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आदमी ने खोला पार्लर – hindi moral stories

आदमी ने खोला पार्लर  hindi moral stories (हिन्दी मोरल स्टोरी  )- स्वागत है आपका ज्ञान से भरी रोचक कहानियों की इस दुनिया मे।

दोस्तों जीवन मे कहानियों का विशेस महत्तव है |

इन कहानियो के माध्यम से हमे बहुत कुछ सीखने को मिलता है | इनकहानियों के माध्यम से आपको ज़रूरी ज्ञान हासिल होंगे जो आपको आपकी लाइफ मे बहुत काम आएंगे |

यहाँ पर बताई गई हर कहानी से आपको एक नई सीख मिलेगी जो आपके जीवन मे बहुत काम आएगी | हर कहानी मे कुछ न कुछ संदेश और सीख छुपी हुई है | तो ऐसी कहानियो को ज़रूर पढ़े और अपने दोस्तो और परिवारों मे भी शेयर करे 

 

 

 

दोस्तों यह कहानी उन लोगो के लिए एक बहुत बड़ी motivation है जो लोग अक्सर कुछ ऐसे कामो को लेकर अपनी मानसिकता ऐसी बना लेते है की! शर्म करने लग जाते है की ये तो लड़कियों वाला काम  है ये- वो , आज ये कहानी story ऐसे लोगो की मानसिकता को बदल  कर रख देगी| क्योकि ऐसा कुछ नहीं होता की काम किसका है किसका नहीं। काम  पर किसी का नाम नाम नहीं लिखा होता की ये काम उन लोगो का है | अगर ज़िंदगी मे कामयाब होना है तो अपनी सोच का दायरा बढ़ाओ | 

 

 

तो चलिये शुरू करते है हमारी आज की कहानी

 

एक आदमी ने खोला लेडीज पार्लर – moral story in hindi

 

 

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उत्तराखंड के छोटे शहर रुड़की में शायद मैं पहला या दूसरा मर्द था जिसने कोई लेडीज़ पार्लर खोला था.

मेरी इस च्वाइस पर मेरे जानने वाले तो नाक-भौंह सिकोड़ते ही थे,अपने मुह का exertion ऐसे बदल लेते थे मानो मैंने कोई ऐसा काम कर दिया जिससे उनके खानदान की नाक कट गई हो और इज्ज़त पानी मे  मिल गई  हो |

 

 

मेरे काम को लेकर लोगो की बाते और मानसिकता – 

 

पड़ोसी तरह-तरह की बातें बनाया करते और कहते कि लेडीज़ पार्लर तो लड़कियों का काम है.

 

 

लड़कियों को मनाना, उनका विश्वास जीतना और यह बताना कि मैं भी किसी लड़की से कम अच्छा मेकअप नहीं कर सकता, बहुत मुश्किल था.

 

आदमी ने खोला पार्लर – hindi moral stories

 

अगर कोई लड़की मेरे पार्लर में आती भी थी तो उनके पति, भाई या पिता मुझे देखकर उन्हें रोक देते. वो कहते, अरे! यहां तो लड़का काम करता है.

आदमी ने खोला पार्लर - hindi moral stories

 

लड़कियां मुझसे थ्रेडिंग तक करवाने से साफ़ इनकार कर देती. 8X10 के कमरे में शायद एक लड़के का उनके क़रीब आकर काम करना उन्हें असहज करता था. 

सवाल मेरे ज़हन में भी थे. क्या लड़कियां मुझसे उतना ख़ुल पाएंगी जैसे एक पार्लर वाली लड़की को अपनी पसंद-नापसंद बता पाती हैं.

 

 

ऐसा नहीं कि मुझे इस सबका अंदाज़ा नहीं था. लेकिन जब अपने मन के काम को बिज़नेस में बदलने का मौका मिला तो मैं क्यों छोड़ता?

शुरुआत दरअसल कई साल पहले मेरी बहन की शादी के दौरान हुई. उसके हाथों में मेहंदी लगाई जा रही थी और वो मेहंदी लगाने वाला एक लड़का ही था.

 

आदमी ने खोला पार्लर – hindi moral stories

 

बस लड़कपन की उस शाम मेरे दिलो-दिमाग में मेंहदी के वो डिज़ाइन रच-बस गए.

मेहंदी के कुछ डिजाइन  बनाना सीखा, कागज़ पर अपना हाथ आज़माया और फिर मैं भी छोटे-छोटे बच्चों के हाथों में मेहंदी लगाने लगा.

कुछ दिन बाद जब घर पर इस बारे में पता चला, तो खूब डांट पड़ी.

पापा ने सख्त लहज़े में कहा कि मैं यह लड़कियों जैसे काम क्यों कर रहा हूं. वो चाहते थे कि मैं उन्हीं की तरह फ़ौज में चला जाऊं.

लेकिन मुझे फ़ौज या कोई भी दूसरी नौकरी पसंद ही नहीं थी.

फिर एक बार मैं एक शादी में गया और वहां मैंने औरतों के हाथों में मेहंदी लगाई जो काफ़ी पसंद की गई. इसके एवज़ में मुझे 21 रुपए मिले.

मेरी जीवन की ये पहली कमाई थी. मेरी मां और भाई-बहन मेरे शौक को पहचान चुके थे लेकिन पापा को ये अब भी नागवारा था.

हारकर मैं हरिद्वार में नौकरी करने लगा. सुबह नौ से पांच वाली नौकरी. सब ख़ुश थे क्योंकि मैं मर्दों वाला काम कर रहा था.

