Best dhanteras essay धनतेरस पर खूबसूरत निबंध

Best dhanteras essay धनतेरस पर खूबसूरत निबंध

धनतेरस पर निबंध – Dhanteras essay nibandh hindi

अक्सर स्कूलों मे बच्चो को पहले से ही घर से धनतेरस पर निबंध  (essay on dhanteras) लिख कर लाने को कह दिया जाता है ताकी इसी बहाने बच्चो की त्योहारों के प्रति जानकारी बढ़े वह भारत देश के कल्चर एवं रीती तिवाज़ो और परम्पराओं को जाने और समझे. 

 

इसलिए , आज हम आपके लिए धनतेरस पर एक खूबसूरत निबंध लेकर आए है.

 

धनतेरस पर निबंध धनतेरस के बारे dhanteras essay 

धनतेरस भी भारत का एक बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व है.

इस दिन का लोग बहुत बेसबरी से इंतज़ार करते है. इस दिन लोग बाज़ारो से तरह तरह के सामान खरीदते है.

 

पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन का बहुत खास महत्त्व है.

 

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को धनतेरस का त्योहार भारत मे धूम धाम से उत्साहपूर्वक मनाया जाता है।

 

पांच दिन चलने वाले दीवाली उत्सव की शुरुआत धनतेरस के दिन से ही आरम्भ हो जाती है.

 

चलिए धनतेरस के दिन का इतिहास जानते और जानते है की धनतेरस का दिन इतना खास क्यों है..

 

धनतेरस की मान्यताएं एवं पौराणिक कथाएं 

भगवान महावीर द्वारा स्वाथ्यपित जैन धर्म में धनतेरस को धन्य तेरस या ध्यान तेरस के नाम से जाना जाता हैं।

 

भगवान महावीर इस दिन ध्यान मुद्रा मे बैठे ध्यान लगा रहे थे योग साधना मे वे इतने लीन हुए की अगले तीन तक वे ऐसे ही ध्यान साधना मे लीन रहे तीसरे दिन वे ध्यान मुद्रा से बाहर निकले.

 तभी से यह दिन धन्य तेरस के नाम से भी प्रसिद्ध हुआ।

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क्यों मनाया जाता है धनतेरस 

प्रचलित हिन्दू मान्यता एवं पौराणिक कथाओं अनुसार धन तेरस के दिन समुद्र मंथन से आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे।

 

अमृत कलश के अमृत का पान करके देवता अमर हो गए थे। इसीलिए लम्बी आयु और स्वस्थता की कामना हेतु धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि का पूजन किया जाता है।

 

अतः इस दिन को धन्वंतरि जयंती के नाम से जाना जाता है धन्वंतरि देवताओं के चिकित्सक के रूप मे भी जाने जाते है.

 

इस दिन भगवान धन्वंतरि पूजा उपासना करने से शारीरिक कष्टों का निवारण होता है.

 

धन्वंतरि के अलावा इस दिन – यम, लक्ष्मी, गणेश और कुबेर देव की भी पूजा की जाती है।

Dhanteras

मान्यता के अनुसार धनतेरस का शुभ दिन माँ लक्ष्मी पूजा का के लिए अति लाभकारी माना गया है.

 

श्रीसूक्त में वर्णन है कि लक्ष्मीजी भय और शोक से मुक्ति दिलाती हैं तथा धन-धान्य और अन्य सुविधाओं से युक्त करके मनुष्य को निरोगी काया और लंबी आयु प्रदान करती हैं।

 

इस दिन माता लक्ष्मी के साथ साथ धन के देवता भगवान कुबेर की भी पूजा की जाती है. मान्यता के अनुसार इस खास अवसर पर भगवान कुबेर की पूरा अर्चना करने से घर से नकारात्मक शक्तियाँ खत्म होती है और घर की बुरी दशाए ठीक होती है.

