Independence Day india 15 august

Independence Day india 15 august – Independence Day history


भारत का स्‍वतंत्रता दिवस (Independence Day) हर वर्ष 15 अगस्‍त को देश भर में हर्ष उल्‍लास के साथ मनाया जाता है । 2019 यानि आज भारत को आज़ादी मिले 72 साल पूरे हो चुके है तो भारत की आज़ादी की इस 72वीं वर्सगाठ पर आप सभी लोगो को मेरी तरफ से happy independence day जय हिन्द जय भारत . स्वतंत्रता दिवस भारत में राष्ट्रीय अवकाश के रूप में 15 अगस्त को मनाया जाता हैं। इसी दिन हमारा भारत 847 सालो की गुलामी से आज़ाद हुआ था और सन 15 अगस्त -1947 के दिन भारत की राजधानी दिली के लाल किले पर तिरंगा लहरा कर पूरे भारत मे  स्वतन्त्रता की घोसणा की गई  इस प्रकार आज से इस (15 अगस्त -1947) इस दिवस की नीव राखी गई और तब से आज तक यह स्वतन्त्रता दिवस (Independence Day) पूरे हरसो उल्लास के साथ मानते आरहे है ।

 

 

ये दिन न सिर्फ  ब्रिटिश शासन से भारत की आजादी को दर्शाता है  बल्कि  उन तमाम क्रांतिकारियों के महान बलिदान को भी दर्शाता है जिन्होने भारत को अंग्रेज़ो से मुक्त करने के लिए अपने जन की बाज़ी लगा दी ,और सभी लोगों को एकजुट कर देश की शक्ति को भी प्रदर्शित करता हैं। 


 

यह प्रत्‍येक भारतीय को एक नई शुरूआत की याद दिलाता है। 15 अगस्‍त 1947 वह भाग्‍यशाली दिन था जब भारत को ब्रिटिश उपनिवेशवाद से स्‍वतंत्र घोषित किया गया और नियंत्रण की बागडोर देश के नेताओं को सौंप दी गई।Independence Day india

 

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यह बात पूरा भारत वर्स  जनता है और इतिहास गवाह है की  यह आज़ादी हमे कितनी जद्दोजहेज़ और कुर्बानियों के बाद हासिल हुई है । 250सौ साल तक भारत अंग्रेज़ो का एक गुलाम बना रहा । इस प्रकार 250 साल अंग्रेज़ो ने भारत पर राज़ किया । कुल मिलाकर भारत 847 सालो तक गुलामी की बेड़ियो मे जकड़ा रहा और गुलामी की पीड़ा सहता रहा । जिसमे भारत पहले  भारत 517 साल  तक मुग़लो का गुलाम हुआ फिर 250 साल अंग्रेज़ो ने भारत और भारतीयों पर  हुकूमत की ।

 

 

 

स्वतंत्रता दिवस क्यों मनाया जाता है? (Why Celebrate Independence Day in Hindi?)
स्वतंत्रता दिवस 15 august 1947 में ब्रिटिश शासन से भारत की आजादी की याद में मनाया जाता है। 15 अगस्त को एक नए स्वतंत्र भारत का जन्म हुआ। इस दिन अंग्रेजों ने भारत छोड़ा और देश को नेताओं को सौंपा था इसलिए ये भारत के इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण दिन है और भारतीय इस दिन को हर साल बड़ी धूमधाम से मिलकर मनाते हैं।

 

इस दिन भारत को लंबे वर्षों के बाद ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता मिली। 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश साम्राज्य से स्वतंत्र रूप से देश की स्वतंत्रता मनाने के लिए इस दिन को पूरे भारत में राष्ट्रीय और राजपत्रित अवकाश के रूप में घोषित किया गया।

 

भारत के लिए अंग्रेजों से स्वतंत्रता प्राप्त करना इतना आसान नहीं था लेकिन भारत के कुछ महान लोगों ने और स्वतंत्रता सेनानियों ने इसे सच कर दिखाया। उन्होंने अपनी पीढ़ियों की चिंता के बजाय पूरे भारत परिवार की चिंता की और स्वतंत्रता प्राप्त करने में अपनी जान तक त्याग दी।

 

उन्होंने पूर्ण स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए हिंसक और अहिंसक प्रतिरोध सहित विभिन्न स्वतंत्रता आंदोलनों पर योजना बनाई और उन पर काम किया।

 

इस दिन सभी राष्ट्रीय, राज्यों और स्थानीय सरकार के कार्यालय, बैंक, डाकघर, स्टोर, बाजार, व्ययसाय और संगठन आदि बंद रहते है हालाँकि सार्वजनिक परिवहन (public transport) चालू रहते हैं।

 

यह भारत की राजधानी में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है साथ ही यह सार्वजनिक समुदाय (public community) और समाज सहित छात्रों और शिक्षकों द्वारा सभी स्कूलों, कॉलेजों और अन्य शैक्षिक संस्थानों (educational institutions) में भी मनाया जाता हैं।Independence Day india

 

 

कैसे  मनाया जाता है स्वतंत्रता दिवस ? (how to Celebrate Independence Day in Hindi?)

