गोवर्धन पूजा पर निबंध | govardhan pooja essay hindi

गोवर्धन पूजा पर निबंध | govardhan pooja essay hindi

गोवर्धन पूजा पर निबंध | govardhan pooja essay hindi – गोवर्धन पूजा क्या है क्यों मनाया जाता है.

 

नमस्कार दोस्तों,आज हम आपके लिए गोवर्धन पूजा पर निबंध लेकर आए है आज हम गोवर्धन पूजा निबंध के माध्यम से भारत के एक बहुत ही महान धार्मिक पर्व गोवर्धन पूजा (अन्नकूट महोत्स्व) के बारे विस्तार चर्चा करते हुए आपको बताएंगे की –

  • गोवर्धन पूजा क्या है,
  • यह पर्व क्यों मनाया जाता है,
  • गोवर्धन पूजा story 
  • यह पर्व कैसे मनाया जाता है, 

 

गोवर्धन पूजा निबंध | Govardhan pooja essay hindi 

 

गोवर्धन पूजा (अन्नकूट महोत्स्व)  हिन्दुओं का पवित्र त्यौहार है.यह एक हिन्दू धार्मिक पर्व है.

 

गोवर्धन पूजा को कई स्थानों पर अन्नकूट महोत्स्व के नाम से भी जाना जाता है. गोवर्धन पूजा दिवाली के अगले दिन मनाया होने वाला उत्साह पूर्ण पर्व है.

 

गोवर्धन पूजा (अन्नकूट महोत्स्व)  लगभग पूरे भारत मे अलग अलग तरीको से मनाया जाने वाला पर्व है.

 

यह पर्व प्रकृति के प्रति मनुष्य का कर्तव्य, सजगता एवं प्रकृति की महत्ता को दर्शाता है.

 

कैसे मनाया जाता है अन्नकूट महोत्स्व Govardhan pooja 

इस दिन लोग गाय को अच्छे से नहला कर पोछ कर तिलक लगाकर आरती उतारी जाती है. फूलो का हार डालकर गौमाता की पूजा की जाती है. गौमाता की पूजा सुबह सुबह सूर्य उदय पर की जाती है.

 

गऊ माता को चारे, यानी भोजन मे गुड़ चना, आटा, मक्का हरि ताजी घास, डाली जाती है.

 

इस दिन लोग शाम होने से पहले पहले जमीन पर साफ जगह पर गऊ माता के गोबर से गोवर्धन रूपी मनुष्य जैसी प्रतिमा बनाई जाती है. जैसा की आप image मे देख रहे हो.

Govardhan-pooja-nibandh

इसके बाद पूजा सामग्री जुटा कर प्रीतिमा को गोवर्धन पहाड़ मान कर पूजा की जाती है. इस समय अपने कुल देवता को याद कर माँ अन्नपूर्णा की पूजा भी की जाती है.

प्रतिमा मे गोबर से बने भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को उठाया है.

इस दिन लोग चींटी, कुत्ते, पशु पक्षियों के लिए अपने घरो के बाहर या छत्त पर कूटे हुए अन्न जैसे गेहूं चावल दाल चना मक्का आदि डालते है.इसीलिए इस औरव को अन्नकूट महोत्स्व भी कहा जाता है.

 

इस दिन शहरों गाँवो मे कई जगह बड़े बड़े मंदिरो मे लंगर सेवा करवाई जाती है जिसमे बहुत से लोग अपनी श्रद्धा व क्षमता अनुसार लंगर स्थान व मंदिरो मे अन्न दान भी करते है. 

 

कुछ लोग इस दिन नए फूल वृक्ष पौधा रोपण करते है.

 

इस दिन लोग अपने बाग बगीचो की, बागबानी की अच्छे से कटाई छटाई व साफ सफाई करते है.

 

इस दिन कई लोग पुरानी सूखे हर तरह के वृक्ष की रख रखाव का प्रण लेते है और जितना सम्भव हो सके अपने आस पास के एरिये के तमाम वृक्षों को जल से सींचने का यथा सम्भव प्रयास करते है.

 

इसी तरह आप भी प्रकृति के प्रति अपने प्रेम एवं जिम्मेदारी को प्रगट कर सकते है.

आज से ही आप भी प्रकृति को साफ सुथरा रखने के लिए दृढ़ संकल्प लीजिये.

 

उम्मीद करता हूं गोवर्धन पूजा निबंध आपको बहुत पसंद आया होगा.

 

चलिए अब विस्तार से समझते है की गिवर्धन पूजा क्यों मनाया जाता है.

 

गोवर्धन पूजा (अन्नकूट महोत्स्व) पर्व क्यों मनाया जाता है.

 

गोवर्धन पूजा (अन्नकूट महोत्स्व) को मनाए जाने के पीछे की एक बहुत ही शिक्षाप्रद पौराणिक कथा है जिससे बहुत सीख मिलती है.

 

चलिए इस पौराणिक कथा के बारे जानते है.

 

भोजन का प्रबंध इंद्रदेव की कृपा की वजह से होता है गर इंद्रदेव क्रोधित हुए तो अकाल पड़ जाएगा वर्षा नहीं होगी तो अन्न कैसे उपजेगा.

 

इसी मान्यता के आधार पे द्वापर युग मे गोलूल वासी हर वर्ष आज के ही दिन यानी दीपावली के अगले दिन, इंद्र देव की पूजा उपासना करते थे जिसमे इंद्र सहित सभी देवी देवताओं अग्नि वरुण देव को 56 तरह के भोग लगाए जाते थे. इस दिन देवी देवताओं तक 56 भोग पहुँचाने के लिए बड़े बड़े यज्ञ किये जाते थे.

