Drone kya hai in hindi सम्पूर्ण जानकारी

Dron kya hai in hindi

यदि आप जानना चाहते हो की drone kya hai? तो आप बिलकुल सही जगह पर आए हो. आज हम ड्रोन जैसे अद्भुत टेक्नोलॉजी के बारे विस्तारपूर्वक चर्चा करेंगे और आपको आसान तरीके से ये बताएंगे की

  • ड्रोन क्या होता है?
  • ड्रोन का अविष्कार एवं इतिहास क्या है ?
  • ड्रोन कैसे काम करता है?
  • ड्रोन कैसे बनाया जाता है?
  • ड्रोन को किन किन कामों मे उपयोग किया जाता है?
  • ड्रोन की क़ीमत कीटज होती है और कहाँ से मिलता है?
  • ड्रोन कैसे चलाया जाता है?
  • ड्रोन के फायदे नुकसान और रखरखाव की सावधानियां क्या है?.

 

 

ड्रोन kya होता है छोटा सा इंट्रो 

ड्रोन, उभरते हुए विज्ञानं एवं विकासशील टेक्नोलोजी का एक बेहतरीन उदाहरण है. आज के समय विश्वभर मे ड्रोन जैसी अद्भुत टेक्नोलॉजी का विभिन्न कार्यों – मकसदो और प्रयोगो (works, purpose and uses) के आधार पर अलग अलग क्षेत्रो मे विस्तृत रूप से इस्तेमाल किया जाने लगा है.

 

Drone kya hai शब्द का अर्थ 

Drone शब्द पुराने अंग्रेजी शब्द drone से लिया है जिसका hindi अर्थ है नर मधुमक्खी. ड्रोन ज़ब उड़ते है तो तेज़ी से घूमते हुए पंखो की वजह से कुछ इस तरह से आवाज़ आती जैसे हज़ारो मधुमखीयां एक साथ उड़ रही हो.

 

Dron kya hai इतिहास एवं अविष्कार

ड्रोन का इतिहास आज बहुत सालों पुराना है आज से   172 साल पहले,  वर्ष 1849 मे पहली बार ड्रोन का अविष्कार हो गया था.

 

हालांकि उस समय इसे ड्रोन नाम के शब्द से नहीं बल्कि एक UAV ke नाम से जाना जाता था. इस UAVs का अविष्कार बम फैकने के लिए किया गया था. यह एक गुब्बारे जैसा था और size मे काफ़ी बड़ा था यह सिर्फ 15 से 20 फिट की ऊचाई तक उड़ाया जा सकता था.

 

इसके बाद 1915 में निकोला टेस्ला जैसे महान वैज्ञानिक ने एक मानव रहित लड़ाकू विमान बनाया था। इस ड्रोन को आधुनिक ड्रोन का आधार माना जाता है।

 

इसके बाद ड्रोन की खासियत को समझते हुए 1918 मे दूसरे विश्वास के दौरान USA मे 15 हज़ार ड्रोन बना कर प्रयोग किये गए थे.

 

कुल मिलाकर पुराने समय में सिर्फ युद्ध, सेना, बॉर्डर आदि में ही ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा था।

 

 इसके बाद 1987 में पहली बार ड्रोन का प्रयोग एग्रीकल्चर में भी आ गया इस तरह का ड्रोन याम्हा कंपनी द्वारा फसलों में दवा छिड़कने के लिए बनाया था.

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इस दौरान यह ड्रोन सिर्फ जापान में ही उड़ रहा था लेकिन 2015 में अमेरिका ने भी अपने देश में ड्रोन उड़ाने की परमिशन जारी कर दी।

 

युद्ध मे जानमाल का नुकसान ना हो, पायलट की सुरक्षा,डिफेन्स मिलिट्री मे ख़ुफ़िया जानकारी जैसे मकसदो को ध्यान मे रख कर धीरे-धीरे ड्रोन का इस्तेमाल  बड़े पैमाने पर किया जाने लगा जैसा कि युद्ध मिसाइल को उसके नियत स्थान पर भेजने के लिए, मनोवैज्ञानिक कार्य एवं रिसर्च के लिए जहाँ मानव का पहुँचना असंभव है तथा  जहां मानव के जानमाल को ज्यादा हानि ना हो।

 

इसके बाद साल 2013 आते आते भारत मे भी इसका बड़े पैमाने पर डिफेन्स मे प्रयोग किया जाने लगा.

 

ड्रोन बनाने वाली कम्पनियों ने ज़ब समझा की ड्रोन को कई तरह सके काम मे प्रयोग किया जा सकता है तो नए नए तरह के ड्रोन produse होने लगे और बाज़ारो मे बिकने लगे.