वैसे तो यह दिन पूरे भारत मे पूरे हरसो उल्लास के साथ मनाया जाता है हर- नगर -घर- ऑफिस -गली -मोहल्ले -शहर मे  स्वतन्त्रता दिवस (Independence Day) को मनाया जाता है । लेकिन खास तौर पर ये दिन भारत की राजधानी दिल्ली मे मनाया जाता है । जिसे मनाने के लिए भारत के कोने कोने से लोग पूरे जोश के साथ  हाथो मे तिरंगा लिए  वह पर जमा होते है ।

 

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स्वरंत्रता दिवस को भारत में राष्ट्रीय अवकाश होता है। इसके एक दिन पहले भारत के राष्ट्रपति देश के समक्ष संबोधित करते हैं। जिसे रेडियो के साथ कई टीवी चैनेल्स में भी दिखया जाता है। स्वतंत्रता दिवस को हर वर्ष देश के प्रधानमंत्री लाल किला पर तिरंगा फहराते हैं।

 

तिरंगा फहराने के बाद राष्ट्र गान गया जाता है और 21 बार गोलियां चला कर सलामी भी दी जाती है। इसके साथ ही भारतीय सशस्त्र बल, अर्धसैनिक बल और एनएनसीसी कैडेड परेड करते हैं। इस दिन लाल किला से टीवी के डी डी नेशनल चैनल और आल इंडिया रेडियो में सीधा प्रसारण किया जाता है। आतंकवाद के खतरे को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा के कड़े इन्तेजाम भी किये जाते हैं।

 

देश की राजधानी के साथ देश के अन्य सभी राज्यों में भी मुख्यमंत्री सम्मान के साथ तिरंगा फहराते हैं। 15 अगस्त को हमारे महान स्वतंत्रता सेनानियों को श्रधांजलि दी जाती और उनका सम्मान किया जाता है। इस दिन देशभक्ति के गीत और नारे लगाये जाते हैं। वहीं कुछ लोग पतंग उड़ा कर आजादी का पर्व मनाते है।

 

 

 

 

 

 

 

 

इस दिन सभी सरकारी दफ्तर, कार्यालयों में तिरंगा फहराया जाता है और राष्ट्रगान “जन-गण-मन” गया जाता है। स्कूल, कालेजो में विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है और मिठाइयां बांटी जाती हैं। मंगल पांडे, सुभाषचंद्र चंद्र बोस, भगतसिंह, रामप्रसाद बिस्मिल, रानी लक्ष्मीबाई, महात्मा गांधी, अशफाक उल्ला खां, चन्द्रशेखर आजाद, सुखदेव, राजगुरु आदि कई स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानियों को याद किया जाता है।

 

 

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15 अगस्त -स्वातंत्र्ता दिवस पर लेख – (Independence Day) 

 

15 अगस्त 1947 भारत के लिए बहुत भाग्यशाली दिन था। इस दिन अंग्रजों की लगभग 200 वर्ष गुलामी के बाद हमरे देश की आज़ादी प्राप्त हुई थी। भारत को आज़ादी दिलाने के लिए कई स्वतंत्रता सेनानियों को अपनी जान गवानी पड़ी थी। स्वतंत्रता सेनानियों के कठिन संघर्ष के बाद भारत अंग्रजों की हुकूमत से आज़ाद हुआ था। तब से ले कर आज तक 15 अगस्त को हम स्वतंत्रता दिवस मानते हैं।

 

 

स्वरंत्रता दिवस को भारत में राष्ट्रीय अवकाश होता है। इसके एक दिन पहले भारत के राष्ट्रपति देश के समक्ष संबोधित करते हैं। जिसे रेडियो के साथ कई टीवी चैनेल्स में भी दिखया जाता है। स्वतंत्रता दिवस को हर वर्ष देश के प्रधानमंत्री लाल किला पर तिरंगा फहराते हैं।

