कौन सि गलतियां अथवा कारण है जिनकी वजह साल दर साल Global warming बढ़ती जा रही है.

 

 

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ग्लोबल वार्मिंग बढ़ने के कारण -causes of Global Warming

Global warming के बढ़ने के कारणों की व्याख्या करे तो अनेकों कारण हमारे सामने आते है।

Global warming के लिए उत्तरदाई  ग्रीन हाउस गैस है.  

ग्रीनहाउस गैसे  Global warming का यह सबसे बड़े कारणों में से एक है।

 

लगातार फैलता प्रदूषण

प्रदूषण भी global warming बढ़ने के कारण है ।कैसे ?

जितनी तेजी से  अधिक जनसंख्या बढ़ रही है उतनी तेजी से प्रदूषण भी बढ़ रहा है कहने का मतलब यह है कि लोगो द्वारा दैनिक क्रियाए   कूड़ा , गंदगी ,नाली का गंदा पानी का जमाव,और ज्यादा संख्या में यातायात का बढ़ना ,आदि सभी प्रदूषण के कारण है।

इस तरह से ग्रीन हाउस गैस मे  वृद्धि हो रही है जो  कहीं ना कहीं देखा जाय तो Global warming का कारण है। 

 

तेजी से वन कटाव और जंगलो का जलना 

आजकल ज्यादा तर जंगल या वन की कटाई हो रही है। और इन वनों की कटाई की वजह से कार्बोनडाईऑक्साइड    वातावरण में बढ़ रही है।और यह गैस Global warming के बढ़ने का एक  कारण है ।क्योंकि ये पेड़ पौधे कार्बनडाइऑक्साइड  वातावरण से अवशोषित करते है जिससे वातावरण भी संतुलित रहता है। पेड़ पौधे जंगल  ऑक्सीजन के लेवल को बढ़ाते है।

 

 

 

पिछले 55 सालो मे ग्लोबल वार्मिंग से जलवायु मे होने वाले परिवर्तन ने विभिन्न देशों के बीच गैर बराबरी को बढ़ावा दिया है।

 

कुछ नए अध्ययन से ये पता चला है कि जो गरीब देश है उनकी गरीबी बढ़ी वही जो धनी या कहे तो अमीर देश की अमीरी बढ़ी है।

 

 

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Global Warming को रोकने के उपाय

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Global warming को रोकने के लिए वैज्ञानिकों ने कुछ उपाय बताए है जिसका हम पालन करे तो अवश्य ही इसको रोकने में हम कामयाब हो सकते है । 

 

विज्ञानं खुद कहता है की इसकेलिए धरती पर रह रहे हर इंसान को जागरूक होना पड़ेगा और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए कुछ नियमों का ईमानदारी से पालन करना होगा. 

 

तो चलिए जानते है पर्यावरण के प्रति हम इंसानों की  कौन कौन सि जिम्मेदारियां एवम नियम है जिनका ईमानदारी से पालन करने पर Global warming को बढ़ने से रोका और खत्म किया जा सकता है. 

 

फ्रिज, एयर कंडीशन,कूलिंग मशीनों का कम प्रयोग

Global warming को कम करने के लिए सबसे बड़ी जरूरी जो बात है वो है cfc गैसों के उत्सर्जन को कम करना।

और ये सीएफसी गैस फ्रिज एयरकंडीशन या कहे तो कूलिंग मशीनों के ज्यादा प्रयोग करने से बढ़ता है ।इस लिए इसका जितना कम   प्रयोग करेंगे उतना ही इस गैस का उत्सर्जन कम होगा और Global warming से उतना ही ज्यादा राहत मिलेगी।

 

यातायात नियमों को सख़्ती से लागू करना. 

वाहन चलाने वाले हर व्यक्ति की जिम्मेदारी बनती है की वह समय से अपने वाहन की सर्विस करवाता रहे अधिक धुआँ छोड़ने वाले वाहन का उपयोग ना करें.. 

 

वाहनों की तेजी से  बढ़ती संख्या और इनसे होने वाले प्रदूषण को ध्यान मे रख कर सरकार लोगो को इलेक्ट्रिक वाहन लेने के लिए जागरूकता अभियान चलाती है जिसके अंतर्गत वह इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने वालों को सब्सिडी भी देती है. ताकी वह सस्ते दामों पर इलेक्ट्रिक वाहन को एफोर्ड कर सकें. 

 

सरकार की यह पहल एक दिन प्रदूषण मुक्त यातायात सड़को पर रफ़्तार पकड़ेंगे. 

 

जनसंख्या नियंत्रण की जिम्मेदारी 

Global warming  का सबसे बड़ा कारण जनसंख्या की बढ़ोतरी है।जितनी जनसंख्या बढ़ेगी उतनी ज़ादा मात्रा मे कार्बनडाइऑक्साइड का उतसर्जन होगा. इसलिए हर इंसान की जिम्मेदारी बनती है की वह इस पर नियंत्रण रखें. 

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फैक्ट्री और चिमनियों पर नियंत्रण –

फैक्ट्रीज से निकलने वाले गंदे पानी पर रोक लगानी होगी. ऊंची ऊंची चिमनियों को बंद करवाना होगा जो की खूब सारा कार्बनिक धुआँ निकालता है. 

 

पेड़ पौधे रोपण सबकी जिम्मेदारी

 जितने भी वन जंगल या पेड़ कट रहे है यदि सभी व्यक्ति ज़िम्मेदारी ले ले की यदि सभी लोग देश  एक एक पेड़ लगाने कि ज़िम्मेदारी ले तो अवश्य ही इस ग्लोबल वार्मिंग से निजात पा सकते है

 

।क्योंकि जितने पेड़ो की संख्या होगी ऑक्सीजन का लेवल स्तर बढ़ेगा और वातावरण  साफ होगा साथ ही कार्बन डाइऑक्साइड वातावरण में पेड़ो द्वारा अवशोषित कर लिया जाएगा जिससे वायुमंडल मे अच्छा संतुलन बन जाएगा. और ग्लोबल वार्मिंग का खतरा काफी हद तक कम हो जाएगा।

 

Global warming निष्कर्ष-जरूर पढ़े –

 

 

अंत में मै यही कहूंगा कि जितनी हमारी समझ प्रकृति के प्रति बढ़ेगी उतनी सुरक्षित एवम् हम सहज होंगे।यदि हम ऐसे ही  लापरवाही करते रहेंगे तो भविष्य मे इसका खामियाजा हमारी आने वाली पढ़िया भुगतेंगी |

 

गोलबल वार्मिंग को खत्म करने का बस यही एक तरीका है की हम सब  एक होकर पर्यावरण के प्रति अपनी अपनी जिम्मेदारियो को ईमानदारी से निभाए और भविष्य को सुरक्षति बनाए |

 

तो आओ हम सब पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारियो को समझते हुए आज ये शपथ लेते है की न तो प्रदूषण फैलाएँगे और ना ही फैलाने देंगे | 

 

तो दोस्तो ऊमीद करता हु की global warming की इस पोस्ट से आपको बहुत ज्ञान हासिल हुआ होगा और अपनी जिम्मेदारियो के प्रति सजग भी हो चुके होंगे |

 

लेकिन दोस्तो मैं चाहता हूँ की बाकी के लोग भी आपकी तरह इस पोस्ट को पढ़ कर पर्यावरण और global warming के बढ़ते खतरे को समझ कर अपनी जिम्मेदारियो को निभा सके |इसलिए global warming की इस पोस्ट को जादा से जादा लोगो तक पहुँचने के लिए खूब शेयर करे |

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