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Hindi essay on choti diwali | छोटी दीवाली पर निबंध

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका आज एक और खूबसूरत निबंध मे जिसका नाम है hindi essay on choti diwali.

Choti diwali के इस निबंध मे आज हम बहुत सी जरुरी बातें जानेंगे.

 

Dhanteras

 

छोटी दिवाली पर निबंध | hindi essay on choti diwali

दीवाली के पंच महापरवो मे से छोटी दीवाली का भी हिन्दू धर्म मे बहुत महत्व है.

छोटी दिवाली धनतेरस के अगले दिन यानी बड़ी दीवाली से एक दिन पहले मनाई जाती है. इस दिन लोग मृत्यु के देवता यम की पूजा कर अकाल मृत्यु से छुटकारा पाते है और साथ इस दिन कोई भी काम की शुरुआत नए सिरे से करना बहुत ही शुभ मांगलकारी माना गया है.

 

Choti diwali क्यों मनाई जाती है इस दिन की क्या महत्ता है

 

छोटी दिवाली को यम दिवस के रूप मे मनाया जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन एक समय यमराज ने अपने दूतों से पूछा कि क्या कभी तुम्हें प्राणियों के प्राण हरण करते समय किसी पर दया आई है?

 

तो उन्‍होंने संकोचवश ना कहा. यमराज के दोबारा पूछने पर दूतों ने कहा, एक बार ऐसी घटना घटी थी, जिससे हमारा हृदय कांप उठा था.

 

राजा हेम की पत्‍नी ने पुत्र को जन्म दिया था तो ज्योतिषियों ने बताया कि बालक की शादी के चार दिन बाद मृत्‍यु हो जाएगी. इस पर राजा ने बेटे को ब्रह्मचारी के रूप में रखकर बड़ा किया.

 

 एक दिन महाराजा हंस की बेटी भ्रमण कर रही थी तो ब्रह्मचारी युवक उस पर मोह‍ित हो गया और गंधर्व विवाह कर लिया. उसके ठीक चौथे दिन बाद राजकुमार की मौत हो गई.

 

पति की मौत पर पत्नी बिलखने लगी. उसके करुण विलाप से दूतों का हृदय भी कांप उठा. 

 

दूतों ने यमराज को आगे बताया, राजकुमार के प्राण हरते समय हमारे आंसू भी नहीं रुक रहे थे.

 

इस बीच एक यमदूत ने यमराज से पूछा, क्या अकाल मृत्यु से बचने का कोई उपाय नहीं है?

 

तो यमराज ने कहा, अकाल मृत्यु से छुटकारा पाने के लिए व्यक्ति को धनतेरस के दिन पूजन और विधिपूर्वक दीपदान करना चाहिए.

 

जिस जगह यह पूजा होती है, वहां अकाल मृत्यु का भय नहीं सताता. बताया जाता है कि उसी के बाद से धनतेरस के दिन यमराज को दीपदान की परंपरा शुरू हुई

 

इस दिन संध्या के समय मृत्यु के देवता यमराज को दक्षिण दिशा की ओर घी या तेल का दीपक जगा कर रखने से अकाल मृत्यु टल जाती है या घर परिवार मे एवं परिवार के लोगों के ऊपर आने वाली कोई बड़ी दुर्घटना टल जाती है. इसे यान दीप दान के नाम से जाना जाता है. जो दिया जगाया जाता है उसे यम का दीपक कहा जाता है.

 

कैसे करें यम दीप दान.

यम का दीपक धनतेरस की शाम को और छोटी दीवाली की शाम को जगा कर रखा जाता है.

 

यह दीपक शाम के समय , घर की छत या बालकनी पर दक्षिण दिशा की ओर जगाया जाता है दिया जगाते वक़्त आपका मुंह भी दक्षिण दिशा की ओर ही होना चाहिए.

 

धनतेरस की शाम को मुख्य द्वार पर 13 और घर के अंदर भी 13 दीप जलाने होते हैं। ये काम सूरज डूबने के बाद किया जाता है।

 

लेकिन यम का दीया परिवार के सभी सदस्यों के घर आने और खाने-पीने के बाद सोते समय जलाया जाता है। इस दीप को जलाने के लिए पुराने दीप का इस्‍तेमाल करें।

 

उसमें सरसों का तेल डालें और रुई की बत्ती बनाएं। घर से दीप जलाकर लाएं और घर से बाहर उसे दक्षिण की ओर मुख कर नाली या कूड़े के ढेर के पास रख दें।

 

साथ ही उस समय ‘मृत्युना पाशहस्तेन कालेन भार्यया सह।

 

त्रयोदश्यां दीपदानात्सूर्यज: प्रीतयामिति।’ मंत्र का जप करें। और साथ में जल भी चढ़ाएं। इसके बाद बिना उस दीप को देखे ही घर के अंदर आ जाएं।

तो छोटी दिवाली पर निबंध मे आज हमने बहुत सी बातें जानी.

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