shiv chalisa-shiv mantra-shiv pooja

shiv chalisa-shiv mantra-shiv pooja||

शिव चालीसा -शिव मंत्र-शिव पूजा ||

इन सब का जीवन मे चमत्कारी लाभ ।शिव जी की बरसेगी किरपा ।

 


Shiv chalisa-shiv mantra   -जैसा की आप सब लोगो को पता ही है की , सावन का महीना चल रहा है और यह महीना शिव जी का होता है , यानि इस इन डीनो शिव भगवान साक्षात शिवलिंग मे विराजमन रहते है । इन डीनो शिव चालीसा का पाठ करने से 100% आपकी सभी दुख तकलीफ़े दूर होंगी । शिव जी की किरपा बनी रहेगी । जीवन हर परेशानिया दूर होंगी । 


 

पूजा पाठ में शिव चालीसा का बहुत महत्व है. शिव चालीसा के सरल शब्दों से भगवान शिव को प्रसन्न किया जा सकता है. शिव चालीसा के पाठ से कठिन से कठिन कार्य को बहुत ही आसानी से किया जा सकता है. शिव चालीसा की 40 पंक्तियां सरल शब्दों में विद्यमान हैं, जिनकी महिमा बहुत ही ज्यादा है. भोले स्वभाव के होने के कारण भगवान भोले भंडारी शिव चालीसा के पाठ से आसानी से मान जाते हैं और भक्त को मनचाहा वरदान दे देते है. इसलिए शिव चालीसा के पाठ की बहुत महिमा है.

 

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शिव पूजा विधि -शिलिंग पूजा -शिव चालीसा ||

 

Shiv chalisa-shiv mantra

   || शिव चालीसा ||

 

।।दोहा।।

श्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥

जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥
भाल चन्द्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के॥
अंग गौर शिर गंग बहाये। मुण्डमाल तन छार लगाये॥
वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे। छवि को देख नाग मुनि मोहे॥
मैना मातु की ह्वै दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥
नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥
देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥
किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥
तुरत षडानन आप पठायउ। लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥
आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥
किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तसु पुरारी॥
दानिन महं तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥
वेद नाम महिमा तव गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥
प्रगट उदधि मंथन में ज्वाला। जरे सुरासुर भये विहाला॥
कीन्ह दया तहँ करी सहाई। नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥
पूजन रामचंद्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥
सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥
एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भये प्रसन्न दिए इच्छित वर॥
जय जय जय अनंत अविनाशी। करत कृपा सब के घटवासी॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै । भ्रमत रहे मोहि चैन न आवै॥
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। यहि अवसर मोहि आन उबारो॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट से मोहि आन उबारो॥
मातु पिता भ्राता सब कोई। संकट में पूछत नहिं कोई॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु अब संकट भारी॥
धन निर्धन को देत सदाहीं। जो कोई जांचे वो फल पाहीं॥
अस्तुति केहि विधि करौं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥
शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण विघ्न विनाशन॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। नारद शारद शीश नवावैं॥
नमो नमो जय नमो शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥
जो यह पाठ करे मन लाई। ता पार होत है शम्भु सहाई॥
ॠनिया जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥
पुत्र हीन कर इच्छा कोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥
पण्डित त्रयोदशी को लावे। ध्यान पूर्वक होम करावे ॥
त्रयोदशी ब्रत करे हमेशा। तन नहीं ताके रहे कलेशा॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥
जन्म जन्म के पाप नसावे। अन्तवास शिवपुर में पावे॥
कहे अयोध्या आस तुम्हारी। जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥

॥दोहा॥
नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥
मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान।
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण॥

 

 

 

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ऐसे करे शिव चालीसा का पाठ -Shiv chalisa-shiv mantra 

सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहने.

– अपना मुंह पूर्व दिशा में रखें और साफ आसन पर बैठें.

