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डॉ ए. पी. जे. अब्दुल कलाम एक प्रख्यात भारतीय वैज्ञानिक और भारत के 11वें राष्ट्रपति थे। उन्होंने देश के कुछ सबसे महत्वपूर्ण संगठनों (डीआरडीओ और इसरो) में कार्य किया। उन्होंने वर्ष 1998 के पोखरण द्वितीय परमाणु परिक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ कलाम भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम और मिसाइल विकास कार्यक्रम के साथ भी जुड़े थे। इसी कारण उन्हें ‘मिसाइल मैन’ भी कहा जाता है। वर्ष 2002 में कलाम भारत के राष्ट्रपति चुने गए और 5 वर्ष की अवधि की सेवा के बाद, वह शिक्षण, लेखन, और सार्वजनिक सेवा में लौट आए। उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, भारत रत्न सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

 

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डॉ ए. पी. जे. अब्दुल कलाम का जन्म और उपलबधिया dr apj abdul kalam birth and achievements 

dr apj abdul kalam का जन्म: 15 अक्टूबर 1931,मे रामेश्वरम, तमिलनाडु मे हुआ 

मृत्यु: 27 जुलाई, 20 15, शिलोंग, मेघालय मे हुई 

पद/कार्य: भारत के पूर्व राष्ट्रपति

उपलब्धियां: एक वैज्ञानिक और इंजिनियर के तौर पर उन्होंने रक्षा अनुसन्धान और विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर कार्य किया

 

डॉ ए. पी. जे. अब्दुल कलाम एक प्रख्यात भारतीय वैज्ञानिक और भारत के 11वें राष्ट्रपति थे। उन्होंने देश के कुछ सबसे महत्वपूर्ण संगठनों (डीआरडीओ और इसरो) में कार्य किया।

 

उन्होंने वर्ष 1998 के पोखरण द्वितीय परमाणु परिक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ कलाम भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम और मिसाइल विकास कार्यक्रम के साथ भी जुड़े थे।

 

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इसी कारण उन्हें ‘मिसाइल मैन’ भी कहा जाता है। वर्ष 2002 में कलाम भारत के राष्ट्रपति चुने गए और 5 वर्ष की अवधि की सेवा के बाद, वह शिक्षण, लेखन, और सार्वजनिक सेवा में लौट आए। उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, भारत रत्न सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया।

 

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dr apj abdul kalam प्रारंभिक जीवन

अवुल पकिर जैनुलअबिदीन अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में एक मुसलमान परिवार मैं हुआ। उनके पिता जैनुलअबिदीन एक नाविक थे और उनकी माता अशिअम्मा एक गृहणी थीं। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थे इसलिए उन्हें छोटी उम्र से ही काम करना पड़ा।

 

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अपने पिता की आर्थिक मदद के लिए बालक कलाम स्कूल के बाद समाचार पत्र वितरण का कार्य करते थे। अपने स्कूल के दिनों में कलाम पढाई-लिखाई में सामान्य थे पर नयी चीज़ सीखने के लिए हमेशा तत्पर और तैयार रहते थे। उनके अन्दर सीखने की भूख थी और वो पढाई पर घंटो ध्यान देते थे।

 

 

उन्होंने अपनी स्कूल की पढाई रामनाथपुरम स्च्वार्त्ज़ मैट्रिकुलेशन स्कूल से पूरी की और उसके बाद तिरूचिरापल्ली के सेंट जोसेफ्स कॉलेज में दाखिला लिया, जहाँ से उन्होंने सन 1954 में भौतिक विज्ञान में स्नातक किया। उसके बाद वर्ष

 

 

1955 में वो मद्रास चले गए जहाँ से उन्होंने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग की शिक्षा ग्रहण की। वर्ष 1960 में कलाम ने मद्रास इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग की पढाई पूरी की।

 

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dr apj abdul kalam Carrier का  कैरियर 

मद्रास इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग की पढाई पूरी करने के बाद कलाम ने रक्षा अनुसन्धान और विकास संगठन (डीआरडीओ) में वैज्ञानिक के तौर पर भर्ती हुए। कलाम ने अपने कैरियर की शुरुआत भारतीय सेना के लिए एक छोटे हेलीकाप्टर का डिजाईन बना कर किया।

