Raksha bandhan | shayari | history | शुभ मुहूरत 2019

Raksha bandhan shayari history 

रक्षा बंधन शायरी और इसका इतिहास 


रक्षाबंधन Raksha bandhan हिन्दुओं का प्रमुख पर्व है। यह त्योहार भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है।

 

इस दिन बहने अपने भाइयों की कलाई पर राखी बाँधती हैं 

इस दिन बहन सुबह ही स्नान कर तैयार हो जाती है ।

 

इसके बाद वह थाली में आरती का सामान सजाकर भाई की आरती उतारती है और भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसके दाहिने हाथ की कलाई पर राखी बांध देती है ।

 

साथ ही भाई का मुंह मिठाईयों से भर देती है और अपने भाई की लंबी आयु की कामना करती हैं।

 

वही  भाई  भी अपनी बहन को उसकी रक्षा का वचन देता है। और बहन को  प्रेम स्वरूप सुंदर भेट प्रदान करता है । 


 

कब है रक्षा बंधन – kab Raksha bandhan 2019

राखी का त्‍योहार इस बार 15 अगस्‍त, यानी स्वतंत्रता दिवस के दिन होगा. इस दिन गुरुवार पड़ रहा है.

 

 

 

रक्षा बंधन शुभ मुहूरत – Raksha bandhan  shubh muhoorat-2019

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20019 रक्षा बंधन के दिन राखी बांधने का मुहूर्त – सुबह 05:49 से शाम 6:01

 

 

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रक्षा बंधन मंत्र – राखी बांधते समय इस मंत्र का जप 4 से 5 बार करे –

‘येन बद्धो बलि राजा,दानवेन्द्रो महाबल: तेन त्वाम् प्रतिबद्धनामि रक्षे माचल माचल:’
राखी का यह छोटा सा मंत्र है जिसे चार से पांच बार पढ़कर आप याद कर सकते हैं।

 

इसी मंत्र को पुरोहित यजमान को राखी बांधते हुए बोलते हैं। कलावा बांधते समय भी पुरोहितजी यही मंत्र बोलते हैं।

 

 

 

क्या है राखी के इस मंत्र का मतलब

राखी के इस मंत्र का मतलब है- जिस रक्षासूत्र से महान शक्तिशाली दानवेन्द्र राजा बलि को बांधा गया था, उसी रक्षाबंधन से मैं तुम्हें बांधता हूं, जो तुम्हारी रक्षा करेगा। हे रक्षे .. (रक्षासूत्र) तुम , चलायमान न हो।

 

धर्मशास्त्र के विद्वानों के अनुसार इसका अर्थ यह है कि रक्षासूत्र बांधते समय ब्राह्मण या पुरोहत अपने यजमान को कहता है किजिस रक्षासूत्र से दानवों के महापराक्रमी राजा बलि धर्म के बंधन में बांधे गए थे.

अर्थात् धर्म में प्रयुक्त किए गये थे, उसी सूत्र से मैं तुम्हें बांधता हूं, यानी धर्म के लिए प्रतिबद्ध करता हूं। इसके बाद पुरोहित रक्षासूत्र से कहता है कि हे रक्षे तुम स्थिर रहना, स्थिर रहना।

 

इस प्रकार रक्षा सूत्र का उद्देश्य ब्राह्मणों द्वारा अपने यजमानों को धर्म के लिए प्रेरित एवं प्रयुक्त करना है। बहनें भी इसी मंत्र से भाइयों को बहनों की रक्षा के धर्म में बांधती हैं।

 

 

ऐसे मनाए रखशा बंधन – रक्षा बंधन   मनाने का सही तरीका – राखी बांधने का सही तरीका –

– प्रातः उठकर स्नान-ध्यान करके उज्ज्वल तथा शुद्ध वस्त्र धारण करें।

– घर को साफ करके, चावल के आटे का चौक पूरकर मिट्टी के छोटे से घड़े की स्थापना करें।

– चावल, कच्चे सूत का कपड़ा, सरसों, रोली को एक साथ मिलाएं। फिर पूजा की थाली तैयार कर दीप जलाएं। उसमें मिठाई रखें।

– इसके बाद भाई को पीढ़े पर बिठाएं (पीढ़ा यदि आम की लकड़ी का हो तो सर्वश्रेष्ठ माना जाता है)।

