shiv puja vidhi – shiviling puja-shiv chalisa

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शिव पूजा विधि -शिलिंग पूजा -शिव चालीसा ||


shiv puja vidhi-shiviling puja-shiv chalisa – आज सावन का पहला सोमवार है। सावन के महीने में भगवान शिव साक्षात शिवलिंग में विराजमान रहते हैं। सावन का महीना यानी शिव की भक्ति।

 

इस महीने में भोलेनाथ के दर्शन के लिए लोग दूर-दराज जाते हैं।या फिर घर माय ही रेह कर पूरे व्हिधी विधान से शिव की पूजा करते है । shiv puja

यह महीना भोलेनाथ को खुश करने के लिए अत्यंत प्रिय है। भगवान विष्णु के सो जाने के बाद इस महीने में भगवान शिव तीनों लोक की रक्षा करते हैं।

shiv puja शास्त्रों में बताया गया है कि बाकी दिनों की अपेक्षा सावन महीने में शिव जी की पूजा करने से दोगुना फल मिलता है। आइए जानते हैं सावन के पहले सोमवार के दिन शिवजी की पूजा कैसे करें.

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सावन मे शी जी की पूजा केरने से क्या लाभ मिलता है ?

कैसे करे सावन मे शिव की पूजा ? shiv puja vidhi

कैसे करे शिवलिंग की पूजा ? shivling puja vidhi

सावन मे शिव पूजा करने के चमत्कारी लाभ 

सोमवार के दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाने से जीवन मे क्या लाभ होता है ?

क्या है शिव चालीसा ,और इसका जप करने से कौन सा चमत्कारी लाभ मिलता है जीवन मे? shiv chalisa

shiv chalisa का पाठ करने के चमत्कारी लाभ ।

 

इन सब सवालो के जवाब आज हम इस  article मे जानेंगे । तो आखिर तक इसे पढ़े।

सावन का महीना और शिव की पूजा shiv puja vidhi

 

जैसा की आप सब लोगो को पता ही है की , सावन का महीना चल रहा है और यह महीना शिव जी का होता है , यानि इस इन डीनो शिव भगवान साक्षात शिवलिंग मे विराजमन रहते है ।

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तो ऐसे मे पूरे सावन , खास कर सोमवार के दिन शिवलिंग की पूजा करने से , शिवलिंग पर जल चढ़ने से  शिव जी की अपर किरपा बरसती है और जीवन धन्य हो जाता है । सभी दुख तकलीफ़े दूर होने लगती है । लेकिन पूजा पूरी श्र्द्धा , विश्वास और धार्य के साथ की जानी चाहिए ।

 

क्या होती हैshiv puja चालीसा और इसकी शक्ति ? शिव चालीसा के जप से जीवन पीआर क्या प्रभाव पड़ता है ? जाने के लिए यहा click करे 

 

शिव पूजा की सही विधि – shiv pooja vidhi  

आज सावन का पहला सोमवार है। ऐसे में शिव भक्तों को पूजा के समय कुछ बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। सही विधि से पूजा अर्चना करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। चलिए ज्योतिषाचार्य डा. सुशांतराज से जानते हैं कि पूजा में क्या चीजें अर्पित करनी चाहिए।

 

सावन के महीने में सोमवार व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। सावन के सोमवार के दिन भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद फूल, दूध, सफेद चंदन, अक्षत आदि अर्पित करने का विधान है। इस दिन बेलपत्र पर सफेद चंदन से राम-राम लिखकर शिवलिंग पर चढ़ाने से भी भगवान शिव अत्यंत प्रसन्न होते हैं।

 

व्रती को सोमवार के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठना चाहिए। स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करके पूजा करें। भूलकर भी भगवान शिव को तुलसी का पत्ता, हल्दी और केतकी का फूल बिल्कुल भी न अर्पित करें। इससे भगवान शिव आप से अप्रसन्न हो जाएंगे और आपको आपके व्रत का फल नहीं मिलेगा।

 

इसके बाद भगवान शिव के मंत्र ओम नम: शिवाय का जाप करें। शिव चालीसा का पाठ करें। इसके उपरान्त भगवान भोलेनाथ की आरती करें।

दिनभर फलाहार करें और शाम को पूजा घर में शिव पुराण का पाठ करें। आरती के बाद ही प्रसाद ग्रहण कर कुछ खाएं।सावन के सोमवार का व्रत शादीशुदा महिलाएं और पुरुष वैवाहिक जीवन में चल रही परेशानियों से छुटकारा पाने के लिए कर सकते हैं। मनोवांछित जीवनसाथी पाने के लिए भी अविवाहित युवतियां सोमवार का व्रत कर सकती हैं

 

शिव पूजा सावधानी – इन बातों रखे खास ध्यान shiv pooja vidhi    

वी-देवताओं की खंडित मूर्तियां घर में नहीं रखनी चाहिए, लेकिन शिवलिंग रख सकते हैं, क्योंकि शिवलिंग को कभी भी खंडित नहीं माना जाता है।

 

शिवलिंग को निराकार रूप माना गया है। इस वजह से टूटा शिवलिंग भी पूजनीय होता है।
शिवपुराण के अनुसार घर में शिवलिंग ज्यादा बड़ा नहीं रखना चाहिए। घर में छोटा शिवलिंग रखना शुभ रहता है।
हमारे अंगूठे के पहले पोर से बड़े आकार का शिवलिंग घर में रखने से बचना चाहिए।

 