 

चलिए 2 अलग अलग तरीको से आज के ज़माने के ड्रोन को समझते है.

 

 नई पीढ़ी के dron kya hai 

1- ड्रोन हवा मे उड़ने एवं विचरण करने वाला एक ऐसा विद्युतीय यंत्र (electrical device) है जो एक मोबाईल या रिमोट के माध्यम से चलाया अथवा उड़ाया जाता है.जैसा की आप image मे देख रहे हो. पहली तस्वीर मे ड्रोन है और दूसरी तस्वीर मे ड्रोन का रिमोट.

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2- तकनीकी भाषा मे ड्रोन को मानवरहित aircraft कहा जाता है. तकनीकी तौर पर इसका नाम UAVs है. यानी unmanned aircraft vehicles . बिना आदमी के उड़ने वाला विमान.

 

ड्रोन ऐसे फ्लाइंग रोबोट की तरह होते है जिनकी हवा मे हर मुवमेंट को रिमोट के माध्यम से कंट्रोल किया जाता है.

 

ड्रोन को कंट्रोल करने के  लिए खास प्रकार का वयारलेस रिमोट तैयार किया गया होता है जिसमे एक एंटीना लगा होता है.

 

इस रिमोट से ड्रोन की गति पर कंट्रोल किया जाता है, ड्रोन को हवा मे आगे पीछे ऊपर नीचे हर दिशा मे उड़ाया जाता है.

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ड्रोन के चारो कोनो मे लगे ब्लेंडनुमा पंखे क्लोक वाइज और एंटी क्लोक वाइज घूम कर गति को नियंत्रित रखते है.

 

ड्रोन मे लगा कैमरा बहुत खास होता है जो की स्पेशली ड्रोन के लिए ही बनाया गया होता है.

 

 ड्रोन मे लगा हाई डेफिनेशन कैमरा हर दिशा मे घूम कर वाइड एंगल तस्वीरें लेने और 4k वीडियो शूट करने मे सक्षम होता है.

अब लगभग हर प्रकार के ड्रोन मे कैमरा लगा होता है.

इसलिए इसका उपयोग बहुत से कामों मे लिया जाता है.

 

ड्रोन मे कैमरे का क्या काम होता है ड्रोन कैसे चलता है किस तरह से काम करता है ? चलिए विस्तार से समझते है.

 

ड्रोन को कैसे उड़ाया जाता है? How to flay drone

 

चलिए ड्रोन उडाने की प्रक्रियां को एक उदाहरण के माध्यम से समझते हो.

 

उदाहरण के लिए अगर आप ड्रोन को आगे ले जाना चाहते हैं तो rotor 1 और 4 की speed बढ़ानी होगी, जबकि rotor 2 और 3 की speed घटानी होगी या सामान्य रखनी होगी.

 

अब rotors 1 और 4 अधिक lift पैदा करेंगे जिससे ड्रोन थोड़ा झुक जाएगा और thrust पैदा करते हुए झुकी हुई दिशा में आगे बढ़ने लगेगा. इसी तरह आप ड्रोन को backward या sideway direction में ले जा सकते हैं.

 

Remote Control – ड्रोन पर लगे rotors की speed को remote के joystick (ड्रोन रिमोट) के जरिए control किया जाता है.

 

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रिमोट के एंटीना से निकलने वाली रेंज ड्रोन मे मौजूद hardware और सॉफ्टवेरे मे तालमेल बैठाती है जिससे एक मजबूत कनेक्शन स्थापित हो जाता है. जिस वजह से हम ड्रोन जमीन से और खुद से काफ़ी लम्बी रेंज तक मुवमेंट करवा पाते है.

 

ड्रोन मे मौजूद battery से चारों ड्रोन के motors को मिलने वाली voltage को कम या ज्यादा करता है, जिससे rotors की speed में बदलाव आता है.

ड्रोन की स्पीड अधिक बढाने के लिए आपको रिमोट से वोल्टेज बढानी होगी ताकी मोटर्स को अधिक पावर मिल सके.पावर मिलते ही ब्लेंडनुमा पंखे अधिक तेजी से घूमने लगेंगे.

 

इस तरीके का प्रयोग आप लेंडिंग करवाने यानी ड्रोन को नीचे उतारने मे कर सकते हो.

 

साथ ही ड्रोन में  lithium Ion batteries का इस्तेमाल किया जाता है, जो batteries को healthy रखने के जरुरी होता है ताकि maximum flight time प्राप्त किया जा सके.