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डीआरडीओ में कलाम को उनके काम से संतुष्टि नहीं मिल रही थी। कलाम पंडित जवाहर लाल नेहरु द्वारा गठित ‘इंडियन नेशनल कमेटी फॉर स्पेस रिसर्च’ के सदस्य भी थे। इस दौरान उन्हें प्रसिद्ध अंतरिक्ष वैज्ञानिक विक्रम साराभाई के साथ कार्य करने का अवसर मिला।

 

वर्ष 1969 में उनका स्थानांतरण भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में हुआ। यहाँ वो भारत के सॅटॅलाइट लांच व्हीकल परियोजना के निदेशक के तौर पर नियुक्त किये गए थे। इसी परियोजना की सफलता के परिणामस्वरूप भारत का प्रथम उपग्रह ‘रोहिणी’ पृथ्वी की कक्षा में वर्ष 1980 में स्थापित किया गया। इसरो में शामिल होना कलाम के कैरियर का सबसे अहम मोड़ था और जब उन्होंने सॅटॅलाइट लांच व्हीकल परियोजना पर कार्य आरम्भ किया तब उन्हें लगा जैसे वो वही कार्य कर रहे हैं जिसमे उनका मन लगता है।

 

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1963-64 के दौरान उन्होंने अमेरिका के अन्तरिक्ष संगठन नासा की भी यात्रा की। परमाणु वैज्ञानिक राजा रमन्ना, जिनके देख-रेख में भारत ने पहला परमाणु परिक्षण किया, ने कलाम को वर्ष 1974 में पोखरण में परमाणु परिक्षण देखने के लिए भी बुलाया था।

 

 

सत्तर और अस्सी के दशक में अपने कार्यों और सफलताओं से डॉ कलाम भारत में बहुत प्रसिद्द हो गए और देश के सबसे बड़े वैज्ञानिकों में उनका नाम गिना जाने लगा। उनकी ख्याति इतनी बढ़ गयी थी की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने अपने कैबिनेट के मंजूरी के बिना ही उन्हें कुछ गुप्त परियोजनाओं पर कार्य करने की अनुमति दी थी।

 

 

भारत सरकार ने महत्वाकांक्षी ‘इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम’ का प्रारम्भ डॉ कलाम के देख-रेख में किया। वह इस परियोजना के मुख कार्यकारी थे। इस परियोजना ने देश को अग्नि और पृथ्वी जैसी मिसाइलें दी है।

 

 

जुलाई 1992 से लेकर दिसम्बर 1999 तक डॉ कलाम प्रधानमंत्री के वैज्ञानिक सलाहकार और रक्षा अनुसन्धान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के सचिव थे। भारत ने अपना दूसरा परमाणु परिक्षण इसी दौरान किया था। उन्होंने इसमें एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

 

आर. चिदंबरम के साथ डॉ कलाम इस परियोजना के समन्वयक थे। इस दौरान मिले मीडिया कवरेज ने उन्हें देश का सबसे बड़ा परमाणु वैज्ञानिक बना दिया।वर्ष 1998 में डॉ कलाम ने ह्रदय चिकित्सक सोमा राजू के साथ मिलकर एक कम कीमत का ‘कोरोनरी स्टेंट’ का विकास किया। इसे ‘कलाम-राजू स्टेंट’ का नाम दिया गया।

 

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dr apj abdul kalam भारत के राष्ट्रपति

एक रक्षा वैज्ञानिक के तौर पर उनकी उपलब्धियों और प्रसिद्धि के मद्देनज़र एन. डी. ए. की गठबंधन सरकार ने उन्हें वर्ष 2002 में राष्ट्रपति पद का उमीदवार बनाया। उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी लक्ष्मी सहगल को भारी अंतर से पराजित किया और 25 जुलाई 2002 को भारत के 11वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ लिया।

 

 

डॉ कलाम देश के ऐसे तीसरे राष्ट्रपति थे जिन्हें राष्ट्रपति बनने से पहले ही भारत रत्न ने नवाजा जा चुका था। इससे पहले डॉ राधाकृष्णन और डॉ जाकिर हुसैन को राष्ट्रपति बनने से पहले ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया जा चुका था।

