itihas ka sabse amir aadmi | mansa musa biography in hindi

itihas ka sabse amir aadmi | mansa musa biography in hindi

itihas ka sabse amir aadmi | mansa musa biography in hindi | itihas ka sabse amir insan | इतिहास का सबसे अमीर आदमी rechest person of the history – मनसा मूसा | इसकी दौलत के सामने आज के बिलियनर्स कुछ भी नहीं |

दोस्तों यदि आज के दौर मे हम दुनियाँ के सबसे अमीर इंसानों की बात करे तो आप elon musk या ज़ेफ बेज़ोज़ का ही नाम लेंगे, या फिर चाहो तो अन्य देशो के सबसे दिग्गज़ रहीशो को भी खड़ा कर लो, क्योंकि आज हम आपको एक ऐसे शख्स के बारे बताने वाले है , की आप गर आज के समय के, दुनियाँ के टोप 5 अमीर लोगो की सारी दौलत भी एक साथ मिला दोगे फिर भी उसकी दौलत के सामने कुछ भी नहीं.

दुनियाँ के 10 सबसे अमीर देश

जी हाँ मै बात कर रहा हूं अफ्रीका की आधी धरती पर राज करने वाले मनसा मूसा (mansa musa) की.

जिसे इतिहास का सबसे अमीर शख्स माना जाता है.

mansa musa की दौलत का अंसाज़ा आप इस बात से ही लगा सकते है की मनसा मूसा ज़ब हज की यात्रा पर जा रहा था तब वो अपने साथ 8 हज़ार से भी ज़ादा सैनिको और हज़ारो ऊँट घोड़ो का काफिला ले कर चला था. इनमे से 70 से 80 ऊँट तो ऐसे थे जिनमे हर एक पर 136 किलो सोना लदा हुआ था. और इतना सोना मूसा ने सिर्फ रास्ते मे मिलने वाले गरीबो मे ही बाँट दिए थे., क्यों…उड़ गए ना होश……..

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आखिर कौन था ये मनसा मूसा, कहाँ का रहने वाला था,और कैसे बिना किसी युद्ध और लूट पाट के ये शख्स इतना दौलत मंद बन गया…..आखिर किस तरह का व्यापार करता था मनसा मूसा जिसने इसे इतिहास का सबसे अमीर शख्स बना डाला.

itihas ka sabse amir aadmi | mansa musa biography in hindi

 

दोस्तों मनसा मूसा का जन्म 1280 ईस्वी मे माली के राज घराने मे हुआ था. आज के टाइम मे माली, पश्चिमी अफ्रीका का आठवा सबसे बड़ा देश है.

mansa musa का पूरा नाम मनसा कानकु मूसा था. मनसा एक टाइटल है जिसका अर्थ है बादशाह, जो की शासक यानी राजा अथवा सम्राट बनने पर लगाया जाता है.

 

मूसा के बड़े भाई का नाम अबू बक्र था जिन्होंने 1312 ईस्वी तक माली मे शासन किया.अबू बक्र बहुत ही महत्वकांक्षी इंसान था. वह अटलांटिक महासागर को पार कर ये देखना और जानना चाहता था, की उसके आगे भी कोई दुनियाँ है तो वो कैसी है. हम उसे भी जीत कर अपने देश मे मिला लेंगे.

 

बस फिर क्या था, वो 2 हज़ारो जहाज़ो का बेड़ा लिए सैकड़ो सैनिको और दासो के साथ उतर गया अटलांटिक महासागर की यात्रा मे. लेकिन कहा जाता है वो वहाँ से वो कभी वापिस लौट कर नहीं आया.

इसके बाद 1312 ईस्वी मे मनसा मूसा पश्चिम अफ्रीका के माली साम्राज्य का शासक बना.

mansa musa ने अपने शासन काल मे अपने साम्राज्य को इतना विशाल बना दिया की यह मंगोल साम्राज्य के बाद दुनियाँ का दूसरा सबसे बड़ा समराज्य बन गया था.

यूँ तो माली साम्राज्य की स्थापना सुंदीयाता कीता द्वारा की गई थी.