 

चलिए समझते है ड्रोन कैसे काम करता है 

 

Dron कैसे काम करता है?

यह समझने के लिए आपको यह जानना होगा की dron के अंदर क्या क्या मौजूद रहता है और ड्रोन किन चीजों से मिलकर बना होता है.

 

लगभग हर तरह के ड्रोन ऑपरेटिंग सिस्टम एक जैसी सेम तकनीक पर ही काम करते है.

 

ड्रोन के बाहरी parts बहुत हल्के और मजबूत मेटेरियल्स से मिलकर बने होते है ताकी ड्रोन का वजन भारी ना हो और इंसमे मौजूद बैटरी की पावर से ड्रोन आसानी से अधिक ऊचाई तक उड़ाया जा सके.

 

जैसा की आप तस्वीर मे देख रहे हो एक ड्रोन मे क्या क्या मौजूद रहता है.

ये quadcopter drone बनाने की accessaries (tools & components) है

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  1. कनेक्टिविटी
  2. रोटर्स
  3. ड्रोन Rotation

 

Quodcoptor drone कैसे बनाया जाता है ये आप इस वीडियो को देख कर step 2 step तरीके से समझ सकते है.

 

चलिए जानते है ये सभी फीचर्स and accesaries ड्रोन को उड़ने मे कैसे मदद करती है क्या भूमिका निभाती है.

 

Connectivity– 

ड्रोन और रिमोट के बीच एक मजबूत connectivity की वजह से ड्रोन की हर मुवमेंट को हवा मे remotely control किया जाता है.

 

 अक्सर smartphone और tablet के माध्यम से भी ड्रोन को इनसे कनेक्ट किया जा सकता है.

 

इस wireless connectivity के माध्यम से pilot (रिमोट से ड्रोन की उड़ाने वाला आदमी) ड्रोन और इसके आसपास के area पर किसी पक्षी की आंख की तरह नजर रख सकता है. क्योंकि ड्रोन मे लगा hd कैमरा बाज़ कज आँख का काम करता है जिसकी सीधा तस्वीरें पाइलट को स्क्रीन पर दिख रही होती गई यह स्क्रीन ड्रोन कैमरे से वयारलेस टेकनीक के माध्यम से कनेक्ट होती है.

 

बैटरी – Rotors & propellers 

सामान्य ड्रोन मे चार रोटर होते है. मतलब चार कोने जिन पर ब्लेंड जैसे पंखे लगे होते है. 

ड्रोन को ऊपर की तरफ उड़ाने में सबसे मुख्य भूमिका rotors की होती है.

 

Rotor जिसमे मोटर के साथ जुड़ा हुआ एक propeller शामिल होता है. अब जैसे ही pilot रिमोट के माध्यम से एक्सलीरेट करता है उसी अनुसार ड्रोन मे मौजूद बैटरी से पावर का प्रसार रोटर्स की तरफ प्रवाहित होता है.

 

जिस वजह से रोटर्स propellers (ड्रोन मे लगे ब्लेंडनुमा पंखे) को तेजी से घुमाने लगते है.

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जिस वजह से ड्रोन की body ग्रेवीटेशनल फ़ोर्स को दबा कर ऊपर की तरफ उठना शुरू होती है.

 

जब सभी rotors एक साथ तेज गति से घूमते हैं तो वे नीचे हवा को push करते हैं और हवा ड्रोन को ऊपर की तरफ push करती है (Newton’s third law of motion). जब rotors की गति बढ़ाई जाती है तो ड्रोन ऊपर उठने लगता है और जब गति कम की जाती है तो ड्रोन नीचे की तरफ आने लगता है.

 

तो दोस्तों इसके पीछे का साइंस तो  आपने समझ लिया की ड्रोन किस तरह से जमीन से ऊपर उठता हसि और लैंड होता है. चलिए अब जानते है ड्रोन को किस तरह हवा मे मुव करवाना है.

 

ड्रोन Rotation & movement 

ड्रोन के रिमोट मे कई गियर होते है जो ड्रोन को दाए बाएं ऊपर नीचे मुवमेंट करवाता है.जैसे जैसे रिमोट मे लगे गियर को आगे पीछे करोगे उसी अनुसार आपका ड्रोन भी मुवमेंट करेगा.

 

आप इमेज मे देख कर इसके पीछे के साइंस को समझ सकते है.

रिमोट मे हर rotors को कितनी पावर देनी है यानी किस रोटर के पंखे को कितना तेज़ घुमाना है यह सब गियर बटन बने होते है.