 

उनके कार्यकाल के दौरान उन्हें ‘जनता का राष्ट्रपति’ कहा गया। अपने कार्यकाल की समाप्ति पर उन्होंने दूसरे कार्यकाल की भी इच्छा जताई पर राजनैतिक पार्टियों में एक राय की कमी होने के कारण उन्होंने ये विचार त्याग दिया।

 

12वें राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के कार्यकाल के समाप्ति के समय एक बार फिर उनका नाम अगले संभावित राष्ट्रपति के रूप में चर्चा में था परन्तु आम सहमति नहीं होने के कारण उन्होंने अपनी उमीद्वारी का विचार त्याग दिया।

 

 

dr apj abdul kalam राष्ट्रपति पद से सेवामुक्त होने के बाद का समय-

राष्ट्रपति पद से सेवामुक्त होने के बाद डॉ कलाम शिक्षण, लेखन, मार्गदर्शन और शोध जैसे कार्यों में व्यस्त रहे और भारतीय प्रबंधन संस्थान, शिल्लोंग, भारतीय प्रबंधन संस्थान, अहमदाबाद, भारतीय प्रबंधन संस्थान, इंदौर, जैसे संस्थानों से विजिटिंग प्रोफेसर के तौर पर जुड़े रहे।

 

इसके अलावा वह भारतीय विज्ञान संस्थान बैंगलोर के फेलो, इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ स्पेस साइंस एंड टेक्नोलॉजी, थिरुवनन्थपुरम, के चांसलर, अन्ना यूनिवर्सिटी, चेन्नई, में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के प्रोफेसर भी रहे।

उन्होंने आई. आई. आई. टी. हैदराबाद, बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी और अन्ना यूनिवर्सिटी में सूचना प्रौद्योगिकी भी पढाया था।

 

कलाम हमेशा से देश के युवाओं और उनके भविष्य को बेहतर बनाने के बारे में बातें करते थे। इसी सम्बन्ध में उन्होंने देश के युवाओं के लिए “व्हाट कैन आई गिव’ पहल की शुरुआत भी की जिसका उद्देश्य भ्रष्टाचार का सफाया है। देश के युवाओं में उनकी लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें 2 बार (2003 & 2004) ‘एम.टी.वी. यूथ आइकॉन ऑफ़ द इयर अवार्ड’ के लिए मनोनित भी किया गया था।

 

वर्ष 2011 में प्रदर्शित हुई हिंदी फिल्म ‘आई ऍम कलाम’ उनके जीवन से प्रभावित है।

शिक्षण के अलावा डॉ कलाम ने कई पुस्तकें भी लिखी जिनमे प्रमुख हैं – ‘इंडिया 2020: अ विज़न फॉर द न्यू मिलेनियम’, ‘विंग्स ऑफ़ फायर: ऐन ऑटोबायोग्राफी’, ‘इग्नाइटेड माइंडस: अनलीशिंग द पॉवर विदिन इंडिया’, ‘मिशन इंडिया’, ‘इंडोमिटेबल स्पिरिट’ आदि।

 

 

dr apj abdul kalam ke पुरस्कार और सम्मान

देश और समाज के लिए किये गए उनके कार्यों के लिए, डॉ कलाम को अनेकों पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। लगभग 40 विश्वविद्यालयों ने उन्हें मानद डॉक्टरेट की उपाधि दी और भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण, पद्म विभूषण और भारत के सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से अलंकृत किया।

मृत्यु: 27 जुलाई 2015 को भारतीय प्रबंधन संस्थान, शिल्लोंग, में अध्यापन कार्य के दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ा जिसके बाद करोड़ों लोगों के प्रिय और चहेते डॉ अब्दुल कलाम परलोक सिधार गए।

 

 

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dr apj abdul kalamडॉ एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन से जुडी 10 ऐसी अद्भुत कहानियाँ, जो हमको एक नई सीख देती है !