– भाई को पूर्वाभिमुख, पूर्व दिशा की ओर बिठाएं। बहन का मुंह पश्चिम दिशा की ओर होना चाहिए।

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– इसके बाद भाई के माथे पर टीका लगाकर दाहिने हाथ पर रक्षा सूत्र बांधे।

– शास्त्रों के अनुसार रक्षा सूत्र बांधे जाते समय निम्न मंत्र का जाप करने से अधिक फल मिलता है

 

 

 

राखी बांधते समय इन  बातों का रखे खास ध्यान –

राखी बांधते समय भाई का मुह पूर्व दिशा  की तरफ होना चाहिए |

राखी नहा धो कर साफ सुथरे सफ़ेद पीले वस्त्र पहन कर बंधवानी चाहिए |

राखी बांधते समय ऊपर बाते गए मंत्र का जप ज़रूर करना चाहिए |

 

 

 

 

रक्षा बंधन का इतिहास – history of Raksha bandhan –

रक्षाबंधन का इतिहास हिंदू पुराण कथाओं में बताया गया है  है। वामनावतार नामक एक पौराणिक कथा में रक्षाबंधन का प्रसंग मिलता है। वह इस त्योहार से सबंधित कथा इस प्रकार है-

 

राजा बलि ने जब यज्ञ संपन्न कर स्वर्ग पर अधिकार करने  का प्रयत्‍‌न किया, तो देवराज इंद्र ने भगवान विष्णु से प्रार्थना की। की प्रभु इससे हमारी रक्षा करे ।

 

तब भगवान विष्णु जी एक वामन ब्राह्मण का अवतार धारण कर  राजा बलि से भिक्षा मांगने पहुंच गए।

पर राजा बाली के गुरु(गुरु शुक्राचार्य) भगवान की इस माया को जन गाय थे  इसीलिए गुरु जी ने बलि को दान देने से माना कर दिया की रुको दान न दो  पर मना  करने पर भी बलि ने तीन पग भूमि दान कर दी थी। क्योकि वामन भगवान की इस माया से अंजान था । 

 

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इस प्रकार भगवान ने तीन पग में आकाश-पाताल और धरती नाप कर राजा बलि को रसातल में भेज दिया।

 

उसने अपनी भक्ति के बल पर विष्णु जी से हर समय अपने सामने रहने का वचन ले लिया। लक्ष्मी जी इससे चिंतित हो गई।

 

नारद जी की सलाह पर लक्ष्मी जी बलि के पास गई और रक्षासूत्र बांधकर उसे अपना भाई बना लिया।

 

बदले में वे विष्णु जी को अपने साथ ले आई। उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि थी। वो भी रक्षा बंधन के त्योहार का प्रतीक माना गया ।

 

 

 

इतिहास में राखी के महत्व के अनेक उल्लेख मिलते हैं। मेवाड़ की महारानी कर्मावती ने मुगल राजा हुमायूं को राखी भेज कर रक्षा-याचना की थी। हुमायूं ने मुसलमान होते हुए भी राखी की लाज रखी।

 

कहते हैं, सिकंदर की पत्‍‌नी ने अपने पति के हिंदू शत्रु पुरु को राखी बांधकर उसे अपना भाई बनाया था और युद्ध के समय सिकंदर को न मारने का वचन लिया था।

 

पुरु ने युद्ध के दौरान हाथ में बंधी राखी का और अपनी बहन को दिए हुए वचन का सम्मान करते हुए सिकंदर को जीवनदान दिया था।

 

महाभारत में रक्षा बंधन का उल्लेख – Raksha bandhan

महाभारत में भी रक्षाबंधन के पर्व का उल्लेख है। जब युधिष्ठिर ने भगवान कृष्ण से पूछा कि मैं सभी संकटों को कैसे पार कर सकता हूं, तब कृष्ण ने उनकी तथा उनकी सेना की रक्षा के लिए राखी का त्योहार मनाने की सलाह दी थी।

 

क्यो की उसमे बहने अपने भाई की रक्षा की प्रार्थना करती है ।

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शिशुपाल का वध करते समय कृष्ण की तर्जनी में चोट आ गई, तो द्रौपदी ने लहू रोकने के लिए अपनी साड़ी फाड़कर चीर उनकी उंगली पर बांध दी थी।

 