 

अगर आप ड्रोन को मोड़ना या घुमाना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको रिमोट के माध्यम से चार rotors मे से दो rotors यानी rotors 1 और 3 जो कि clockwise दिशा में घूम रहे हैं,उनके propellers की speed अधिक करनी होगी,यानी in दो rotors को अधिक power भेजनी है. रिमोट पर बने 1 और 3 नंबर गियर को धीरे धीरे आगे की तरफ पुश करो.

 

जबकि counterclockwise दिशा में घूम रहे rotors 2 और 4 की speed इनसे कम रखनी होगी.तो इसके लिए रिमोट पर बने 2 और 4 नंबर गियर को सामान्य ही रहने दे.

 

ऐसा करने पर ड्रोन की ऊंचाई में कोई बदलाव नहीं आएगा, लेकिन angular momentum बढ़ने की वजह से ड्रोन clockwise दिशा में घूम जाएगा.

 

इसी तरह अगर आप ड्रोन को counterclockwise दिशा में घुमाना चाहते हैं तो इसका उल्टा करना होगा. 

 

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Forward और Backward –ड्रोन को आगे पीछे दिशा मे करने के लिए – 

अगर आप ड्रोन को forward या backward दिशा में लेजाना चाहते हैं, तो इसके लिए आपको एक तरफ के दो rotors की speed बढ़ानी होगी, जबकि दूसरी तरफ के दो rotors की speed घटानी होगी. ड्रोन के फ्रंट हिस्से की स्पीड बढाने से ड्रोन आगे की तरफ मुव करेगा वही पिछले दो रोटर की स्पीड बढा कर अगले वले दो रोटर की स्पीड सामान्य रखकर आप ड्रोन पीछे की तरफ मुव करवा सकते हो.

 

ड्रोन मे लगे जीपीएस (GPS) का महत्व 

अधिकांश ड्रोन में in-built GPS होता है जिससे उन्हें पता होता है कि वे कहाँ है. अगर किसी कारणवंश ड्रोन से आपका remote-control disconnect हो जाता है, तो ऐसे में ड्रोन अपने आप उसी जगह आ जाता है जहाँ से इसने उड़ान भरी थी. कुछ ड्रोन रिमोट रेंज एरिया से ज़ादा दूर जाने की वजह से वही गिर जाते है जिससे हम इस जीपीएस की वजह से लोकेशन ट्रेक कर सकते है.

 

ड्रोन मे लगे जीपीएस सिस्टम की वजह से ड्रोन को इंस्ट्रक्शन देकर टारगेट लोकेशन तक ड्रोन को पहुँचाता जा सकता है.

 

चलिए step 2 स्पेट समझते है की ड्रोन बनाने मे किन किन चीजों का इस्तेमाल किया जाता है.

 

ड्रोन कैसे बनाया जाता है 

ड्रोन बनाने के लिए जिस सामान की आवश्यकता होती है वो कुछ इस प्रकार है:

 

  1. Quadcopter frame (Body structure)
  2. Propellers
  3. Motors
  4. Electronic Speed Controller (ESC)

 

Quadcopter frame

ड्रोन के body स्ट्रक्चर को टेक्निकल भाषा मे Quadcopter frame कहा जाता है.

 

 यह एक संरचना (फ्रेम) है जिसमें ड्रोन के छोटे बड़े कम्पोनेंट्स सही जगह पर फिट किये जाते है.

इस फ्रेम हर components की जगह उनके साइज के हिसाब से पहले से ही डिजाइन की होती है ताकी बड़े आराम से सभी components अपनी अपनी जगह पर फिट हो सके.

Quadcopter frame online या फिर बाजार से 

विभिन्न आकारों और उनकी गुणवत्ता के आधार पर आपको $ 10 से $ 500 तक की रेंज मे मिल जाएंगे.

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Rotors 

ड्रोन मे मौजूद rotors ड्रोन के ढांचे के अंदर चारो कोनो पर मौजूद रहते है जो की ड्रोन के सेंटर मे मौजूद सीधा हाई पावर मोटर से जुड़े होते है. Rotors को जैसे मोटर्स से पावर मिलती है rotors तेज़ी से घूमने लगता है.

 

Propellers – Rotors पर लगे हार्ड मेटेरियल से बने ब्लेंडनुमा पंखे को propellers कहा जाता है.

 

हर rotors पर हवा को चीर कर वायु दाब प्रेशर पैदा करने वाले 3-3 ब्लेंडनुमा पंखे लगे होते है.

 

इनका सीधा प्रभाव quadcopter के load उठाने की क्षमता पर पड़ता है. साथ ही ये ड्रोन के उड़ने की speed और चारों तरफ चलने की speed पर effect डालते हैं. 