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डॉ एपीजे अब्दुल कलाम (APJ Abdul Kalam) का भारत के अंतरिक्ष और रक्षा विभाग के लिए किए गए योगदान को, किसी भी विश्लेषण द्वारा समझाया नहीं जा सकता। इनके इस अतुलनीय योगदान के कारण ही इन्हें मिसाइल मैन (Missile Man of India) के नाम से भी जाना जाता है। विज्ञान की दुनिया में चमत्कारिक प्रदर्शन के कारण ही डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के लिए राष्ट्रपति भवन के द्वार स्वत: ही खुल गए थे।

 

 

 

इनकी जीवन गाथा किसी रोचक उपन्यास के नायक की कहानी से कम नहीं है। चमत्कारिक प्रतिभा के धनी डॉ अब्दुल कलाम का व्यक्तित्व इतना उन्नत है कि इन्होंने सभी धर्म, जाति एवं सम्प्रदायों के व्यक्तियों का दिल जीत लिया है। यह एक ऐसे भारतीय हैं जो सभी के लिए ‘एक महान आदर्श’ हैं।

 

आज हम आपको डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन से जुडी ऐसी कहानियाँ बताने जा रहे हैं, जिनको पढ़ने के बाद निश्चित ही आपके दिल में डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के लिए सम्मान और बढ़ जाएगा।

 

 

Story1: Abdul Kalam – “Humanity”

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने इमारत की दीवार पर टूटे हुए शीशों के टुकड़े लगाने के सुझाव को ठुकरा दिया था। क्योकि इससे दीवार पर बैठने वाले पक्षियों को चोट लग सकती थी.

यह बात उस समय की है, जब डॉ एपीजे अब्दुल कलाम डिफेन्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाईजेशन (DRDO) में काम कर रहे थे। तब भवन की सुरक्षा के लिए उनके साथ काम कर रहे अन्य लोगों ने इमारत की दीवार पर टूटे हुए

 

शीशों के टुकड़े लगाने के बारे में सुझाव दिया। लेकिन जब यह बात डॉ एपीजे अब्दुल कलाम को पता चली, तब उन्होंने ऐसा करने से सबको रोक। क्योकि ऐसा करने से, उस दीवार पर बैठने वाले पक्षी घायल हो सकते थे

 

 

 

Story2 : Abdul Kalam – “Leadership”

इस घोषणा के तुरंत बाद कि डॉ कलाम देश के अगले राष्ट्रपति हो सकते हैं, वह एक स्कूल में भाषण देने गए। वहाँ बिजली कट जाने के कारण, उन्होंने कैसे स्थिति को नियंत्रित किया।

 

उस समय स्कूल में, लगभग 400 विद्यार्थी डॉ कलाम का भाषण सुनने आये थे, लेकिन तभी वहां बिजली चली गयी। लेकिन डॉ कलाम ने अपना भाषण नहीं रोका, वह भीड़ के बीच में चले गए और अपनी बुलंद आवाज में वहीं से अपना भाषण पूरा किया।

 

 

Story3: Abdul Kalam – “Humbleness”

एक बार, जब कुछ युवाओं और किशोरों ने, राष्ट्रपति कलाम से मिलने का अनुरोध किया, तब राष्ट्रपति ने न केवल उन्हें अपना कीमती समय दिया, बल्कि उनके विचारों को गौर से सुना भी!

 

एक बार जब राष्ट्रपति कार्यालय में, कुछ युवाओं ने देश के प्रथम नागरिक राष्ट्रपति कलाम से मिलने का अनुरोध किया। तब डॉ कलाम, न केवल उन बच्चों से राष्ट्रपति भवन के अपने निजी कक्ष में मिले, बल्कि उन्हें अपना कीमती समय भी दिया और साथ ही उनके विचारों को ध्यान से सुना भी। इसके बाद उन्होंने, बच्चों को विस्तार से जानकारी भी दी।

 

 

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Story4: Abdul Kalam – “Charity”

राष्टपति कलाम ने अपने जीवन भर की बचत और वेतन, एक संस्था PURA (जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में शहरी सुविधाएं उपलब्ध कराना है) को दे दिया।

 