यह भी श्रावण मास की पूर्णिमा का दिन था। कृष्ण ने चीरहरण के समय उनकी लाज बचाकर यह कर्ज चुकाया था।

 

रक्षा बंधन के पर्व में परस्पर एक-दूसरे की रक्षा और सहयोग की भावना निहित है। एस प्रकार से पुराने काल से इस त्योहार का संबंध है ।

 

 

Raksha bandhan- रक्षाबंधन पर निबंध | Raksha Bandhan Hindi Essay |

रक्षाबंधन Raksha bandhan हिन्दुओं का प्रमुख पर्व है। यह त्योहार भाई-बहन के पवित्र प्रेम का प्रतीक है।

 

इस दिन बहने अपने भाइयों की कलाई पर राखी बाँधती हैं और अपने भाई की लंबी आयु की कामना करती हैं।

 

वही  भाई  भी अपनी बहन को उसकी रक्षा का वचन देता है। और बहन को  प्रेम स्वरूप सुंदर भेट प्रदान करता है । 

 

यह राखी का त्योहार संपूर्ण भारतवर्ष में  बल्कि अब विदेसों  माय भी मनाया जाता है।

 

हम यह पर्व सदियों से मनाते चले आ रहे हैं। रक्षा बंधन Raksha bandhan का हिन्दू धर्म की पौराणिक कथाओ मे भी कई बार उल्लेख है । 

 

Raksha bandhan की  इतिहासघंटनाओ पर आधारित   कई  भी कहानिया मिलती है ।

 

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आजकल इस त्योहार पर बहनें अपने भाई के घर राखी और मिठाइयाँ ले जाती हैं।

 

भाई राखी बाँधने के पश्चात् अपनी बहन को दक्षिणा स्वरूप रुपए देते हैं या कुछ उपहार देते हैं। इस प्रकार आदान-प्रदान से भाई-बहन के मध्य प्यार और प्रगाढ़ होता है।

 

 

सन् 1535 में जब मेवाड़ की रानी कर्णावती पर बहादुर शाह ने आक्रमण कर दिया,

तो उसने अपने राज्य की रक्षा के लिए मुगल बादशाह हुमायूँ को राखी भेजकर मदद की गुहार की थी।

 

क्योंकि रानी कर्णावती स्वयं एक वीर योद्धा थीं इसलिए बहादुर शाह का सामना करने के लिए वह स्वयं युद्ध के मैदान में कूद पड़ी थीं, परंतु हुमायूँ का साथ भी उन्हें सफलता नहीं दिला सका।

 

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राखी का त्यौहार रक्षाबंधनइस दिन सभी नए-नए कपड़े पहनते हैं। सभी का मन हर्ष और उल्लास से भरा होता है।

 

बहनें अपने भाइयों के लिए। खरीदारी करती हैं, तो भाई अपनी बहनों के लिए साड़ी आदि खरीदते हैं और उन्हें देते हैं। यह खुशियों का त्योहार है।

 

 

हमारे हिन्दू समाज में वो लोग इस त्योहार को नहीं मनाते, जिनके परिवार में से रक्षाबंधन वाले दिन कोई पुरुष-भाई, पिता, बेटा, चाचा, ताऊ, भतीजा-मर जाता है।

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इस पुण्य पर्व पर किसी पुरुष के निधन से यह त्योहार खोटा हो जाता है। फिर यह त्योहार पुनः तब मनाया जाता है जब रक्षाबंधन के ही दिन कुटुंब या परिवार में किसी को पुत्र की प्राप्ति हो।

 

 

हमारे हिन्दू समाज में ऐसी कई परंपराएँ हैं, जो सदियों से चली आ रही हैं।

 

उन्हें समाज आज भी मानता है। यही परंपराएँ हमारी संस्कृति भी कहलाती हैं। परंतु कई परंपराएँ, जैसे—बाल विवाह, नर-बलि, सती प्रथा-आदि को कुरीति मानकर हमने अपने जीवन और समाज से निकाल दिया है; परंतु जो परंपराएँ हितकारी हैं, उन्हें हम आज भी मान रहे हैं।Raksha bandhan

अत: रक्षाबंधन का त्योहार एक ऐसी परंपरा है, जो हमें आपस में | जोड़ती है इसलिए इसे आज भी सब धूमधाम और पूरे उल्लास के साथ मनाते हैं।Raksha bandhan

 

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