घर में शिवलिंग ऐसी जगह पर न रखें, जहां रोज साफ-सफाई नहीं होती है। यदि घर में शिवलिंग रखना है तो पवित्रता का विशेष ध्यान रखें।

शिवलिंग का पूजन करते समय भक्त का मुंह उत्तर दिशा की ओर हो तो वह सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।

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रोज सुबह-शाम शिवलिंग की पूजा जरूर करें। अगर विधिवत पूजा नहीं कर पाते हैं तो दीपक जरूर जलाएं। दीपक जलाकर ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप 108 बार करें। मंत्र जाप रुद्राक्ष की माला से करना चाहिए।

शिवलिंग के साथ ही गणेशजी, माता पार्वती, नंदी की भी मूर्तियां जरूर रखें। पूजा की शुरुआत में गणेश पूजन से करना चाहिए।

 

 

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शिव पूजा के 5 नियम, जिनसे प्रभु होते हैं प्रसन्न। बरसेगी भोलेनाथ की अपार किरपा|| shiv pooja vidhi    

शिवशंकर की पूजा-अर्चना से कई जन्मों का फल प्राप्त होता है। यदि विधिविधान से पूजन किया जाए तो निश्चित ही मनोवांछित फल प्राप्त होता है। आइए जानते हैं कि शिव पूजन में अर्पण किए जाने वाली एक अत्यंत महत्वपूर्ण वस्तु और सिद्ध पूजन विधि के बारे में…

1.बेलपत्र शंकर जी को बहुत प्रिय हैं, बिल्व अर्पण करने पर शिवजी अत्यंत प्रसन्न होते हैं और मनमांगा फल प्रदान करते हैं।

 

2.   लेकिन प्राचीन शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव पर अर्पित करने हेतु बेलपत्र तोड़ने से पहले एक विशेष मंत्र का उच्चारण कर बिल्व वृक्ष को श्रद्धापूर्वक प्रणाम करना चाहिए, उसके बाद ही बिल्व पत्र तोड़ने चाहिए। ऐसा करने से शिवजी बिल्व को सहर्ष स्वीकार करते हैं।

 

 

क्या है बेलपत्र पत्र तोड़ने का मंत्र- shiv pooja vidhi    

अमृतोद्धव श्रीवृक्ष महादेवप्रिय: सदा।
गृहामि तव पत्रणि शिवपूजार्थमादरात्।।

 

 

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3. यह समय निषिद्ध है बेलपत्र तोड़ने के लिए… shiv pooja vidhi    

हमेशा ध्यान रखें कि चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या तिथियों को, संक्रांति के समय और सोमवार को बिल्व पत्र कभी नहीं तोड़ने चाहिए। यदि पूजन करना ही हो एक दिन पहले का रखा हुआ बिल्व पत्र चढ़ाया जा सकता है।

 

 

4 – इसके अलावा बेलपत्र , धतूरा और पत्ते जैसे उगते हैं, वैसे ही इन्हें भगवान पर चढ़ाना चाहिए। उत्पन्न होते समय इनका मुख ऊपर की ओर होता है, अत: चढ़ाते समय इनका मुख ऊपर की ओर ही रखना चाहिए।

 

 

 

 

5-  कैसे चढ़ाएं दूर्वा और तुलसी शिवजी को- shiv pooja vidhi    

दूर्वा एवं तुलसी दल को अपनी ओर तथा बिल्व पत्र नीचे मुख पर चढ़ाना चाहिए। दाहिने हाथ की हथेली को सीधी करके मध्यमा, अनामिका और अंगूठे की सहायता से फूल एवं बिल्व पत्र चढ़ाने चाहिए। भगवान शिव पर चढ़े हुए पुष्पों एवं बिल्व पत्रों को अंगूठे और तर्जनी की सहायता से उतारें।

 

 

सावन और शिव पूजा से जुड़ी  है यह कथा-shiv pooja vidhi    

शिवपुराण में बताई गई कथा के अनुसार प्राचीन काल में गुणनिधि नाम का एक व्यक्ति बहुत गरीब था।

 

वह अपने लिए और परिवार के लिए भोजन की खोज कर रहा था। खोज करते हुए रात हो गई और वह एक शिव मंदिर में पहुंच गया।

 

गुणनिधि ने सोचा कि इसी में रात्रि विश्राम कर लेना चाहिए।

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रात के समय वहां अत्यधिक अंधेरा हो गया। इस अंधकार को दूर करने के लिए उसने शिव मंदिर में उसने अपनी कमीज जला दी। shiv puja vidhi

 

 

रात के समय भगवान शिवलिंग के प्रकाश करने के फलस्वरूप से उस व्यक्ति को अगले जन्म में देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर देव का पद प्राप्त हुआ। shiv puja vidhi

 

इस कथा के अनुसार ही रात के समय शिव मंदिर में रोशनी करने के लिए दीपक जलाना चाहिए।

 

दीपक जलाते समय ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप करना चाहिए। मंत्र जाप कम से कम 108 बार करें।

 

जाप के रुद्राक्ष की माला का उपयोग करना चाहिए। ध्यान रखें मंत्र जाप के समय दीपक बुझना नहीं चाहिए।

 

सावन माह में रोज सुबह तांबे के लोटे से शिवलिंग पर जल चढ़ाना चाहिए।

 

जल चढ़ाते समय ऊँ सांब सदा शिवाय नम: मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करना चाहिए। बिल्व पत्र चढ़ाएं और मिठाई का भोग लगाएं। 

 

 

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