 

लम्बे आकर वाले Propellers कम समय मे अधिक लिफ्ट पैदा करते है.

 

लम्बे प्रॉपलर्स की speed बढ़ाने या घटाने में समय अधिक लगता है. 

 

वहीँ दूसरी तरफ छोटे size के propeller आसानी से अपनी speed कम ज्यादा कर सकते हैं.

 

  लेकिन इन्हें longer blades के बराबर power पाने के लिए अधिक rotational speed की आवश्यकता होती है.नतीजा motor पर अधिक दबाव पड़ता है जिससे उनका जीवनकाल कम हो जाता है.

 

Motors – प्रत्येक propeller के साथ एक motor लगा होता है. इस motor की rating ‘Kv’ units में मापी जाती है. 

 

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Motor जितना अधिक पावर बैटरी से खींचेगा उतना ही कम समय के लिए ड्रोन flay कर पाएगा.

 

Electronic Speed Controller (ESC) –

मोटर को सही spin और ड्रोन को perfect balanced speed और direction प्रदान करने के लिए, यह ड्रोन की प्रत्येक motor को current supply करता है.

 

Radio Receiver

यह एक रेंज होती है जो रिमोट के एंटीना से निकलती है.

इसका काम pilot द्वारा भेजे गए control signals को receive करने का होता है.

जो की रिमोट और ड्रोन softwere के बीच तालमेल कनेक्शन जोड़ता है. जिसे सूचना यानी रिमोट कमाण्ड का आदान प्रदान होता है.

 

Flight Controller

यह एक तरह का onboard computer होता है, जो pilot द्वारा रिमोट से भेजे गए signals को interpret करता है और फिर corresponding inputs को ESC में भेजता है.

 

जिससे quadcopter या ड्रोन control किया जाता है.

 

Battery

ड्रोन मे सामान्य तौर पर lithium polymer batteries का इस्तेमाल किया जाता है. इस तरह की बैटरी से निकलने वाली ऊर्जा यानी मिलने वाली पावर से ड्रोन को flying time अधिक मिलता है और recharge भी जल्द हो जाती हैं.

 

Camera

Camra ड्रोन की आँख होता है. जो live तस्वीरें लेने और लोकेशन की life वीडियो mobile डिस्प्ले पर दिखाने मे कारगर होता है.

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जैसा की आप इमेज देख रहे है ये ड्रोन कैमरा होता है. ड्रोन को ढांचा इस तरह से डिजाइन होता है की इसमें ड्रोन कैमरा आसानी से बिल्ड किया जा सके.

 

  यह navigation में मदद करता है और साथ ही इसे aerial photography के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

 

इनके अलावा कुछ additional sensors का भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जैसे कि gyroscope और accelerometer, वहीं positional measurement के लिए GPS और Barometer इत्यादि.

 

ड्रोन कितनी प्रकार के होते है types of drone 

अलग अलग मकसद के आधार पर ड्रोन की बनावटी, size और क़ीमत अलग अलग होते है.

 

ड्रोन कितने प्रकार के होते हैं? (Types of Drone in Hindi)

ड्रोन के मुख्य तौर पर चार प्रकार होते हैं जो कुछ इस प्रकार हैं:

 

  1. Single Rotor Helicopters
  2. Multi-Rotor Drones
  3. Fixed Wing Drones
  4. Fixed Wing Hybrid वटोल

 

  1. Single Rotor Helicopters – इस तरह के ड्रोन मे एक प्रकार का ही rotor इस्तेमाल किया जाता है जसमे बड़े ब्लेंड पंखे लगे होते है इसलिए इसे single rotor helicopters कहा जाता है.

 

इसमें एक बड़े size का rotor लगा होता है साथ ही इसके tail पर एक छोटा rotor लगा होता है, जो इसके head की direction को control करता है.

 

यह multi rotors के मुकाबले अधिक efficient होता है. ये ज्यादा समय तक उड़ सकते हैं साथ ही gas और electricity दोनों से चल सकते हैं.

 

 इसलिए quadcopters ( 4 rotors) का इस्तेमाल, octocopters (8 rotors) की अपेक्षा अधिक होता है. क्योंकि यह अधिक stable होता है.

 

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इसका अर्थ है  multirotors ड्रोन के मुकाबले single-rotor drones ज्यादा efficient होते हैं

 

हालांकि single rotor ड्रोन में ज्यादा complexity और operational risks होते हैं. साथ ही इनकी cost भी काफी अधिक होती है. इसमे rotor blades size बड़ा होने की वजह से चोट लगने का खतरा बना रहता है. जबकि multi-rotor drones में rotors का size छोटा होने से दुर्घटना होने की संभावना कम हो जाती है.

