नीम के धार्मिक और औषधीय गुण

नीम का धार्मिक पूजा मे महत्तव के साथ साथ इसका औषधीय गुण भी बहुत ज़्यादा है नीम की पत्तिया खाने मे भले ही कड़वी होती है पर औषधीय गुणो से भरपूर होती है। नीम एक ऐसा पेड़ है जिसकी पत्ती- छाल- तना, सब कुझ औसधीय गुणो से भरपूर है।
इसकी सूखी पत्तीया जलाने से हवा मे मौजूद गंदे बेक्टीरिया और मच्छर खत्म हो जाते है इसके इलवा इसकी ताज़ा पत्तियों को पीस कर चोट सूजी हुई जगह पर लगाने से चोट जल्दी ठीक होता है और सूजन कम होती है।
शीतला माता की पूजा नीम के पेड़ के रूप मे ही की जाती है। इसके इलवा शनि की शांति करने के लिए नीम की लकड़ी पर हवन करना शीघ्र फलदायी होता है।
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नीम के औषधीय गुण
नीम के बारे में उपलब्ध प्राचीन ग्रंथों में इसके फल, बीज, तेल, पत्तों, जड़ और छिलके में बीमारियों से लड़ने के कई फायदेमंद गुण बताए गए है।
नीम के अर्क में मधुमेह यानी डायबिटिज, बैक्टिरिया और वायरस से लड़ने के गुण पाए जाते हैं। नीम के तने, जड़, छाल और कच्चे फलों में शक्ति-वर्धक और मियादी रोगों से लड़ने का गुण भी पाया जाता है। इसकी छाल खासतौर पर मलेरिया और त्वचा संबंधी रोगों में बहुत उपयोगी होती है।
नीम के पत्ते भारत से बाहर 34 देशों को निर्यात किए जाते हैं। इसके पत्तों में मौजूद बैक्टीरिया से लड़ने वाले गुण मुंहासे, छाले, खाज-खुजली, एक्जिमा वगैरह को दूर करने में मदद करते हैं। इसका अर्क मधुमेह, कैंसर, हृदयरोग, हर्पीस, एलर्जी, अल्सर, हिपेटाइटिस (पीलिया) वगैरह के इलाज में भी मदद करता है।
नीम के धार्मिक और औषधीय गुण

स्किन के लिए नीम :-

उबले हुए नीम के पत्तों के पानी से नहाने से हो रही खाज खुजली को समाप्त करने के साथ साथ कील , मुहासे, चमड़ी रोग ही नही बल्कि स्किन से गंदे वाइरस भी निकाल जाते है और कई तरहा की बीमारिया समाप्त हो जाती है।
इसके इलावा नीम के पत्ती चबा चबा कर खाने से दातों मे कीड़े नहीं लगते, पेट के कीड़े मर जाते है और खून को साफ करता है। हजारो बीमारियो को समाप्त करता है।
दातों और मधुमेह के लिए :-
मधुमेह रोगियो के लिए है रामबाड़ इसकी पत्तिया चबा कर खाने से मधुमेह बैलेन्स रहता है। मधुमेह के उपचार में भी नीम के पत्तों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है.
इसके लिए आपको नीम के कुछ पत्तों को एक कप पानी में भिगो कर रखना होगा सिर्फ पानी को सुबह खाली पेट पीना होगा ऐसा नियमित रुप से करने पर
आपको ब्लड शुगर के लेवल को संतुलित करने में मदद मिलेगी। नीम की दातुन करने से पायरिया रोग समाप्त होता है दातों मे कीड़े नहीं लगते और दात मजबूत रहते है।
नीम के धार्मिक और औषधीय गुण

 

नीम के धार्मिक और औषधीय गुण

 

5. चिकन पॉक्स को दूर करने में :-
चिकन पोक्स शरीर मे फैला हुआ एक वाइरस होता है जिस व्जहा से पूरे शरीर मे मोटे दाने निकाल जाते है और इंसान बीमार हो जाता है इस हालत मे इस से छुटकारा पाने के लिए नीम के पत्तों का इस्तेमाल आप चिकन पॉक्स की समस्या को दूर करने में भी कर सकते हैं
जब आपको चिकन पॉक्स की समस्या हो तो आप नीम के पत्तों को अपने बेड पर बिछा कर उस पर जाएं और स्नान करना हो तो नीम के पत्ते मिले हुए पानी का इस्तेमाल करें इसके अलावा यदि आप नीम के पेड़ में लगने वाले फलों को दिखाएं तो राहत मिलती है.
नीम के धार्मिक और औषधीय गुण
6. एलर्जी दूर करने में :-
नीम के पत्तों की कड़वाहट आपकी एलर्जी को दूर करने का काम करती है. इसके लिए सुबह उठके निम के पत्ते का पेस्ट बनाकर उसकी गोली बनाकर इसे शहद या पानी से निगल लीजिए. गोली लेने के 40 मिनट से एक घंटे तक कुछ मत खाइये ताकि ये गोली ठीक से आपके सिस्टम में पहुँच सके.
7. पाचन में :-
नीम हमारे पेट में मौजूद किसी भी तरह के बैक्टीरिया या जीवाणु का प्रतिरोध करता हैं. निम का सबसे अच्छा गुण ये है. की इसे आप जीवन भर बिना किसी डर से खा या पि सकते हो, इससे शरीर को कोई भी नुकसान नहीं होता.
नीम के धार्मिक और औषधीय गुण
8. हैजा के उपचार में :-
हैजा जैसी बीमारियों के लिए भी निम के पत्तों का इस्तेमाल किया जा सकता है निम से आपको हैजे से भी छुटकारा मिलेगा. एक कप पानी में निम के कुछ 15-20 पत्ते मिलाकर सुबह खाली पेट पी लीजिए.
9. रक्त संचरण के लिए :-
यदि आप निम के सूखे पत्तों को नियमित रूप से चबायें तो इससे रक्त संचरण दुरुस्त होता है. और चेहरे पर चमक आने के साथ ही रक्त भी साफ़ होता है. इसलिए आप निम के पत्तों का सेवन कर सकते हैं.
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