– पूजा में धूप दीप सफेद चंदन माला और सफेद 5 फूल भी रखें और मिश्री को प्रसाद के लिए रखें.

– पाठ करने से पहले गाय के घी का दिया जलायें और एक लोटे में शुद्ध जल भरकर रखें.

– भगवान शिव की शिव चालिसा का तीन बार पाठ करें.

– शिव चालीसा का पाठ बोल बोलकर करें, जितने लोगों को यह सुनाई देगा उनको भी लाभ होगा.

– शिव चालीसा का पाठ पूर्ण भक्ति भाव से करें और भगवान शिव को प्रसन्न करें.

– पाठ पूरा हो जाने पर लोटे का जल सारे घर मे छिड़क दें और थोड़ा सा जल स्वयं पी लें. मिश्री प्रसाद के रूप में खाएं औऱ बच्चों में भी बांट दें.

 

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शिव चालीसा पढ़कर ऐसे पाएं मनचाहा वरदान- Shiv chalisa-shiv mantra 

– ब्रह्म मुहूर्त में एक सफेद आसन पर बैठें.

– उत्तर पूर्व या पूर्व दिशा की तरफ मुंह करें.

– गाय के घी का दिया जला कर शिव चालीसा का 11 बार पाठ करें.

– जल का पात्र रखें और मिश्री का भोग लगाएं.

– एक बेलपत्र भी उल्टा करके शिवलिंग पर अर्पण करें.

– मनचाहे वरदान की इच्छा करें और यह पाठ 40 दिन लगातार करें.

 

 

 

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1. मन का भय यदि है तो निम्न पंक्ति पढ़ें. इस पंक्ति को 27 बार सुबह भगवान शिव के सामने पड़ने से लोभ होगा.

जय गणेश गिरीजा सुवन’ मंगल मूल सुजान|

कहते अयोध्या दास तुम’ देउ अभय वरदान||

 

 

Shiv chalisa-shiv mantra

 

2. दुखों से मुक्ति पाने के लिए ये पंक्ति पढ़ें.Shiv chalisa-shiv mantra 

देवन जबहिं जाय पुकारा’ तबहिं दुख प्रभु आप निवारा||

– इस पंक्ति को 11 बार रात्रि में पढ़ कर सोएं और कार्य सिद्ध हो जाने पर निर्धन लोगों को सफेद मिठाई जरूर बाटें.

 

Shiv chalisa-shiv mantra

 

3. किसी भी कार्य को सिद्ध करने के लिए निम्न पंक्ति पढ़ें.

पूजन रामचंद्र जब कीन्हा’ जीत के लंक विभीषण दीन्हा||

– इस पंक्ति को 13 बार शाम के समय पढ़ें.

– ऐसा लगातार 27 दिन जरूर करें.

 

Shiv chalisa-shiv mantra

 

 

4. मनोवांछित वर प्राप्ति के लिए करें इस पंक्ति का पाठ करें.

कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर’ भाई प्रसन्न दिए इच्छित वर||

– इस पंक्ति को मनोवांछित वर की प्राप्ति के लिए सुबह के समय 54 बार पाठ करें. ऐसा आपको 21 दिन करना है.

 

Shiv chalisa-shiv mantra

 

5. धन धान्य की वृद्धि के लिए इस पंक्ति का पाठ करें-

धन निर्धन को देत सदा ही’ जो कोई जांचे सो फल पाही||

 

मनचाहा वर -Shiv chalisa-shiv mantra 

   ज्‍यादातर लड़कियां अच्‍छा वर पाने के लिए सोमवार के दिन व्रत और भगवान शिव की पूजा करती हैं। कहा जाता है कि सोमवार का व्रत रखने से लड़कियां भगवान शंकर की तरह मनचाहा वर पा सकती हैं। जी हां भगवान शंकर को खुश करना बहुत ही आसान है।

 

