महात्मा गाँधी पर निबंध – गाँधी जयंती पर निबंध – essay on mahatma gandhi – gandhi jayanti par nibandh – गाँधी जयंती पर भाषण – speech on gandhi jayanti
नमस्कार दोस्तों आज हम आपके लिए गाँधी जयंती पर निबंध (gandhi jayanti essay hindi) लिख कर लाए है इस निबंध को आप motivational speech के रूप मे भी प्रयोग कर सकते है. आज महात्मा गाँधी के जीवन परिचय से आपको बहुत कुछ सीखने को मिलेगा.
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गाँधी जयंती पर निबंध | gandhi jayanti essay
हिन्दू मुस्लिम सिक्ख ईसाई सभी धर्मों को एक सांचे मे देखने वाले गाँधी जी सच्च मे एक महान आत्मा थी. उनके लिए हर भारतीय के दिल मे एक विशेष सम्माननीय दर्जा है.
अहिंसा पर्मोधर्मा की लाठी थाम कर निडरता से सदैव सत्य के मार्ग पर चलते हुए महात्मा गाँधी आज हमारे बीच तो नहीं है लेकिन भारत को ब्रिटिश शासको से आज़ाद करवाने मे जिस प्रकार महत्मा गाँधी जी ने भारतीय लोगों को एकजुट करके आजादी की लड़ाई मे उनका मार्ग प्रशस्त करते हुए अपना अद्भुत योगदान दिया वो अत्यंत सराहनीय और अतुलनीय है.
आज हम आजादी की जो सांसे ले पा रहे है इसके पीछे महात्मा गाँधी जी की बहुत बड़ी भूमिका रही है.
इसलिए आज के दिन हम उस महान आत्मा को याद करते हुए उस पुण्य आत्मा को श्रद्धांजलि भेट करते है.
भारत मे हर वर्ष 2 अक्टूबर का दिन महात्मा गाँधी के जन्म दिन के रूप मे बड़े उत्साह पूर्वक मनाया जाता है. ना सिर्फ भारत मे बल्कि अफ्रीका मे भी कई लोग महात्मा गाँधी जी को याद करते हुए इस उत्तस्व को मनाते है.
देश और दुनियां भर मे गाँधी जी को, महात्मा, बापू, राष्ट्रपिता के नाम से जाना जाता है.
भारत को अंग्रेजो की गुलामी से आज़ाद करवाने मे महात्मा गाँधी जी का बहुत बड़ा योगदान रहा.
सरकार द्वारा गाँधी जयंती को एक राष्ट्रीय पर्व घोषित किया गया है इस दिन अस्पताल को छोड़ कर बाकी सभी सरकारी संस्थान (स्कूल कॉलेज, दफ्तर) बंद होते है यानी इन दिन छुट्टी होती है.
15 जून 2007 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 2 अक्टूबर यानी महात्मा गाँधी के जन्म दिवस को अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रुप में घोषित किया गया।
चलिए जानते है गाँधी से महत्मा बनने तक का सफर.
महात्मा गाँधी जीवन परिचय | gandhi jayanti essay speech nibandh
महात्मा गाँधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 मे गुजरात के पोरबंदर मे हुआ.
गाँधी जी के बचपन का नाम करमचंद है. और इनका पूरा नाम मोहनदास करम चंद गाँधी है. महात्मा गाँधी के पिता का नाम मोहनदास गाँधी है. और माता का नाम पुतली बाई है.
13 वर्ष की उम्र मे ही करमचंद का जन्म कस्तूरबा के साथ हो गया था. कस्तूरबा जी क्रमचंद जी से उम्र मे 1 वर्ष बड़ी थी.
स्थानीय स्कूलों से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद सन 1887 में उन्होंने अपनी मेट्रिक की परीक्षा पास कर ली फिर सन 1888 में उन्होंने भावनगर के सामलदास कॉलेज में दाखिला लिया था और यहाँ से डिग्री प्राप्त करने के बाद वे वकालत की पढ़ाई के लिए लंदन चले गये और वहाँ से बेरिस्टर बनकर भारत वापिस लौटे.