 

  1. Multi Rotor Drones – आम तौर पर multi-rotors drones का इस्तेमाल सबसे अधिक होता है. इनका इस्तेमाल professional और शौकीन कामो के लिए किया जाता है. इसका सबसे ज्यादा उपयोग हवाई photography, हवाई यातायात निगरानी इत्यादि जैसे कामों के लिए सबसे अधिक होता है. इस segment के अंदर मार्केट में कई प्रकार के drones उपलब्ध हैं. 

 

Professional कार्यों, जैसे वेडिंग फोटोग्राफी और वीडियो केपचंरिंग  के लिए 500 dollars से लेकर 3000 dollars की कीमत तक के drones उपलब्ध हैं.

 

  शौक़ीन कामों के लिए, जैसे कि racing और छुट्टियों में मनोरंजन के लिए या फिर बड़े बड़े sports स्टेडियम मे भी बहुत सारे variants बाजार में उपलब्ध हैं, जिनकी कीमत 50 dollars से 400 dollars के बीच है.

 

Multi-rotor drones को rotors की संख्या के आधार पर आगे classify किया जा सकता है. जो कुछ इस प्रकार है:

 

Tricopter (3 rotors) – इसमें 3 rotors ही होते है.

Quadcopter (4 rotors) – इसमें 4 rotors होते है.

Hexacopter (6 rotors) – इसमें 6 rotors होत्र है.

Octocopter (8 rotors) – इसमें 8 rotors होते है.

 

Quadcopters सबसे ज़ादा उपयोग मे लाया जाने वाला ड्रोन है.

 

हालांकि ये बनाने में आसान और सस्ते हैं फिर भी इनमें बहुत सारी कमियाँ हैं. जिनमे प्रमुख है इनका सीमित flying time, सीमित सहनशक्ति और speed. ये large scale projects, जैसे कि long distance में aerial mapping और निगरानी के लिए उपयुक्त नहीं हैं. इन multicopters की सबसे बड़ी problem है, ये gravity से लड़ने और खुद को हवा में स्थिर रखने के लिए बहुत अधिक energy का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में इनमें battery खपत बढ़ जाती है.

 

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वर्तमान में अधिकांश multi-rotors camera जैसे minimal payload के साथ.केवल 20 से 30 मिनट तक ही लगातार उड़ान भर सकते हैं, वो भी

 

  1. Fixed Wing Drones – Fixed wings drones रचना और बनावट के आधार पर multi-rotor drones से पूरी तरह से अलग होते हैं. इनमे सामान्य aeroplane की तरह ही ‘wings’ का इस्तेमाल किया जाता है.

 ये ड्रोन सिर्फ आगे की ओर उड़ान भरते है जिस तरह से बड़े जहाज होते है.

 

इसके लिए एक internal engine या motor-controlled propeller का इस्तेमाल किया जाता है. इन्हें take-off करने के लिए runway की जरूरत होती है. इस तरह के ड्रोन बहुत बड़े होते है इनका उपयोग जीपीएस के माध्यम से हवा मे उड़ाकर टारगेट लोकेशन मे मिसाइल छोड़ने के लिए किया जाता है.

 

Fixed wings drones कई घंटों तक हवा में उड़ान भर सकते हैं.

 

Gas engined powered ड्रोन 16 घंटे या इससे अधिक समय के लिए उड़ान भर सकते हैं. अपने अधिक flying time और fuel efficiency की वजह से इनका इस्तेमाल long-distance operations के लिए अधिक किया जाता है.

 

इस तरह के ड्रोन का उपयोग सिर्फ मिलिट्री आर्मी फ़ोर्स द्वारा ही किया जाता है. 

 

साथ ही इन ड्रोन की कीमत बहुत ज्यादा होती है और इन्हें उड़ाने के लिए उच्च skill training की आवश्यकता होती है. इसे हवा में छोड़ना कोई आसान काम नहीं है. इसके लिए आपको या तो एक runway की जरूरत पड़ेगी या catapult launcher की जो इसे हवा में इसके मार्ग पर set कर सके.

 

इन्हें सुरक्षित तरीके से ground पर land करने के लिए दोबारा एक runway या parachute की जरूरत पड़ती है. दूसरी तरफ multi-rotors drones काफी सस्ते होते हैं जिन्हें कोई भी व्यक्ति कुछ dollars खर्च करके आसानी से खरीद सकता है.