भगवान शंकर की मन से की गई भक्ति से आप मनचाहा वरदान पा सकती है। शिवजी के इसी भोले स्‍वभाव के कारण उन्‍हें भोलेनाथ भी कहा जाता है। इसलिए सोमवार की शाम शिव चालीसा का पाठ करना बेहद शुभकारी होता है। कहा जाता है कि शिवजी की आराधना करने वाली महिलाओं को मृत्यु का भय भी नहीं सताता।

 

 

ऐसा भी कहा जाता है कि भगवान शिव का आशीर्वाद चाहने वाले भक्तों को भक्ति और ईमानदारी के साथ शिव चालीसा का पाठ करना चाहिए। लेकिन क्‍या आप जानती हैं कि शिव चालीसा का पाठ करने से आपकी हेल्‍थ भी अच्‍छी रहती हैं विश्‍वास नहीं हो रहा तो आइए हमारे साथ आप भी जानें कैसे। लेकिन इससे पहले यह जान लेते हैं कि चालीसा का पाठ क्‍या हैं और हमें इसे क्‍यो करना चाहिए  ।

 

 

क्या होती है चालीसा? और इसकी शक्ति?


हिंदू धर्म में भगवान की सरल भाषा में की जाने वाली प्रार्थना को चालीसा कहा जाता है। चालीसा का पाठ करने से किसी के जीवन में अद्भुत प्रभाव पड़ता है। लेकिन क्‍या आप जानती हैं कि इसे चालीसा क्‍यों कहा जाता है? अगर नहीं? तो हम आपको बताते हैं। इस प्रार्थना को चालीसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें चालीस लाइनें होती हैं। सरल भाषा में होने के कारण इसे आसानी से पढ़ा जा सकता है और आसानी से भगवान को प्रसन्न करने का ये तरीका हिंदू धर्म में बहुत लोकप्रिय माना जाता है।

 

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जीवन की हर समसस्य को दूर करने की शक्ति?

सबसे अच्‍छी बात चालीसा को पढ़ने के लिए किसी खास नियम की जरूरत नहीं होती है। सिर्फ श्रद्धा, स्वच्छता का ध्यान रखकर ही चालीसा का पाठ किया जा सकता है। इसलिए मैं भी हर सोमवार को शिव चालीसा का पाठ करती हूं। चालीसा पढ़ने से ना केवल मुझे शारीरिक बल्कि मानसिक तौर पर भी बहुत अच्‍छा लगता है। मानना है कि शिव चलीसा के अत्यधिक समर्पण के साथ नियमित रूप से जाप करने के लिए किसी के जीवन की सभी बाधाओं और समस्याओं को दूर करने की शक्ति होती है। वास्तव में, शिव चालिसा का जाप करना सबसे अच्छा तरीका है जिसके द्वारा आप आसानी से भगवान शिव के आशीर्वाद प्राप्त कर सकती हैं।

 

 

प्रेग्‍नेंट महिलाओं शिव चालिसा का जाप करने के लाभ-

ऐसा माना जाता है कि शिव चालीसा का जाप करने से प्रेग्‍नेंट महिलाओं को बहुत फायदा होता है। शिव चालिसा का जाप करने से उनके होने वाले बच्‍चे की रक्षा और साथ ही सेफ डिलीवरी में हेल्‍प मिलती है।
स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित बच्चों को या तो शिव चालीसा पढ़नी चाहिए या सुनना चाहिए। माता-पिता अपने बच्चे की ओर से चालीसा भी पढ़ सकते हैं। हालांकि, उन्हें शिव चालीसा से पहले बच्चे का पूरा नाम, राशि (चंद्रमा चिन्ह), और नक्षत्र का उच्चारण करना चाहिए।

 

 