रघु पति राघव राजा राम महात्मा गाँधी जी का प्रिय भजन है.
साल 1893 में वो गुजराती व्यापारी शेख अब्दुल्ला के वकील के तौर पर काम करने के लिए दक्षिण अफ्रीका चले गये।
दक्षिण अफ्रीका जाते वक़्त ट्रेन मे उन्होंने भारतीयों पर हो रहे भेद भाव को देखा अंग्रेज़ों के अत्याचार का शिकार हुए. गाँधी जी ट्रेन मे फस्ट क्लास के डिब्बे मे यात्रा कर रहे थे जो की अंग्रेजी चालक द्वारा अमाननीय था जिसके चलते बहुत गलत व्यवहार से उनका सामान ट्रेन से बाहर फिकवा दिया गया.
अफ्रीका पहुँच कर भी उन्होंने भारतीयों पर हो रहे अंग्रेजो के अत्याचार भेदभाव को देखा. महात्मा गाँधी के साथ अफ्रीका मे अंग्रेजो द्वारा कई अभद्र पूर्ण व्यवहार किये गए इन सब घटनाओ का महात्मा गाँधी के दिमाग़ पर गहरा प्रभाव पड़ा.
महात्मा गाँधी 20 से 21 वर्ष दक्षिण अफ्रीका मे रहे इस बीच उन्होंने अफ्रीका मे रह कर बहुत से समाज सुधारक कार्य किये. बहुत से भारतीयों को इनका हक दिलवाया बहुत से बड़े बड़े आंदोलन किये जो की सफल भी रहे.
महात्मा गाँधी के इन सामाजिक कार्यों की गूंज ज़ब भारत तक पहुंची तो उस समय के प्रमुख कोंग्रेसी नेता गोपाल कृष गोखले के कहने पर महात्मा जी को भारत बुलवाया गया.
गोखले ने पत्र लिख कर गाँधी को भारत की परिस्थितियों के बारे मे बताया था.
महात्मा गाँधी गोपाल कृष गोखले कक अपना राजनैतिक गुरु मानते थे.
इस 20 से 21 साल बिताने के बाद पत्र मिलने पर महात्मा गाँधी जी ने पूर्ण रुप से भारत आने के निश्चय किया.
1915 में जब वो हमेशा के लिए भारत वापस आए तो उनकी आगवानी के लिए मुंबई (तब बंबई) के कई प्रमुख कांग्रेसी नेता उनके स्वागत के लिए पहुंचे।
अंग्रेजो का किसनो पर जुल्म और भेदभाव को देखकते हुए महात्मा गाँधी ने अहिंसा के हथियार अंग्रेजो के खिलाफ आज़ादी की जंग का बिगुल फूक दिया.
जिसके चलते लोगों को एक जुट करने के लिए सामाजिक सभाए करनी शुरू की और कई सामाजिक कार्यकर्मो मे हिस्सा लेना शुरू किया.
महात्मा गाँधी ने अपना सबसे पहला आंदोलन 1917 मे बिहार के चम्पारण से शुरू किया. इस आंदोलन का नाम था नील आंदोलन.
नील की खेती कर रहे किसानो से ज़ादा कर वसूलने और किसनो को फ़सल का कम दाम देने के लिए महात्मा गाँधी ने इस अंग्रेजी क़ानून के खिलाफ असहमति जताई और किसानो को एक जुट कर इस नील आंदोलन की शुरुआत की.
1918 में महात्मा गाँधी जी ने खेड़ा के किसान आंदोलन का नेतृत्व किया।
इसके बाद 1919 मे जलीयवाले बाग मे सैकड़ो किसानो के नरसंहार हत्याकांड पर महात्मा गाँधी ने अंग्रेजी हुकूमत के प्रति गहरा रोष जताया. और अंग्रेजो द्वारा मिली सभी उपाधिया व इनाम अंग्रेजो को वापिस कर दिया.