 

तिरंगा फहराने के बाद राष्ट्र गान गया जाता है और 21 बार गोलियां चला कर सलामी भी दी जाती है। इसके साथ ही भारतीय सशस्त्र बल, अर्धसैनिक बल और एनएनसीसी कैडेड परेड करते हैं। इस दिन लाल किला से टीवी के डी डी नेशनल चैनल और आल इंडिया रेडियो में सीधा प्रसारण किया जाता है। आतंकवाद के खतरे को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा के कड़े इन्तेजाम भी किये जाते हैं।

 

 

 

केवल देश की राजधानी के साथ देश के अन्य सभी राज्यों में भी मुख्यमंत्री सम्मान के साथ तिरंगा फहराते हैं। 15 अगस्त को हमारे महान स्वतंत्रता सेनानियों को श्रधांजलि दी जाती और उनका सम्मान किया जाता है। इस दिन देशभक्ति के गीत और नारे लगाये जाते हैं। वहीं कुछ लोग पतंग उड़ा कर आजादी का पर्व मनाते है।

 

 

 

भारत में हर वर्ष स्वत्रंता दिवस 15 अगस्त को मनाया जाता है। प्रत्येक व्यक्ति के लिए स्वतंत्रता का विशेष महत्व होता इस लिए हर भारतीय के लिए यह दिन बहुत महत्व रखता है। 15 अगस्त 1947 को भारत को अंग्रजों की परीतंत्रता के बाद स्वतंत्रता प्राप्त हुई थी। स्वतंत्रता दिवस को हम राष्ट्रीय त्योहार के रूप में मानते हैं।

 

 

कई वर्षों के विद्रोहों के बाद ही हमने स्वतंत्रता प्राप्त की और 14 और 15 अगस्त 1947 की मध्यरात्रि को भारत एक स्वतंत्र देश बन गया। दिल्ली के लाल किला में पंडित जवाहर लाल नेहरू ने पहली बार भारत के झंडे का अनावरण किया था।

 

उन्होंने मध्यरात्रि के स्ट्रोक पर “ट्रास्ट विस्ट डेस्टिनी” भाषण दिया। पूरे राष्ट्र ने उन्हें अत्यंत खुशी और संतुष्टि के साथ सुना। तब से हर वर्ष स्वतंत्रता दिवस पर, प्रधान मंत्री पुरानी दिल्ली में लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं और जनता को संबोधित करते हैं। इसके साथ ही तिरंगे को 21 तोपों की सलामी भी दी जाती है।

 

 

इस दिन सभी सरकारी दफ्तर, कार्यालयों में तिरंगा फहराया जाता है और राष्ट्रगान “जन-गण-मन” गया जाता है। स्कूल, कालेजो में विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है और मिठाइयां बांटी जाती हैं। मंगल पांडे, सुभाषचंद्र चंद्र बोस, भगतसिंह, रामप्रसाद बिस्मिल, रानी लक्ष्मीबाई, महात्मा गांधी, अशफाक उल्ला खां, चन्द्रशेखर आजाद, सुखदेव, राजगुरु आदि कई स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानियों को याद किया जाता है।

 

 

कुछ भारतीय पतंग उड़ा कर तो कुछ कबूतर उड़ा कर आज़ादी मानते हैं। प्रतिवर्ष स्वतंत्रता दिवस मनाना भारत के स्वतंत्रता के इतिहास को जिंदा रखता है और आजादी का सही मतलब लोगों को समझाता है।

 

स्वातंत्र्ता दिवस 1947 का इतिहास -independence day india- 15 augast 1947 history 

 

यूं तो भारत की आज़ादी का इतिहास बहुत पुराना तो नहीं पर भारत की गुलामी का इतिहास बहुत पुराना रहा है । जो की लगभा 847 साल पुराना माना जाता है जिसमे जिसमे भारत पहले  भारत 517 साल  तक मुग़लो का गुलाम हुआ फिर 250 साल अंग्रेज़ो ने भारत और भारतीयों पर  हुकूमत की । 

 

कब और कैसे हुआ गुलाम -Independence Day india

अँग्रेजों से पहले भारत पर मुगलों का शासन था और उन्होंने अपने राजनीतिक और आर्थिक लाभ के लिए हमारी धरती का उपयोग किया। सन् 1600 में जब अँग्रेजों ने व्यापार के उद्देश्य से भारत में प्रवेश किया था तो मुगल सम्राट को इसका अंदेशा भी नहीं था कि ये अँग्रेज व्यापार के बहाने उन्हें उनके राज्य से बेदखल कर देंगे। व्यापार की आड़ में देश पर अपना अधिकार जमाने की रणनीति धीरे-धीरे कारगर हुई।