वैवाहिक जीवन मे मधुरता और रिश्तो मिठास लाए । तनाव से छुटकारा ।

शिव चालीसा का रेगुलर जाप करने से ना केवल लड़कियों को अच्‍छा वर मिलता है बल्कि वैवाहिक समस्याओं और रिश्ते में आने वाली कई तरह की समस्याओं को हल करने में हेल्‍प मिलती है।
रेगुलर शिव चालीसा का जाप करने से नशे, शराब, तंबाकू, सिगरेट की लत के साथ ही साथ तनाव से छुटकारा पाने के लिए फायदेमंद है।

 

शिव चालिसा का जाप करने से बीमार महिला बीमारियों से छुटकारा पाने में हेल्‍प मिलती है क्‍योंकि इससे आपका तनाव दूर होता है और आप बीमारी के बारे में बहुत ज्‍यादा नेगेटिव नहीं होती है।
समय से पहले और दर्दनाक मौत को रोकता है।

 

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महिला और पुरुस दोनों कर सकते है जाप ।

इस तरह से शिव चालीसा का जाप आपके लिए बहुत फायदेमंद होता है। निस्संदेह भगवान शिव के आशीर्वाद प्राप्त करने का सबसे आसान तरीका है। इसके अलावा, शिव चालिसा का जाप करना सभी उम्र के पुरुषों और महिलाओं दोनों द्वारा किया जा सकता है। यह छात्रों और बच्चों के लिए भी फायदेमंद है। सबसे अच्छी बात यह है कि इसे करने के लिए आपको तैयारी की आवश्यकता नहीं होती है और केवल आपकी भक्ति और निश्चित रूप से कुछ मिनट की आवश्यकता होती है। हालांकि, भगवान शिव के आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए रेगुलर शिव चालीसा का जाप करना चाहिए।

 

 

 शिव भगवान के रुद्र मंत्र की शक्ति –

दोस्तो शिव भगवान को संघार यानि मौत के देवता भी कहा जाता है । इनको और भी कई हजारो नमो से जाना जाता है ।  इनके एक मंत्र  रुद्र मंत्र का जाप करने से जीवन माय हर प्रकार का भाय निकाल जाता है । आने वाली विपत्ति तल जाती है । यहा तक की अटल मृत्यु को भी टालने की क्षमता है इस मंत्र मे। 

 

 

भगवान शिव के ये शक्तिशाली मंत्र करेंगे आपकी सभी समस्यायों को दूर। हिंदू देवताओं में भगवान शिव को विनाश का देवता और दया का प्रतीक कहा जाता है। उन्हें बहुत आसानी से प्रसन्न किया जा सकता है। शिव मंत्र का उपयोग मुख्य रूप से डर दूर करने के लिए किया जाता है जिसमे विशेष रूप से परिवर्तन का डर शामिल है। शिव मंत्र का जाप रोगों, दुखों, भय आदि से सुरक्षा के लिए किया जाता है। इस मंत्र का उच्चारण करना सफलता और सिद्धि प्रदान करता है।

शिव मंत्र में एक व्यक्ति की आंतरिक क्षमता और शक्ति को बढ़ावा देने की शक्ति है। शिव मंत्र उन सभी तनावों, अस्वीकृति, विफलता, अवसाद और अन्य नकारात्मक शक्तियों के शरीर, मन और आत्मा को शुद्ध करने में मदद करता है जिनका हम अपने दैनिक जीवन में सामना करते है।

 

 

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अगर कोई व्यक्ति भौतिक और शारीरिक रूप से कमजोर महसूस करता है और उसे अपने अंदर ऊर्जा की कमी लगती है तो उसे शिव मंत्र का जाप करना चाहिए। शिव मंत्र का जाप करना जन्म कुंडली में हानिकारक ग्रहोंके नकारात्मक प्रभावों को दूर करने का एक ज्योतिषीय उपाय भी है। भगवान शिव को बहुत सारे मंत्र समर्पित हैं और प्रत्येक मंत्र का अपना विशेष लाभ है –

 

 

पंचाक्षरी शिव मंत्र – “ॐ नम: शिवाय”