1920 मे बाल गंगा धर तिलक की मृत्यु के बाद महात्मा गाँधी को भारतीय कांग्रेस का लीडर चुना है. इसके बाद महात्मा गाँधी ने कांग्रेस की बागडोर अपने हाथों मे लेकर आगे का मार्ग प्रशस्त किया.
1920 मे रोलेक्ट एक्ट नमक अंग्रेजी क़ानून के खिलाफ सविनय अवज्ञ आंदोलन की शुरुआत की. इसे भारत मे काका क़ानून का नाम दिया गया.
वर्ष,1930 में गांधी ने अपने जीवन की सबसे महत्वपूर्ण 200 मील लम्बी यात्रा दांडी मार्च शुरू की। यह यात्रा नमक सत्याग्रह आंदोलन के नाम से प्रसिद्ध हुआ. इस आंदोलन मे बढ़ चढ़ कर लोगों ने हिस्सा लिया.
इसके इलावा विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार से लेकर तमाम आंदोलनों ने भारत मे अंग्रेजी हुकूमत की नीव हिला कर रख दी.
भारत में संवैधानिक सुधारों पर चर्चा के लिए गांधी ब्रिटेन में हुई गोलमेज सम्मेलन में शामिल हुए। गांधी ने 1942 में अंग्रेजों के खिलाफ भारत छोड़ो आंदोलन का आह्वान किया।
ये आंदोलन ब्रिटिश हुकूमत के ताबूत में आखिरी कील साबित हुआ।
भारत छोड़ो आंदोलन, आजाद हिन्द फौज, नौसेना विद्रोह और दूसरे विश्व युद्ध से उपजे हालात के मद्देनजर अंग्रेजों का हौसला पस्त हो गया था।
जिसके चलते जून 1947 में ब्रिटिश वायसराय लार्ड लुई माउंटबेटन ने घोषणा की कि 15 अगस्त 1947 को हिन्दुस्तान आजाद हो जाएगा।
एक तरफ जहाँ भारत देश 15 अगस्त 1947 मे देश की स्वतंत्र होने की पूरे जोश से खुशियाँ मना रहा था वही दूसरी तरफ भारत पाकिस्तान अलग होने की साजिश जोरो पर थी.
जिसके चलते 1948 मे भारत पाकिस्तान दो अलग अलग देश बन गए. लेकिन इस बीच हुए हत्याकांड मे गोडसे नमक व्यक्ति ने अपना परिवार खोया जिसका कसूर वो गाँधी जी को मानता था. मुस्लिम लोगों ने गोडसे के मन मे गाँधी जीबके प्रति और ज़ादा आग भर डाली.
नतीजा ये हुआ की नाथूराम गोडसे ने 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी।
नई दिल्ली के राजघाट मे महात्मा गाँधी के शव का अंतिम संस्कार किया गया. वही पर महात्मा गाँधी स्मारक बनवाया गया है. जहाँ हर साल 2 अक्टूबर की महात्मा गाँधी को याद करते हुए उन्हें देश के तमाम राजनेताओं द्वारा शद्धांजलि अर्पित की जाती है.
2 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।
इस तरह महात्मा गाँधी जी जीवन भर अहिंसा के रास्ते पर चल कर कई बड़े बड़े आंदोलन किये और भारत को ब्रिटिश हुकूमत की बेड़ियों से आज़ाद करवाया.
इस तरह उन्होंने ये साबित कर दिखाया की अहिंसा मे बहुत ताकत होती है.
तो मित्रो गाँधी जयंती निबंध आपको कैसा लगा. गाँधी जी के जीवन से आज आपको क्या सीखने को मिला कमेंट करके जरूर बताना.
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