 

  1. Fixed Wing Hybrid VTOL – VTOL का मतलब है “Vertical Take-off and Landing”. ये वो hybrid versions हैं जिनमे fixed wing versions के benefits (जैसे लंबे समय तक उड़ना) और rotor based versions के benefits ( hovering- हवा में स्थिरता) को combine कर दिया जाता है. इस concept को लगभग 1960 के दौरान test किया गया था, जो सफल नहीं हुआ था. हालांकि, नए generation के sensors के आगमन (gyros और accelerometers) के साथ इस concept को नई दिशा मिली और यह कामयाब हुआ.

 

Hybrid VTOL automation और manual gliding का एक combine play है. इसमे ड्रोन को ground से हवा में उठाने के लिए एक vertical lift का इस्तेमाल किया जाता है. ड्रोन को हवा में stabilize करने के लिए gyros और accelerometers automated mode में काम करते हैं. इसके साथ ही ड्रोन को इच्छित मार्ग पर guide करने के लिए remote आधारित manual control का इस्तेमाल किया जाता है.

 

तो दोस्तों यह थे ड्रोन के प्रकार उम्मीद करता हूं आप अच्छे से समझ गए होंगे.

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ड्रोन लेने बाद ड्रोन ड्रोन को उपयोग करने की कुवह सावधानियां भी होती है जिनके बारे पता होना बहुत जरुरी है.

 

ड्रोन के रखरखाव की सावधानियां

  • ड्रोन की समय समय पर जाँच करते रहना.
  • ड्रोन को कभी भी ज़ादा बारिश मे मत उड़ाए इससे बारिश का पंज मोटर तक पहुंचने से मोटर सड़ने का डर रहता है.
  • ड्रोन को आंधी तूफान मे भी कभी मत उड़ाए इससे ड्रोन अपना संतुलन खो सकता है ओट किसी पेड़ दीवार या फिर जीव इंसान से भी टकरा सकता है इस जान माल दोनों की हानी होने की सम्भावना रहती है.
  • धूल भरी आंधी मे ड्रोन को मत उड़ाए इससे डस्ट वगैरा मोटर ओर robor मे जाकर जम जाते जिससे खराबी आने का डर बना रहता है.
  • तेज़ हवाओं मे ड्रोन को अधिक समय उड़ाने से मोटर सड़ने का डर रहता है क्योंकि तेज़ हवाओं मे ड्रोन को स्टेबल रखने के लिए ज़ादा पावर की आवश्यकता पड़ेगी अत्यधिक पावर सप्लाए बैटरी life को जल्दी खत्म कर देता है.

 

चलिए दोस्तों जानते है आज कल किन किन क्षेत्रों मे ड्रोन के उपयोग किये जा रहे है.

 

ड्रोन के उपयोग

आज कल विकसित टेक्नोलोजी के माध्यम से तरह तरह के ड्रोन विकसित किये जा रहे है ओर बाजार मे बिक रहे है.

दुनियां भर मे अब ड्रोन कई तरह के कार्यों मे उपयोग मे लाए जाने लगे है. ज़ादातर मल्टी rotors वाले ड्रोन अधिक काम मे लाए जाते है. 

 

वेडिंग फोटोग्राफी मे

आज कल बहुत से शादी विवाह जैसे समारोह मे high एरिया कवर करने – वाइड एरिया तसिवीरे लेने वीडियो केपचारिंग and अरियल फोटोग्राफी करने मे ड्रोन का ही सहारा लिया जाता है. ड्रोन मे लगा high डेफिनेशन कैमरा किसी भी दिशा मे घूम कर ड्रोन की स्थिरता के साथ हर एंगल मे मुव होकर जबरदस्त और आकर्षक फिटिंगफ़ी और वीडियो बनाने की क्षमता रखता है.

Full चार्ज करने पर यह ड्रोन आधे से एक घंटे तक उड़ाए जा सकते है.

 

डिफेन्स मे ड्रोन का उपयोग 

शुरुआती दौर से लेकर अब तक ड्रोन का सबसे अधिक उपयोग होते आया है. डिफेन्स मे छोटे बड़े हर size के ड्रोन उनकी कार्यशैली के हिसाब से मौजूद रहते है.

डिफेन्स मे ड्रोन का उपयोग दुर्गम क्षेत्रों मे किया जाता है जहाँ इंसानों का जाना मुश्किल और जोखिम भरा होता है.

 

दुर्गम जगहों पर in ड्रोन को भेज कर ड्रोन मे लगे कैमरे के द्वारा लोकेशन की live स्थिति से अवगत हुआ जाता है. ड्रोन का उपयोग डिफेन्स मे दुश्मनो पर नजर रखने और जासूसी तथा ख़ुफ़िया जानकारी जुटाने मे किया जाता है.

