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Nangeli biography in hindi | नंगेली का विद्रोह

Nangeli biography | breast tax in india – नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका आज के इस बेहद जानकारी से भरे आर्टिकल मे. दोस्तों भारत मे एक दौर ऐसा भी हुआ करता था ज़ब स्त्रियों को स्तन ढकने के बदले अंग्रेज़ों को टैक्स देना पड़ता था जिसकी वजह से आधा नंगा घूमना ही उनकी मजबूरी बन चुकी थी.

प्राचीन काल से लेकर आजतक महिलाओं को हमेशा एक सेक्स ऑब्जेक्ट के तौर पर देखा जाता रहा है।

 

 महिलाओं को किसी ने कभी इंसान का दर्जा दिया ही नहीं। कुछ लोगों का तो ये भी कहना है कि ईश्वर ने महिलाओं की रचना सिर्फ पुरूषों को संतुष्ट करने के लिए की है। महिलाओं का काम सिर्फ पुरूषों की सेवा करना होता है।

 

उन्हें अपने अधिकारों और अपने सम्मान के प्रति आवाज उठाने का कोई हक नहीं है। आपने बहुत तरीके के टैक्स के बारे में पढ़ा होगा और आज भी आप कई तरह के टैक्स वसूले जाने से परेशान हो जाते होंगे। लेकिन इतिहास में एक ऐसा टैक्स भी हुआ करता था, जिसके बारे में सुनकर ही आपका दिल रोने लगेगा।

केरल के त्रावणकोर में सन 19वीं शताब्दी की शुरूआत में मूलाकरम नाम का टैक्स लागू किया गया था। इसमें महिलाओं को अपने स्तन ढकने पर टैक्स देना पड़ता था।

 यानी यदि किसी महिला ने कमर के ऊपर कपड़ा पहना, तो राजाओं के अधिकारी उससे टैक्स वसूली किया करते थे। इस टैक्स के विरोध में नंगेली नाम की एक महिला ने आवाज उठाई।

 

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Nangeli biography |breast tax in india

 

जातिवाद हमेशा से ही समाज में एक काले धब्बे के समान रहा है। और कई ऐसे राजा हुए है, जिन्होंने जातिवाद को बढ़ावा देना का काम किया है।

 केरल के त्रावणकोर में चेरथला नाम के राजा का राज हुआ करता था। उस समय केरल मे जातिवाद की जड़े बहुत गहरी हो गई थी। सामंतवादी लोग अपने से निम्न जाति के लोगों को तुच्छ समझते थे।

राजा ने आदेश दे दिया कि कोई भी निम्न जाति की महिला या पुरूष अपने स्तन नहीं ढकेगा। और यदि कोई इस आदेश का उल्लंघन करता है तो उसे मूलाकरम यानी ब्रेस्ट टैक्स चुकाना होगा।

महिलाओं के लिए इससे भी ज्यादा शर्म की बात ये थी कि टैक्स की कीमत उनके स्तन के आकार के अनुसार तय की जाती थी । यानि बड़े स्तन वाली महिलाओं पर अधिक टैक्स लगाया जाता था और छोटे स्तन वाली महिलाओं को कम टैक्स देना पड़ता था। 

मूलाकरम को लागू करने का कारण क्षेत्र में जातिवाद को बढ़ावा देना था। कहा जाता था कि छोटी जात के लोगों को उंची जाति के लोगों के सामने वस्त्र नहीं पहनने चाहिए। वस्त्र एक समृद्धता की निशानी माने जाते थे।

टैक्स से बचने के लिए सभी पुरूषों के साथ साथ महिलाओं को भी अपने स्तन नग्न रखकर ही घूमना पड़ता था और यदि उनके सामने से कोई ऊंची जाति का व्यक्ति जा रहा होता था तो दलितों को अपना सिर भी झुकाना पड़ता था।

Nangeli-biography

इस टैक्स का बोझ सबसे ज्यादा नायर और एड़वा समुदाय की महिलाओं को झेलना पड़ा था। राजा के अधिकारी अक्सर महिलाओं को घूरते थे और आनंद लिया करते थे। महिलाओं के साथ बदतमीजी करने से भी वह बिल्कुल परहेज नहीं करते थे। वहीं महिलाएं अपने सम्मान के प्रति आवाज उठाने मे भी सक्षम नहीं थी।

यहां पर एक और हैरान करने वाली बात ये है कि उस समय मंदिर जैसी जगहों पर उच्च जाति की महिलाओं को भी अपने स्तनों पर से कपड़ा हटाकर ही अंदर जाना पड़ता था। 

त्रावणकोर में ही नंगेली नाम की एक महिला रहा करती थी। नंगेली की शादी चीरुकुंदन नाम के व्यक्ति के साथ हुई थी। नंगेली का कहना था कि उन्हें भी समाज में सम्मान से जीने का हक होना चाहिए और अपने पति से स्तन ढकने की इजाजत मांगी। चीरुकुंदन ने नंगेली को स्तन ढकने की इजाजत दे दी और अगले ही दिन से वह अपने शरीर को कपड़े से ढकने लगी। धीरे धीरे ये बात पूरे इलाके में फैल गई और राजा के अधिकारियों तक भी ये बात पहुंची।

 