भारत सरकार, वर्तमान राष्ट्रपति के साथ-साथ सभी पूर्व राष्ट्रपति का ख्याल रखती है। इसलिए जब डॉ एपीजे अब्दुल कलाम, राष्ट्रपति बने तो उन्होंने अपने जीवनभर की कमाई, PURA नामक संस्था को दे दिया।

 

डॉ कलाम ने डॉ वर्गीज कुरियन (अमूल के संस्थापक) को फोन किया और यह पूछा कि अब मैं इस देश का राष्ट्रपति हूँ और भारत सरकार, मेरे जीवित रहने तक, मेरा ख्याल रखेगी, इसलिए मैं इस बचत और वेतन का क्या करूँगा?

 

 

 

Story5: Abdul Kalam – “Gratitude”

राष्ट्रपति कलाम ने, खुद अपने से धन्यवाद कार्ड लिखा!

एक बार एक व्यक्ति ने डॉ एपीजे अब्दुल कलाम का स्कैच बना कर उन्हें भेजा। उन्हें यह जान कर बहुत आश्चर्य हुआ कि डॉ कलाम ने खुद अपने हाथों से उनके लिए एक संदेश और अपना हस्ताक्षर करके एक थैंक यू कार्ड भेजा है।

 

 

 

Story6: Abdul Kalam – “Love”

डॉ कलाम का बच्चों के प्रति प्यार एक बार डॉ कलाम, आईआईएम अहमदाबाद गए थे। समाहरोह के बाद, उन्होंने 60 बच्चों के साथ खाना खाया। लंच ख़त्म होने के बाद, बच्चें उनके साथ एक फोटो खिचवाना चाहते थे। लेकिन कार्यक्रम के आयोजको ने, बच्चों को ऐसा करने से रोका। डॉ कलाम, खुद आगे बढ़कर बच्चों के साथ फोटो खिचवाई, यह देखकर सभी को बहुत आश्चर्य हुआ।

 

 

Story7: Abdul Kalam – “Values”
एक बार डॉ कलाम ने एक कुर्सी पर बैठने से मना कर दिया।

आईआईटी वाराणसी के दीक्षांत समारोह में, डॉ कलाम को मुख्य अथिति के रूप में बुलाया गया। स्टेज पर 5 कुर्सियां रखी थी। बीच वाली कुर्सी, डॉ कलाम की थी और बाकि चार विश्वविद्यालय के शीर्ष अधिकारियों के लिए। डॉ कलाम ने

 

यह देखा कि उनकी कुर्सी, अन्य की तुलना में थोड़ी ऊची थी। तब उन्होंने इस पर बैठने से मना कर दिया और उस पर विश्वविद्यालय के कुलपति को बैठने के लिए अनुरोध किया।

 

 

Story8: Abdul Kalam – “Love”
डॉ कलाम का बच्चों के प्रति प्यार

जब डॉ कलाम डीआरडीओ में काम कर रहे थे, तब एक बार उनके नीचे काम कर रहे एक वैज्ञानिक ने, अपने बच्चों को प्रदर्शनी ले जाने का वादा किया। लेकिन काम के दबाव के कारण, वह बच्चें को प्रदर्शनी में नहीं ले जा सका। जब यह बात, डॉ कलाम को पता चली तो उन्हें बहुत हैरानी हुई और वह खुद उस वैज्ञानिक के बच्चों को प्रदर्शनी में लेकर गए।

 

 

 

Story 9: Abdul Kalam – “Common Man”

राष्ट्रपति कलाम ने राष्ट्रपति बनने के बाद केरल की अपनी पहली यात्रा के दौरान केरल राजभवन में किसे “राष्ट्रपति मेहमान ‘ के रूप में आमंत्रित किया?