यह मंत्र भगवान शिव को समर्पित मंत्रों में सबसे अधिक प्रसिद्ध मंत्र है। इस मंत्र का अर्थ है “मैं भगवान शिव को नमन करता हूँ।” अपने शरीर को शुद्ध करने और भगवान शिव से आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए हर दिन इस मंत्र का 108 बार जाप करें।

 

 

रुद्र मंत्र – ‘ॐ नम: भगवते: रुद्राय:”

इसे रुद्र मंत्र के रूप में जाना जाता है। भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए रुद्रा मंत्र का जाप किया जाता है। अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए इस मंत्र का जाप करना प्रभावी माना जाता है।

 

 

 

शिव गायत्री मंत्र – “ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात”

अपने मूल रूप में गायत्री मंत्र हिंदू धर्म के सबसे शक्तिशाली मंत्रों में से एक है। मन की शांति और भगवान शिव को खुश करने के लिए इस मंत्र का जाप किया जाता है।

 

 

 

शिव ध्यान मंत्र – “करचरणकृतं वा कायजं कर्मजं वा श्रवणनयनजं वा मानसं वा परधाम। विहितं विहितं वा सर्व मेटत क्षमस्व जय जय करुणाब्धे श्री महादेव शंभो।।”

इस मंत्र का जाप भगवान शिव से हमारे द्वारा किये गए सभी पापों की क्षमा मांगने के लिए किया जाता है।

 

 

महा मृत्युंजय मंत्र – “ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥”

जैसा कि भगवान शिव को मृत्यु और विनाश के भगवान के रूप में जाना जाता है, इसलिए मृत्यु के डर को दूर करने के लिए भगवान शिव से प्रार्थना की जाती है। महा मृत्युंजय मंत्र इसके लिए हमें सहायता करता है।

 

 

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एकदशा रूद्र मंत्र – एकदशा रुद्र मंत्र ग्यारह मंत्रों का एक समूह है। इन मंत्रों को भगवान शिव के विभिन्न रूपों की पूजा करने के लिए उपयोग किया जाता है। ये मंत्र एक वर्ष में महीनों के अनुरूप निर्धारित हैं। यदि आप इन मंत्रों को निर्धारित महीने के अनुसार जाप करते हैं तो आपको इनका अधिक लाभ मिलता है। लेकिन ये सभी ग्यारह मंत्र एक साथ भी पढ़े जा सकते हैं। सभी ग्यारह मंत्रों को शिवरात्रि पर या महा रुद्र यज्ञ के दौरान पढ़ना सबसे अधिक लाभदायक है।

 

 

कपाली – ‘ॐ हंहम शत्रुस्तम्भनाया हंहम ॐ फट”

पिंगला – ‘ॐ श्रीं हरिम श्रीं सर्व मंगलया पिंगलाय ॐ नमः”

भीम – “ॐ एम एम मनो वंचिता सिद्धया एम एम ॐ”

विरुपक्षा – “ॐ रुद्रया रोगनाशय आगच्छ च राम ॐ नमः”

विलोहिता – “ॐ श्रीम हरिम सम सम हरिम श्रीम शंकरशनया ॐ”

षाष्टा – “ॐ हरिम हरिम साफल्य यि सिद्धये ॐ नमः”

अजपडा – “ॐ श्रीम बेम सौगः बलवर्धनाया बालेश्वराय रुद्रया फुट ॐ”

अहिर्बुध्न्य – “ॐ हराम हरिम हम समस्था ग्रह दोष विनाशय ॐ”

संभु – “ॐ गम हलुअम श्रोउं ग्लौं गम ॐ नमः”

चंदा – “ॐ चुम चण्डीश्वराय तेजस्या चुम ॐ फट”

भाव – “ॐ भावाद भावा सम्भाव्य िष्ट दर्शना ॐ सम ॐ नमः

 

 

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