 राजा के कुछ अधिकारीगण नंगेली और उसके पति के पास कर वसूलने के लिए पहुंच गए। उन अधिकारियों ने नंगेली से स्तनों पर से कपड़ा हटाने के लिए कहा और जब नंगेली ने ऐसा नहीं किया तो अधिकारियों ने खुद ही नंगेली के बदन पर से खींचकर कपड़ा हटा दिया।

 इसके बाद उन्होंने नंगेली के स्तनों का आकार मापना शुरू किया और फिर टैक्स देने की बात कही।   

नंगेली को इन सबके दौरान बहुत अपमान महसूस हुआ। इतना अपमान, और क्रोध, की नंगेली ने इस पूरी घटना के विरोध में हंसिए से अपने स्तन काट दिए और उन्हें केले के पत्ते में रखकर अधिकारियों को दे दिया। आपको बता दे कि हंसिया एक प्रकार का चाकू होता है, जिसका इस्तेमाल फसल की कटाई के दौरान किया जाता है।

 नंगेली की हिम्मत और बहादुरी देखकर अधिकारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई और सभी वहां से भाग खड़े हुए।

स्तन काटने के कारण नंगेली का बहुत खून बहने लगा था और अधिक खून बह जाने के कारण ही उसकी मौत हो गई। जब नंगेली के शव को जलाया जा रहा था तो उसके पति चीरूकुंदरन ने भी चिता में कूदकर अपनी जान दे दी थी। कहा जाता है कि ये इतिहास का एकमात्र पुरूष द्वारा सती हो जाने का उदाहरण है।

नंगेली की मौत के बाद त्रावणकोर में एक क्रांति की शुरूआत हुई। सभी महिलाओं ने अपने स्तन ढकने शुरू कर दिए। स्तन ढकने के अधिकार की क्रांति का नाम Channar Mutiny रखा गया। नादर और एड़वा समुदाय के लोगों ने अपने सम्मान में आवाज उठानी शुरू कर दी।

 

 ये बात, जब राजा तक पहुंची तो  उसे बहुत गुस्सा आया। लेकिन जनता के सामने राजा की एक ना चली। लगभग 5 दशक तक ये विद्रोह चलता रहा और 26 जुलाई सन 1859 मे आखिरकार राजा को जबरन मूलाकरम यानी ब्रेस्ट टैक्स को खत्म करना पड़ा। लेकिन ये जंग बहुत आसान नहीं थी। कड़े संघर्ष के बाद लोगों को सम्मान के साथ जीने का अधिकार मिला था। 

मुलाचीपराम्बु नाम की जगह पर ये पूरी क्रांति हुई थी, जिसे आज मनोरमा कवाला के नाम से जाना जाता था। इसी नाम पर यहां मनोरमा जंक्शन का नाम रखा गया है।

यहां पर नंगेली की एक मूर्ति भी बनी हुई है, जिसे इतिहास में सम्मान की लड़ाई का प्रतीक माना जाता है। आज नंगेली का परिवार तो यहां नहीं रहता है। नंगेली के विद्रोह और कुर्बानी के कारण ही कई पीढ़ियों को समाज मे इज्जत से जीने का अधिकार दिलाया था। 

नंगेली के इस विद्रोह की कहानी आज इतिहास के पन्नों से गायब हो गई है। युवाओं और आज की पीढ़ी को इस तरह के आंदोलनों के बारे में नहीं पढ़ाया जाता।

इस घटना को हुए 2 शतक बीत गए है, लेकिन आज भी स्थिति बहुत ज्यादा बदली हुई नज़र नहीं आती है।

आए दिन महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और बलात्कार की घटनाएं सामने आती रहती है। रोजाना ऑफिस और कॉलेज जाने वाली महिलाओं को ऐसे पुरूषों का सामना करना पड़ता है, जो घूर घूरकर उनकी छाती देखने से गुरेज़ नहीं करते। ऐसे पुरूष समाज पर कालिख के समान है। 

आज बड़े पर्दे पर कई ऐसी फिल्में बन रही है, जिनमें मुगल शासकों को महान दिखाया जाता है। फिज़ूल की मनगढ़त कहानियां भी निर्देशकों को पसंद आ जाती है। लेकिन नंगेली के विद्रोह जैसी घटना पर फिल्म बनाने का साहस फिल्ममेकर्स नहीं कर पाते, क्योंकि ऐसी फिल्मों से उन्हें शायद ज्यादा कमाई ना हो। लेकिन यकीनन इन फिल्मों के जरिए इतिहास के उन पन्नों और वीर योद्धाओं को सामने लाया जा सकता है, जिन्होंने समाज सुधार की दिशा में अपनी कुर्बानी दी है। वीरंगना नंगेली के चरणों में हम कोटि-कोटि नमन करते है। 

दोस्तों उम्मीद है, आपको ये आर्टिकल पसंद आया होगा.अगर हां तो इसे लाइक और अधिक से अधिक अपने दोस्तो और रिश्तेदारों के साथ शेयर करें।

वीरांगना नंगेली की कहानी हर घर और हर पीढ़ी के लोगों को पता होनी चाहिए। आज के लिए इतना ही दोस्तों। आपसे फिर मिलेंगे एक नई  और ढेर सारी रोचक जानकारी के साथ।

हम अपने ब्लॉग पर ऐसी ही तमाम ऐतिहासिक घटनाओ से भरी जानकारी आर्टिकल के माध्यम से आप तक पहुँचाते रहते है.

 

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