पर मेहंदी लगाने का शौक़ मेरे दिल के एक कोने में ही दफ़्न होकर रह गया.

रह-रहकर एक हूक सी उठती कि इस नौकरी से मुझे क्या मिल रहा है. ना तो बेहतर पैसा ना ही दिल का सुकून.

पैसा मिल भी गया तो क्या आखिर मेरे मन और  दिल को सुकून तो नहीं मिलेगा कभी 

 

इस बीच लंबी बीमारी के बाद पापा चल बसे, घर का ख़र्च चलाने की ज़िम्मेदारी अचानक मेरे कंधों पर आ गई.

लेकिन, इसी ज़िम्मेदारी ने मेरे लिए नए रास्ते भी खोल दिए. मैं जब छुट्टी पर घर आता तो शादियों में मेहंदी लगाने चला जाता.

यहां मेरी महीने की तन्ख्वाह महज़ 1,500 रुपए थी, वहीं शादी में मेंहदी लगाने के मुझे करीब 500 रुपये तक मिल जाते थे.

 

आदमी ने खोला पार्लर – hindi moral stories

 

 

शायद कमाई का ही असर था कि अब परिवार वालों को मेरा मेहंदी लगाना ठीक लगने लगा था.

उसी दौरान मुझे पता चला कि ऑफिस में मेरा एक साथी अपनी पत्नी के ब्यूटी पार्लर में उनकी मदद करता है, और दोनों अच्छा-खासा पैसा कमा लेते हैं.

 

काम  कोई भी हो ! अगर उसे  पूरी लगन और ईमानदारी से किया जाए तो कामयाबी ज़रूर हासिल होती है | कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता  – यदि छोटी होती है तो वो है लोगो की सोच  –  यह तो सिर्फ छोटी सोच वाले लोगो की मानसिकता है  जो खुद तो आगे नहीं बढते और अपनी इस घटिया सोच के चलते दूसरों को भी  नहीं बढने देते | आज यदि आप दुनिया की बेकार बातों को भूल कर अपना खुद का कुछ करने का फैसला लेते हो और उस कम को बिना हौसला हारे लगन और ईमानदारी के साथ करते जाते हो तो तो एक दिन यही काम आपको दुनिया मे एक नई पहचान दिलाएगा कामयाबी आपके कदम चूमेगी | जिससे  काम को  लेकर   छोटी सोच वाले  लाखो लोगो की सोच बादल जाएगी |

 

 

 

मेरे मन ने सोचा, की क्यों न मैं भी अपना एक ब्यूटी पार्लर खोल लूं? आखिर कौन जनता था की मेरी यह सोच मुझे कामयाबी की किस उचाई तक लेकर जाने वाली है ! इसी सोच और काम  से मेरी ज़िंदगी अब बदलने वाली थी |

 

लेकिन यह सुझाव जब मैंने अपने परिवार के सामने रखा तो एकाएक सभी की नज़रों में बहुत से सवाल उठ खड़े हुए. वही लड़कियों का काम – लड़कों का काम वाले सवाल.

पर ठान लो तो रास्ते ख़ुल ही जाते हैं.

 

मैंने जो करने का सोचा जो सपने देखे उसे सिर्फ एक सोच और सपने तक ही सीमित नहीं रखा  | मुझे खुद पर विश्वास था और फिर अपने मजबूत हौसलों के चलते मैंने अपना पहला  कदम कामयाबी की तरफ बढ़ा दिया | 

 

मेरे मामा की लड़की ब्यूटी पार्लर का काम सीख रही थी. उसने वही सब मुझे सिखाना शुरू कर दिया. और फिर हमने मिलकर एक पार्लर खोला. शुरुआती दिनों की चुनौतियां भी उसी की मदद से हल हुईं.

 

पार्लर में मेरे अलावा, मेरी बहन यानी एक लड़की का होना महिला कस्टमर्स का विश्वास जीतने में सहायक रहा. हमने अपने छोटे से कमरे में ही परदे की दीवार बना दी. मेरी बहन लड़कियों की वैक्सिंग करती और मैं उनकी थ्रेडिंग और मैक-अप.

 

 

उम्र और अनुभव के साथ मैं अपने काम की पसंद के बारे में मेरा विश्वास और बढ़ गया था. शादी के लिए लड़की देखने गया तो उसने भी मुझसे यही सवाल किया, ‘‘आखिर यह काम क्यों चुना?”

मेरा जवाब था, ”यह मेरी पसंद है, मेरी अपनी च्वाइस.”

उसके बाद से आज तक मेरी पत्नी ने मेरे काम पर सवाल नहीं उठाए. वैसे भी वो मुझसे 10 साल छोटी है, ज़्यादा सवाल पूछती भी कैसे.

 

आदमी ने खोला पार्लर – hindi moral stories

 

शादी के बाद मैंने पत्नी को ब्यूटी पार्लर दिखाया, अपने कस्टमर और स्टाफ से भी मिलवाया. मैं चाहता था कि उनके मन में किसी तरह का कोई शक़ ना रहे.

पिछले 13 साल में 8×10 का वो छोटा सा पार्लर, तीन कमरों तक फैल चुका है.

अब रिश्तेदार भी इज़्ज़त करते हैं और मुझे ताना देनेवाले मर्द अपने घर की औरतों को मेरे पार्लर में खुद छोड़कर जाते हैं.

 

 

आदमी ने खोला पार्लर – hindi moral stories

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