जब चालाक मुगल शासक अँग्रेजों की कुटिल रणनीति को नहीं समझ पाए तो भला भोले-भाले लोग उस खतरे को कैसे भाँप पाते कि यह व्यापार उनका सर्वस्व लूटने के लिए किया जा रहा है। अत्याचार और लूट-खसोट का यह सिलसिला दो सदियों तक चला और अंतत: एक लंबी लड़ाई के बाद हमें ब्रिटिश हुकूमत से मुक्ति मिली और भारत आजाद हो गया।

 

 

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1930 में लंदन में भारतीय नेताओं और प्रवक्ताओं का पहला गोलमेज-सम्मेलन आयोजित किया गया। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य साइमन-कमीशन की रिपोर्ट पर विचार करना था।

– 1931 में गाँधीजी दूसरे गोलमेज सम्मेलन में हिस्सा लेने इंग्लैंड पहुँचे।

– नवंबर, 1932 में काँग्रेस तीसरे गोलमेज सम्मेलन में सम्मिलित नहीं हुई। इस सम्मेलन का परिणाम 1935 के भारत सरकार कानून के रूप में सामने आया।

 

पहला सत्याग्रह – चंपारण: Independence Day india
1917 में गाँधीजी के नेतृत्व में सबसे पहले बिहार के चंपारण जिले में सत्याग्रह आंदोलन की शुरुआत हुई। नील की खेती करने वाले किसानों पर हो रहे घोर अत्याचार के विरोध में यह सत्याग्रह शुरू किया गया था।

 

भारत सरकार कानून:Independence Day india
1918 में ब्रिटिश सरकार के भारत मंत्री एडविन मांटेग्यू और वायसराय लॉर्ड चेम्सफोर्ड ने संवैधानिक सुधारों की प्रस्तावना रखी, जिसके आधार पर 1919 का भारत सरकार कानून बनाया गया।

 

रौलेट एक्ट:Independence Day india
मार्च, 1919 में रौलेट एक्ट बना। इस कानून के तहत यह प्रावधान था कि किसी भी भारतीय पर अदालत में मुकदमा चलाया जा सकता है और बिना दंड दिए उसे जेल में बंद किया जा सकता है। इस एक्‍ट के विरोध में देशव्यापी हड़तालें, जूलूस और प्रदर्शन होने लगे। ‍गाँधीजी ने व्यापक हड़ताल का आह्वान किया।

 

जलियाँवाला बाग :Independence Day india
13 अप्रैल को डॉ. सैफुद्दीन किचलू और डॉ. सत्यपाल की गिरफ्तारी के विरोध में जलियाँवाला बाग में लोगों की भीड़ इकट्ठा हुई। अमृतसर में तैनात फौजी कमांडर जनरल डायर ने उस भीड़ पर अंधाधुंध गोलियाँ चलवाईं। हजारों लोग मारे गए। भीड़ में महिलाएँ और बच्‍चे भी थे। यह घटना ब्रिटिश हुकूमत के काले अध्‍यायों में से एक है।

 

 

खिलाफत आंदोलन बदला असहयोग में: Independence Day india
गहरे असंतोष के कारण लोगों ने खिलाफत आंदोलन की शुरूआत की थी। जून, 1920 में इलाहाबाद में एक सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें स्कूलों, कॉलेजों और अदालतों के बहिष्कार की योजना बनी। यह खिलाफत आंदोलन 31 अगस्त, 1920 को असहयोग आंदोलन में बदल गया।

 

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Independence Day india

– 1 अगस्त को स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी नेता लोकमान्य तिलक का निधन हो गया।
– असहयोग आंदोलन चलाने के लिए स्वराज्य कोष की स्थापना की गई, जिसमें 6 महीने के अंदर ही 1 करोड़ रुपए जमा हो गए।

– चौरी-चौरा नामक स्थान पर लगभग 3,000 किसानों के काँग्रेसी जूलूस पर पुलिस ने गोलियाँ बरसाईं।

– दिसंबर में दास और मोतीलाल नेहरू ने मिलकर स्वराज पार्टी की स्थापना की और मोतीलाल को अध्यक्ष बनाया गया।

– जून, 1925 को आजादी की लड़ाई के एक और अग्रणी नेता चित्तरंजन दास का निधन हो गया।

 

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