और मनसा मूसा के दौर मे ये साम्राज्य कोई छोटा मोटा देश नहीं बल्कि ये इतना विशाल बन गया था, की आज के मॉरीटानिया, सेनेगल, गांबिया, गिनिया, बुर्किना फासो, माली..चाड और नाइजीरिया ये सभी देश, तब मूसा की सल्तनत का हिस्सा हुआ करते थे।

 बस यूँ समझ लो की पूरे अफ्रीका महाद्वीप का आधा हिस्सा इसी के अंडर आता था.

कहा जाता है की 12वीं शताब्दी से लेकर 16वीं शताब्दी तक माली साम्राज्य उस दौर का सबसे बड़ा और अमीर साम्राज्य हुआ करता था.

 

मूसा के पास लाखो की पैदल सेना और कई हज़ार घुड़ सवार थे.

इतने विशाल साम्राज्य को व्यवस्थित तरीके से चलाने और कर वसूली के लिए मनसा मूसा ने ना सिर्फ छोटे छोटे राज्य स्थापित किये बल्कि हर राज्य मे गवर्नरस की नियुक्ति की गई जिन्हे फर्बा कहा जाता था. 

 

मनसा मूसा कम वक़्त मे इतनी शानो शौकत बटोरने मे उसका धर्म उसके लिए बहुत लकी साबित हुआ.मूसा मुस्लिम धर्म का था, माली और उसके आस पास के देशो मे ज़ादातर जनता भी इस्लामिक ही थी. इसलिए उन्हें मूसा के शासन से कोई दिक्क़त नहीं थी.जिस वजह से बाहरी आक्रमण का तो सवाल ही नहीं उठता.

 

लेकिन मूसा के साम्राज्य मे कुछ ऐसे भी कबीले थे जो अलग धर्म के थे और वे मूसा की हुकूमत को अपने धर्म व अस्तित्व को लेकर एक खतरा मानते थे.

 

 ऐसे मे उन सब ने मूसा के विरुद्ध बगावत कर दी. हालांकि मूसा की विशाल सेना के सामने वो टिकने वाले तो थे नहीं जिसके चलते वो घुटनो पर आगए,  पर मूसा ने उन्हें जान से नहीं मारा, क्योंकि मूसा ने ये बात समझ ली थी की गर उसे शासन और व्यापार बनाए रखना है तो सभी धर्मों को साथ लेकर चलना होगा. इसलिए मूसा भले ही इस्लामिक देश का था पर वहाँ कभी इस्लामिक रूल्स लागू नहीं किये गए ताकी हर कोई वहाँ अपने अपने धर्म के साथ बेफिक्र हो कर जी सके.

 

चलिए अब बात करते है की मनसा मूसा ने आखिर इतनी दौलत कैसे और कहा से हासिल की.

मनसा के तीन सबसे बड़े व्यापार थे , सोने का व्यापार, नमक का व्यापार और कोला का व्यापार, कोला वहाँ पर एक तरह का फल होता है जिसे खाने से प्यास बहुत कम लगती है…उन दिनों रेगिस्तान के माध्यम से छोटे   बड़े कई तरह के व्यापार किये जाते थे तो ऐसे मे रेगिस्तान मे लम्बी दूरी तय करनी पड़ती थी इस वजह से इस फल की डिमांड बहुत ज़ादा थी.

इन्ही तीनो व्यापार के दम पर मनसा ने अपने देश की अर्थ व्यवस्था को आसमान तक पहुंचा दिया.

व्यापारिक दृस्टि से टिंबकटू, माली का सबसे बड़ा शहर हुआ करता था.

दरअसल मनसा मूसा का जो मेन सौर्स of इनकम था वो था टैक्स जो की तीन चीजों पर ही लिया करता था और वो है सोना, नमक और कोला…

इन तीनो की डिमांड बहुत ज़ादा होने की वजह से मनसा मूसा इन पर भारी टैक्स वसूला करता था.

रही बात सोने की, तो अफ्रीका मे मौजूद सोने की जितनी भी खदाने थी वो मूसा या माली शासको की कभी थी ही नहीं…दरसल वो इन खदानों से निकले सोने पर इतना भारी टैक्स वसूलता था की समझ लो, पूरा माली साम्राज्य इन्ही टैक्स के बल पर ही फल फूल रहा था.