 

कुबेर भी आसुरी प्रवृत्तियों का हरण करने वाले देव हैं इसीलिए उनकी भी पूजा का प्रचलन है।

 

 

धनतेरस पर्व की परंपरा – कैसे मनाया जाता है धनतेरस का महा पर्व 

भारत के कई जगह पर धनतेरस को अपने अपने तरीके एवं परम्पराओं अनुसार मनाया जाता है.

 

5 दिनों तक मनाए जाने वाले दीवाली के शुभ मांगलकारी दिनों मे से सबसे पहला दिन धनतेरस का होता है अतः बाकी 4  दिनों के मुकाबले धनतेरस के दिन बाज़ारो मे खरीदारों की सबसे अधिक भीड़ देखने को मिलती है.

 

साल भर मे धनतेरस के दिन ऐसा अद्भुत योग बनता है जिसमे मान्यता है की इस दिन धातु से बनी किसी चीज को बाजार से खरीदकर घर लाने से घर मे सदैव बरकत बनी रहती है.

 

इसलिए इस दिन बाज़ारो मे बहुत भीड़ देखने को मिलती है इस दिन लोग बाजार से धातु के रूप मे चांदी या सोने का सिक्का, या पीतल के बर्तन, या चांदी से बने छोटे से गणेश एवं माता लक्ष्मी की मूर्ति भी खरीदते है.

दीवाली के लिए पूजा के सामान भी इसी दिन खरीद लिए जाते है.

 

खरीदे गए सभी सामानो का दीपावली के दिन पूजन किया जाता है. जिसका अर्थ ये होता है घर मे हमेशा बरकत बनी रहे वस्तुओं की कभी कमी ना हो.

 

यह पांचो दिन इतने मांगलकारी होते है की इस दिन सच्ची श्रद्धा भावना से की गई पूजा अर्चना से मनोकामनाए अवश्य पूरी होती है. जीवन मे सकारात्मक बदलाव आने लगते है.

 

अतः धनतेरस की खरीदारी के लिए सबसे उत्तम और मांगलाकारी दिन माना गया है.

 

धनतेरस भारत के विभिन्न भागों में अलग-अलग तरह से मनाया जाता है। अधिकतर जगहों पर सायंकाल दीपक जलाकर घर-द्वार, आंगन, दुकान आदि को सजाते हैं। इस दिन से मंदिर, गौशाला, नदी के घाट, कुआं, तालाब एवं बगीचे आदि सभी जगहों को जगमग कर दिया जाता है।

 

 पश्चिमी भारत के व्यापारिक समुदाय के लिए यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण त्योहार है। महाराष्ट्र में लोग सूखे धनिया के बीज को पीसकर गुड़ के साथ मिलाकर एक मिश्रण बनाकर ‘नैवेद्य’ तैयार करते हैं।

 

ग्रामीण इलाकों में, किसान अपने मवेशियों को अच्छे से सजाकर उनकी पूजा करते हैं।

 

दक्षिण भारत में लोग गायों को काम धेनु और देवी लक्ष्मी के अवतार के रूप में मानते हैं इसलिए वहां के लोग गाय का विशेष सम्मान और आदर करते हैं।

 

 इस अवसर पर गांवों में लोग धनिया के बीज खरीद कर भी घर में रखते हैं। दीपावली के बाद इन बीजों को लोग अपने बाग-बगीचों या खेतों में बोते हैं। इस दिन लोग हल जुती मिट्टी को दूध में भिगोकर उसमें सेमर की शाखा डालकर लगातार तीन बार अपने शरीर पर फेरकर कुमकुम लगाते हैं।

 

अतः यह धनतेरस समेत बाकी के चार दिन (छोटी दीवाली, बड़ी दीवाली, गोवर्धन पूजा और भैया दूज) जैसे अत्यंत मांगकरी दिनों को लोग खूब उत्साह से मनाते है.

 

मेरी तरफ से सभी को धनतेरस समेत बाकी 4 मांगकरी पर्व की खूब सारी शुभकामनायें. सबका जीवन मंगलमय हो.

 

उम्मीद करता हूं आज की यह post धनतेरस पर निबंध dhanteras essay आपको बहुत पसंद आया होगा.

 

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