सड़क के किनारे बैठने वाला मोची
छोटे से होटल के मालिक
यह कोई मजाक नहीं है। डॉ कलाम ने ऐसा किया था।

 

 

 

Story 10: Abdul Kalam – “The Missile Man Of India”
यह उनकी, भारत के अंतरिक्ष और रक्षा विभाग में योगदान की सबसे महत्वपूर्ण कहानी है।

डॉ कलाम, उन कुछ वैज्ञानिकों में से एक हैं जिन्होंने बहुत पहले ही इसरो के साथ काम करना शुरू कर दिया था। 1970 और 1980 के दशक में कोई बुनयादी सुविधा न होने के कारण रॉकेट के भागों और पूरे उपग्रहों को ले जाने के लिए, साइकिल और बैल गाड़ियों का इस्तेमाल किया जाता था और डॉ कलाम ऐसे समय में देश के लिए अंतरिक्ष विज्ञान में महत्वपूर्ण योगदान देकर देश को विश्व के अग्रणी देशों में ला खड़ा किया।

 

 

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अब्दुल कलाम के 10 अनमोल विचार (Abdul kalam quotes in hindi)

1. सपने तभी सच होते हैं, जब हम सपने देखना शुरू करते हैं.

 

2. सबके जीवन में दुख आते हैं, बस इन दुखों में सबके धैर्य की परीक्षा ली जाती है.

 

3. जीवन में सुख का अनुभव तभी प्राप्त होता है जब इन सुखों को कठिनाईओं से प्राप्त किया जाता है.

 

4. शिखर तक पहुंचने के लिए ताकत चाहिए होती है, चाहे वह माउन्ट एवरेस्ट का शिखर हो या कोई दूसरा लक्ष्य.

 

5. अगर हम अपने सफलता के रास्ते पर निराशा हाथ लगती है इसका मतलब यह नहीं है कि हम कोशिश करना छोड़

दें, हर निराशा और असफलता के पीछे ही सफलता छिपी होती है.

 

6. सपने वो नहीं होते जो आप सोने के बाद देखते हैं, सपने वो होते हैं जो आपको सोने नहीं देते.

 

7. ‘शिखर तक पहुंचने के लिए ताकत चाहिए होती है, चाहे वह माउंट एवरेस्ट का शिखर हो या कोई दूसरा लक्ष्य.

 

8. देश का सबसे अच्छा दिमाग क्लासरूम के आखिरी बेंचों पर मिल सकता है.

 

9. छात्रों को प्रश्न जरूर पूछना चाहिए. यह छात्र का सर्वोत्तम गुण है.

 

टिप्पणियां

10. अगर एक देश को भ्रष्टाचार मुक्त होना है तो मैं यह महसूस करता हूं कि हमारे समाज में 3 ऐसे लोग हैं, जो ऐसा कर सकते हैं. ये हैं माता,पिता और शिक्षक.

 

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मुश्किलों का सामना – with positive thinking

वो कौन  से इंसान है ! जिनकी life मे मुश्किले (problems) दस्तक नही देती । हर इंसान की life छोटी बड़ी मुश्किलों (problems) से भरी होती है ,मुश्किले (problems) हर इंसान की life मे आती है -हर सेकंड ,हर मिनट ,हर घंटे , किसी भी time ,  पर जब भी आए आप पहले से ही इन मुश्किलों का सामना करने के लिए हमेशा खुद को तैयार रखो यह सोच कर की! मैं तो पैदा ही मुश्किलों का सामना करने के लिए हुआ हू । सिर्फ इतना सोचने से ही आपकी आधी मुश्किल वही खतम हो जाती है । दोस्तो हमेशा स्करात्मक (positive) सोचो ,कभी भी negativity  को अपने दिमाग पर हावी न होने दे ।

 

 

सकारात्मक सोच (positive thinking) जीत और हार (failure)

जीत और हार success and un-success मे सिर्फ एक कदम का फासला होता है वो कदम है हमारी सोच, जी हा दोस्तो एक नकारात्मक सोच (negative think) जहा आपको हार (failure) के  बहुत करीब ल देती है ,वही दूसरी ओर एक सकारात्मक सोच (positive think) आपको जीत के सिंघासन पर बैठा देती है। कभी भी negativity को अपने दिमाग पर हावी न होने दे ।

 

दोस्तो इस कहानी (motivational story) से आपको क्या सीख मिलती है और यह आर्टिकल आपको कैसा लगा ? ? नीचे कमेंट करके जरूरु बताना। और इस जानकारी (article) को जादा से जादा लोगो तक शेर करे ताकि उन तक भी यह  पहुच सके।

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