 

क़ृषि मे ड्रोन का उपयोग 

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आज कल बड़े बड़े किसान भाई भी होनी जरूरतों के हिसाब से ड्रोन का उपयोग फसलों पर कितनाशक छिड़काव और रखरखाव के लिए करने लगे है. इससे उनका काम बहुत आसान हो गया है और समय की बचत भी हो जाती है और काम भी बहुत साहि तरीके से हो जाता है. जहाँ बहुत ज़ादा बड़े एरिया पर क़ृषि की जाती है वहाँ पर अक्सर ऐसे ड्रोन का उपयोग किया जाने लगा है. ये ड्रोन साइज़ मे थोड़ा बड़े साइज़ के होते है जो भारी सामान को उठाने मे सक्षम होते है.

 

बड़े sports टूर्नामेंट मे

अब तक क्रिकेट आईपीएल से लेकर कई तरह के छोटे बड़े खेल टूर्नामेंट मे ड्रोन का उपयोग किया जाने लगा है. ड्रोन मे लगे कैमरे के वजह से खेल मे खिलाडियों द्वारा की जाने वाली हर गलती पर आसानी से नजर रखी जाती है.

 

Movies सीन and टीवी सीरियल सीन शूट करने मे ड्रोन का उपयोग 

दोस्तों आपने कई बार फिल्मो मे भी ड्रोन उड़ते देखा ही होगा. हालांकि अब ड्रोन वजह से फिल्मो और टीवी सीरियल वालों के लिए तो बहुत ख़ुशी की बात हो गई.

 

ड्रोन की मदद से ये लोग अब दुर्गम स्थानों पर अपने movie सीन मे मुश्किल से मुश्किल एंगल की वीडियो शूटिंग कर पाते है.

 

ड्रोन के लिए लाइसेंस

भारत मे ड्रोन उड़ाने के लिए आपको लाइसेंस भी लेना पड़ेगा जिसमे आपको ये बताना होगा की आप किस मकसद के लिए ड्रोन ले रहे है. कुछ दिनों मे लाइसेंस बन कर आपके घर आजाएगा. फिर आप ड्रोन अपनी निजी मकसद या व्यवसाय मे कर सकते हो.

 

ड्रोन की क़ीमत 

बाजार से online shopping वेबसाईट जैसे amazon flipkart से आप ड्रोन मशीन खरीद सकते हो. हालांकि ड्रोन की कीमतें ज़ादा होती है लेकिन अब कई तरह के वेरिएंट या ऐसा कह लो इसमें भी कई ऑप्शन एवं अल्टीरनेटिव आने लगे है जिसे आप अपनी सहूलियत ओर बजट अनुसार खरीद सकते हो.

 

खरीदते समय बस ये बातें ध्यान मे रखे की, ड्रोन के ब्लेड्स size बड़े हो ज़ादा छोटे ना हो, हाई पावर लीथियम बैटरी हो. Inbuild high डेफिनेशन कैमरा हो. कैमरा हर एंगल मे आसान मुव होना चाहिए फ्लेक्सीबल होना चाहिए.

 

हालांकि ड्रोन के use होने वाले purpose के हिसाब से इनकी body size और वेट का खास ध्यान रखा जाता है ताकी यह कम पावर मे ज़ादा देर तक हवा मे स्टेबल रह सके. यानी ड्रोन से ज़ादा देर तक काम लिया जा सके

 

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तो दोस्तों यह थी हमारी आज की जानकारी. आज हमने सिखा की –

  • ड्रोन क्या है,drone kya hai 
  • ड्रोन कैसे काम करता है?
  • ड्रोन कैसे उड़ाया जाता है?
  • ड्रोन जैसे बनाया जाता है?
  • ड्रोन कितनी प्रकार के होते है?
  • ड्रोन का उपयोग कहाँ कहाँ किया जाता है?
  • ड्रोन का रख रखाव और उपयोग करने की सावधानियां.

 

उम्मीद करता हूं आप आज drone से जुड़ी यह तमाम जानकारियां अच्छे से समझ गए होंगे यदि मन मे ड्रोन से जुडा कोई सवाल हो तो आप कमेंट box मे जरूर पूछे हम जल्द से जल्द सवाल जवाब देंगे.

 

निवेदन है इस जानकारी को खुद तक सिमित मत रखे drone kya hai की जानकारी को ज़ादा से ज़ादा लोगों मे शेयर करें.

 

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