दुनियाँ का आधा सोना सिर्फ मनसा मूसा के पास था. इतनी अद्भुत धन सम्पदा के इस मालिक को दुनियाँ मे तब तक कोई नहीं जानता ज़ब तक इसने हज यात्रा नहीं की थी.

 

एक मुस्लिम होने के नाते मनसा मूसा की हज यात्रा करने की बहुत इच्छा थी…

 

बस फिर क्या था, सन 1324 मे यानी अपनी 44 साल की उम्र मे एक अद्भुत काफिला लेकर हज की यात्रा के लिए निकल पड़े. 

कहा जाता है की मूसा अपने साथ पूरा शहर लेकर चल पड़ा था. जिसमे कुल 50 हज़ार के करीब लोग शामिल थे इसमे हज़ारो सैनिक, हज़ारो घुड़सावर, सैकड़ो दास, सैकड़ो ऊँट मनोरंजन के लिए कई नाचने गाने वालो पूरा जत्था और माली के शाही परिवार के लोग,शामिल थे.

 

रोंगटे खड़े कर देने वाले इस अद्भुत काफिले मे 80 से 90 ऊँट तो ऐसे थे जिन पर सैकड़ो किलो सोना लदा हुआ था…सिर्फ यही नहीं सैकड़ो दास भी अपनी पीठ पर सोना लादे चल रहे थे.

सैकड़ो मील लम्बे इस रास्ते मे कई शहर आए,, जहाँ के गरीब लोगो मे मूसा अपनी  धन दौलत उन पर लुटाते हुए आगे बढ़ता रहा.

 

मनसा मूसा की यात्रा का सबसे रोमांचक सफर वो रहा ज़ब वह कायरा शहर पहुंचा..यहां मनसा मूसा का काफिला 3 महीने रुका रहा और वहाँ के राजा को मूसा ने सैकड़ो किलो सोना भेट मे दे दिया.

 

मूसा की इस यात्रा मे शामिल लोगो की भीड़ और शानो शौकत को जो भी देखता वो बस हक्का बक्का रह जाता.

ज़ब मूसा इजीप्ट पहुंचा तो यहां के सम्राट भी उनका यह काफिला देख दंग रह गया.

 

इस दौरान मूसा ने सहारा रेगिस्तान से होते हुए मिलो लम्बा सफर तय करते हुए कई राज्यों से होता हुआ इजीप्ट से लेकर मक्का तक की यात्रा पूरी की.

कहा जाता है की अपनी तीर्थ यात्रा से लौटते वक़्त माली ने अरब मे बहुत सी जमीने और घर खरीद लिए, ताकी उसके बाद जो भी तीर्थ यात्रा पर जाए उसे रहने मे कोई परेशानी ना हो.

 

सिर्फ यही नहीं ”  मूसा,ऐसे कई शहरों से होता हुआ आया जहाँ उसने कई तरह की खूबसूरत इमारते, universities, मस्जिदे, और घर देखे जिनसे वो बहुत प्रभावित हुआ,और उसने मन बना लिया, की वह  अपने माली साम्राज्य मे भी ऐसी ही खूबसूरत इमारते और मस्जिदे बनवाएगा, जिसके चलते वह उन शहरों से वहाँ के बेहतरीन अर्कीटेक्ट और कारीगरो को भी अपने साथ माली देश ले आया.

माली आकर मूसा ने ऐसी बहुत सी इमारते, स्कूल,यूनिवर्सिटी, और मस्जिदे बनवाई जिन्हे आज भी कई लोग उसे देखने जाते. 

मनसा मूसा की ये हज यात्रा एक अद्भुत इतिहास बन गई.

35 साला तक राज करने के बाद  57 साल की उम्र में मूसा इस दुनिया को अलविदा कह गए। फिर उनके बेटे ने गद्दी संभाली लेकिन वो इस साम्राज्य को चला नहीं पाया। जिसके बाद मूसा की सल्तनत समय के साथ छोटे-छोटे टुकड़ों में बंट गई।

तो दोस्तों ये था इतिहास के सबसे अमीर शख्स का बादशाही भरा सफर.

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