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गलत शिक्षा पद्धति का जहर | wrong education system in india

भारत मे गलत शिक्षा पद्धति का जहर | wrong education system in india 

wrong education system in india –

जी हाँ दोस्तों आपने बिलकुल सही पढ़ा, तमाम अध्ययन के बाद हम इसी नतीजे पर पहुंचे है की आज के समय की या ऐसा कह लो अंग्रेजो के समय से सपोले के रूप मे जिस तरह की शिक्षा पद्धति भरत मे शुरू की गई थी वो आज के दौर मे एक विशाल नागराज के रूप मे उभर कर आना आरम्भ हो चुका है जिसका नतीजा बुरे कर्म कांड,ग़रीबी और बेरोजगारी के रूप मे स्पष्ट देखने को मिल रहा है.

 

तो नमस्कार दोस्तों,मै विवेक मौर्या आज इसी बात पर विस्तार से चर्चा करूंगा और आपको पिछले 80 सालो से चल रही भारत मे अंग्रेज़ों की कूट नीती द्वारा तैयार की गई उस घटिया शिक्षा प्रणाली” से अवगत करवाऊंगा जिसका जहर आज “देश – समाज” के लोगो के मन मस्तीष्क रूपी नसों मे फ़ैल चुका है.

 

1834 ईस्वी मे ब्रटिश अधिकारीयों द्वारा एक अंग्रेजी ब्रिटिश अधिकारी को भारत की सामाजिक आर्थिक जानकारियां जुटा कर लाने को बोला गया था.

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तो आज से  187  साल पहले ज़ब लार्ड मेकोले भारत आया था तब उसने पूरे भारत मे जगह जगह घूम कर लोगो के रहन सहन – तौर तरीको, आर्थिक व्यवस्था प्रणाली – शिक्षा का माध्यम यानी गुरुकुलो पर विस्तार से अध्ययन करने के बाद वह जो बातें समझ सका उसको अपनी किताब मे लिखता है की-  भारत हर साधनों से परिपूर्ण है,धन धान्य अनाज कपड़ा जमीन हर तरह से संपन्न व समृद्ध है,सशक्त एवं सयुक्त समाज है.

जिसकी सबसे बड़ी बुनियाद यहां की मजबूत एवं समृद्ध शिक्षा प्रणाली है. इसी तरह भारत के गुरुकुल के बारे तमाम व्याख्याए अपनी पुस्तक मे लिखता है.

 

भारत के बारे तमाम जानकारी जुटाने के बाद वह अपने देश ब्रिटिश लौट कर अपने बड़े अधिकारीयों से मिलता है और सब बात बताता है.

सब हन्ने समझने के बाद बड़े अंग्रेज अधिकारी इस मुद्दे पर  पहुँचते है की,गर भारत को गुलाम बनाना है तो सबसे पहले यहां की शिक्षा प्रणाली को बिगाड़ना होगा, गुरुकुल की जगह अंग्रेजो द्वारा बनाए free स्कूल खोले जाएंगे (शिक्षा संस्थान खुलवाए जाएंगे).

 

इसी कूट नीती के आधार पर ही भारतीय व्यवस्था प्रणाली मे बड़ा बदलाव लाकर हम अपनी बाकी की रणनीति को सफलतापूर्वक कारगर तरीके से लागु करवा पाएंगे.

 

तब यहीँ से अंग्रेजो ने भारत के प्रति कूटनीति बनानी आरम्भ की.

 

तब से लेकर आज तक अंग्रेजो की यही कूटनीति शिक्षा संस्थानों मे चली आरही है.

ये जो 100 मे से 33 अंको से पास फेल होने वाले पैरामीटर बनाए गए है यह भी अंग्रेजो की ही देन है. जो आज भी पूरी तरह से फल फूल रही है. हम हम भारतीय मूर्खो की तरह उसका पालन करते आरहे है.

 

यूँ तो शिक्षा के महत्व से हर कोई भली भांति परिचित है.

महात्मा गाँधी ने कहा था की शिक्षा के बिना मनुष्य पशु के समान है.

इसी तरह दुनियां भर के तमाम महानुभूवो द्वारा शिक्षा की परिभाषा दर्शाई गई है. 

यह सत्य है की शिक्षा हमें अज्ञानता के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाती है.

 

किन्तु हम अगर शिक्षा पद्धति की बात करें तो क्या आज के दौर मे यह बात सटीक बैठती है.

 

भारत की जो हालत है और जिस दिशा की ओर भारत अपने कदम बढाता जा रहा है इसकी तमाम वजह है जिसमे से बुनियादी तौर पर आज की शिक्षा पद्धति सबसे बड़ी कसूरवार है.

 

जिसमे students के ज्ञान को exam मे 33 अंको द्वारा पास फेल किये जाने वाले घटिया पैरामीटर से लेकर,

 

घटिया शिक्षक और उनके पढ़ाने का घटिया फिरमेलिटी पूर्ण तरीका , समाज की सोच , पेरेंट्स की मानसिकता और सरकार द्वारा शिक्षा संस्थानों से कम लागत पर ज़ादा धन कमाने की जेब भरने वाली कूटनीति वाली राजनीती तक सभी पूर्ण रूप से शामिल है.

 

ज़ब भारत का लगभग हर नागरिक खास कर सरकारी संस्थानों मे गर्दन तक भ्र्ष्टाचार से लबालब भरा हो और 80% कर्मचारी बेईमानी के दलदल मे तैर रहा हो तो ऐसे मे भारत के बेहतर भविष्य की कल्पना कैसे की जा सकती है.

 

5 साल के लिए सरकार अपनी गन्दी राजनीती खेलने के लिए पूरी तैयारी से उतरती है और कूटनीति (strategy) बनाई जाती है की किस तरह शिक्षा संस्थानों से अधिक धन कमाना है.

 

लोगो को अपनी माया जाल मे फ़साने के तरह तरह के इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किये जाते है, सरकारी नौकरियों का सपना दिखाया जाता है, जिसमे नाम कमाने के लिए चंद लोगो को नौकरी दी जाती है लुभावने वादे किये जाते है.

 

कहने को देश की जीडीपी चल रही है मगर देश का भविष्य किस खतरे की तरफ बढ़ता जा रहा इसकी खबर किसी को नहीं.

 

यदि हम अब भी नहीं सम्भले तो यह हमारी भारतीय संस्कृति के लिए बहुत बड़े विनश का रूप धारण करेगा जिसका बड़ा असर अभी से देखने को मिल रहा है.

 

आपसे हाथ जोड़ कर निवेदन है की सब लोग एक जुट हो कर एक साथ शिक्षा पद्धति के वरुद्ध आवाज़ उठाओ.

 

नए गुरुकुल की मांग करो ताकी हमारा भारत फिर पहले जैसा गौरवशाली समृद्ध पूर्ण भारत बन सके.

 

इसकी शुरुआत यहीँ से हो सकती है की आप अपने बच्चो को प्राइवेट स्कूलों मे भेजना बंद करें अभी हाल ही मे जितने भी गुरुकुल भारत मे चल रहे गई वहाँ एडमिशन करवाओ और अपने एरिये मे गुरुकुल खुलवाने की मांग करो.

 

तो मै सुमित मौर्या कल फिर से मिलूंगा ऐसी ही एक और जानकारी के साथ.

 

जय हिन्द वन्देमातरम.

 

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