 

किन्तु ज़ब बालक श्री कृष्ण जी ने यह सब देखा जाना समझा तो उन्हें यह सही नहीं लगा तब श्री कृष्ण ने गोकुल वासियों से कहा की ओ यह सब करना बंद करें यह सही नहीं है, आखिर आप लोग उसके लिए यह सब क्यों कर रहे ही जो कभी दर्शन ही नहीं देता.आप जिस अहंकारी देव की पूजा उपासना कर रहे हो वो अपने अंहकार मे चूर है और तो और यह आपका भ्र्म है की इंद्र देव की वजह से आपको भोजन प्राप्त होता है. जबकि सच्चाई यह है की मौसम मे परिवर्तन इन ऊँचे ऊँचे पर्वतो की वजह से होता है जिससे हवाओं का रुख बदलता है और समय समय पर बरसात होती है जिससे हमारे खेतो मे लगी फसलों को पर्याप्त जल प्राप्त होता है.

 

इसलिए पूजा आराधना इन पर्वतो की की जानी चाहिए ना की उस अहंकारी की.

 

तब भगवान कृष्ण की बात मान कर गोकुल मे मौजूद सबसे बड़े पर्वत गोवर्धन पर्वत की पूजा आराधना शुरू की गई. तब से आज तक यह परम्परा चलते आरही है. अतः इसी दिन को गोवर्धन पूजा महोत्स्व के नाम से जाना जाने लगा और मनाया जाने लगा.

 

इसकी आगे की कथा के अनुसार ज़ब इंद्र को यह आता चला की गोकुल वासी मेरी पूजा अर्चना छोड़ पर्वतो की पूजा कर रहे है. तो वह बड़े क्रोधित हुए. क्रोधवश इंद्रदेव न पूरे गोकुल धाम मे अपना प्रकोप दिखाना शुरू कर दिया पूरे गोकुल धाम पर ज़ब संकट की घड़ी आई तो सब लोग तेज़ आंधी से बचने के लिए इधर उधर भागने लगे.

 

तब भगवान श्री कृष्ण ने इंद्र का अहंकर तोड़ने के लिए अपनी लीला दिखाई. भगवान श्री कृष्ण न पूरा गोवर्धन पर्वत अपनी सबसे छोटी ऊँगली पर उठा लिया व एक ऊंचे स्थान पर जा खड़े हुए.

 

इंद्र के प्रकोप से बचने के लिए सभी गोकुल वासी गाय पशु सब उस गोवर्धन पर्वत के नीचे आ खड़े हुए.

 

भगवान कृष्ण के इस चमत्कार को देख सभी हाथ जोड़े भगवान कृष्ण के सामने नात्मस्तक हो गए.

 

इंद्र ने अपनी अपनी पूरी ताकत लगा दी 6 दिनों तक लगातार तेज़ आंधी और बरसात होती रही. आखिर कार भगवान कृष की लीला के सामने इंद्र को हारना ही पड़ा यहीँ पर इंद्र का अहंकार चूर चूर हो गया.

 

सातवे दिन इंद्र धरती पर भगवान कृष्ण के सामने प्रगट हुआ. भगवान कृष्ण ने इंद्र को अपने असली रूप से परिचित करवाया तब इंद्र समझा की वी किनसे उलझ रहा था.

 

इंद्र को अपनी गलती का एहसास हुआ और इंद्र ने भगवान कृष्ण से क्षमा मांगी.

 

इस पौराणिक कथा से हमें शिक्षा मिलती है की अपनी ताकत पर कभी अहंकार नहीं करना चाहिए.

 

दूसरी शिक्षा यह मिलती है की प्रकृति है तो जीवन है. अच्छे स्वस्थ के लिए वातावरण का स्वच्छ रहना बहुत आवश्यक है.

 

गोवर्धन पूजा (अन्नकूट महोत्स्व) के दिन माता अन्नपूर्णा की भी पूजा अर्चना की जाती है ताकी उनके माँ अन्न पूर्णा हमेशा वास करें और उनके घर मे कभी कोई भूखा ना सोए उनका घर सदैव अन्न से परिपूर्ण रहे कभी अन्न की कमी ना हो.

 

इस तरह यह पर्व प्रकृति के प्रति मनुष्य का कर्तव्य, सजगता एवं प्रकृति की महत्ता को दर्शाता है.

 

“प्रकृति है तो जीवन है” जैसी बात को जन जन तक पहुंचाइये और उन सब को प्रिक्रिति के प्रति उनकी जिम्मेदारी समझाइये.

 

तो दोस्तों यह तो अब आप समझ गए होंगे की अन्नकूट महोत्स्व क्यों मनाया जाता है.

 

गोवर्धन का अर्थ गऊ धन भी होता है, द्वापर युग से आगे के कई समय तक गाय ही भोजन का दूसरा मुख्य स्त्रोत रही है. इस वजह से गाय को कामधेनु मान कर इस दिन इनकी पूजा अर्चना की जाती है.

 

गोवर्धन पूजा का पर्व लोग कैसे मनाते है इस दिन लोग क्या क्या करते है यह सब ऊपर गोवर्धन पूजा निबंध मे बता चुके है.

 

कुल मिलाकर दोस्तों गोवर्धन पूजा का पर्व करोड़ो को प्रकृति के अपनी जिम्मेदारियों को याद दिलाता है.

यह पर्व धर्म और प्रकृति दोनों से जुड़ा है.

 

तो दोस्तों उम्मीद करता हूं गोवर्धन पूजा के बारे यह तमाम जानकारी आपको अच्छी लगी होगी.

 

हम अपने blog भारत के तमाम त्योहारों परवों उत्तसवो के बारे विस्तृत चर्चा करते रहते है. हमारे blog से बने रहे और जानकारी हासिल करते रहे.

 

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