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ekadashi fast- एकादशी व्रत इतना खास क्यो माना गया है

एकादशी व्रत (ekadashi fast) इतना खास क्यो माना गया है – निर्जला एकादशी 

 


ekadashi fast – हिंदू धर्म में एकादशी का बहुत महत्व होता है,इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और उपवास रखा जाता है.

हर एकादशी पर कुछ न कुछ खास जरुर होता है। सच्ची श्रद्धा और पूरी भक्ति भावना से रखा गया कोई भी एकादशी 

का व्रत  हर मनोकामना को पूरा करता है । ऐसे में पूरे साल में 24 एकादशियां होती है जिसमें पूजा व्रत व उपवास करने से लाभ मिलता है।

 

शास्त्रों में एकादशी के दिन को भगवान विष्णु की पूजा अर्चना का दिन माना जाता है।

एकादशी के दिन चावल खाना मना होता है। इसलिए कोशिश करें की एकादशी के दिन चावल न खाने की।

है।


 

 कैसे शुरू हुआ एकादशी का व्रत-ekadashi fast

कहानी-

एक बार पुण्यश्लोक धर्मराज युधिष्ठिर को लीला पुरुषोत्तम भगवान श्रीकृष्ण ने समस्त दुःखों, त्रिविध तापों से मुक्ति दिलाने, हजारों यज्ञों के अनुष्ठान की तुलना करने वाले, चारों पुरुषार्थों को सहज ही देने वाले एकादशी व्रत करने का निर्देश दिया। 

 

एकादशी (Ekadashi) व्रत-उपवास करने का बहुत महत्व होता है। साथ ही सभी धर्मों के नियम भी अलग-अलग होते हैं। खास कर हिंदू धर्म के अनुसार एकादशी व्रत करने की इच्छा रखने वाले मनुष्य को दशमी के दिन से ही कुछ अनिवार्य नियमों का पालन करना चाहिए।

 

ekadashi fast benefits

 

क्यो ज़रूरी है व्रत रखना – क्या होता है व्रत के बाद 

  1.  हिन्दू धर्मशास्त्रों में शरीर और मन को संतुलित करने के लिए व्रत और उपवास के नियम बनाये गए हैं. व्रत मे  हम  रोज़ की तरहा दाल सब्जी जैसे तरहा तरहा के पकवानो का सेवन नहीं करते  इसकी जगह हम फलो और दूध का सेवन करते है और वो भी 24 घंटे मे ए या दो बार ही ॥ekadashi fast benefits

 

2.   तो इससे होता क्या है की हमारी बॉडी को अंदर से खुद को डिटोक्स करने का समय मिल जाता है । यही फास्ट यानि व्रत रखने का हमारे मन पर जो सकारात्मक असर होता है वो व्रत रखने के अगले  दिन से ही शुरू हो जाता है| और इसका सकारात्मक (positive) असर काफी लंबे समय यानि कुछ दिनो तक बना  रहता  है |ekadashi fast benefits

 

3.   पुराणों मे व्रत को एक योग साधना या तपस्या  से लेकर भी जोड़ा गया है  मतलब व्रत रखने से मन शांत रहता है  ।  इंसान मे धैर्य की सीमा काफी बढ़ जाती है । जिससे वो हर प्रकार की situation मे भी अपने पर काबू पाना सीख जाता है ।ekadashi fast benefits

 हर व्रत का अपना अपना आध्यात्मिक महत्त्व है 

 

 

 

4.   तमाम व्रत और उपवासों में सर्वाधिक महत्व एकादशी का है, जो माह में दो बार पड़ती है. शुक्ल एकादशी,और कृष्ण एकादशी.ekadashi fast benefits

 

 

वैशाख मास में एकादशी उपवास का विशेष महत्व है, जिससे मन और शरीर दोनों ही संतुलित रहते हैं. ख़ास तौर से गंभीर रोगों से रक्षा होती है और खूब सारा नाम यश मिलता है.ekadashi fast benefits

 

इस एकादशी के उपवास से मोह के बंधन नष्ट हो जाते हैं, अतः इसे मोहिनी एकादशी कहा जाता है. भावनाओं और मोह से मुक्ति की इच्छा रखने वालों के लिए भी वैशाख मास की एकादशी का विशेष महत्व है. मोहिनी एकादशी के दिन भगवान के राम स्वरुप की आराधना की जाती है.ekadashi fast benefits

 

 

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क्या लाभ होता है एकादशी का व्रत रखने से – एकादशी व्रत के चमत्कारी लाभ –

व्रतों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण व्रत एकादशी का होता है. एकादशी का नियमित व्रत रखने से मन कि चंचलता समाप्त होती है.

धन और आरोग्य की प्राप्ति होती है,हारमोन की समस्या भी ठीक होती है तथा मनोरोग दूर होते हैं.

 

एकादशी के व्रत से आप अशुभ संस्कारों को भी नष्ट कर सकते हैं।

पुराणों अनुसार जो व्यक्ति एकादशी करता रहता है वह जीवन में कभी भी संकटों से नहीं घिरता और उनके जीवन में धन और समृद्धि बनी रहती है।

विजया एकादशी से भयंकर से भयंकर परेशानी से छुटकारा पा सकते हैं। इससे आप अपने श‍त्रुओं को भी परास्त कर सकते हैं।

सभी एकादशी व्रत का महत्व उनके नाम से ही प्रकट होता है।

 

ये हैं एकादशी व्रत-उपवास के नियम…

* दशमी के दिन मांस, लहसुन, प्याज, मसूर की दाल आदि निषेध वस्तुओं का सेवन न करे 

* रात्रि को पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए तथा भोग-विलास से दूर रहे

* एकादशी के दिन प्रात: लकड़ी का दातुन न करें,

नींबू, जामुन या आम के पत्ते लेकर चबा लें और अंगुली से कंठ साफ कर लें,

वृक्ष से पत्ता तोड़ना भी ‍वर्जित है। अत: स्वयं गिरा हुआ पत्ता लेकर सेवन करें।

* यदि यह संभव न हो तो पानी से बारह बार कुल्ले कर लें। फिर स्नानादि कर मंदिर में जाकर गीता पाठ करें या पुरोहितजी से गीता पाठ का श्रवण करें।

 

* फिर प्रभु के सामने इस प्रकार प्रण करना चाहिए कि ‘आज मैं चोर, पाखंडी़ और दुराचारी मनुष्यों से बात नहीं करूंगा और न ही किसी का दिल दुखाऊंगा। रात्रि को जागरण कर कीर्तन करूंगा।’

* तत्पश्चात ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ इस द्वादश मंत्र का जाप करें। राम, कृष्ण, नारायण आदि विष्णु के सहस्रनाम को कंठ का भूषण बनाएं।

 

* भगवान विष्णु का स्मरण कर प्रार्थना करें और कहे कि- हे त्रिलोकीनाथ! मेरी लाज आपके हाथ है, अत: मुझे इस प्रण को पूरा करने की शक्ति प्रदान करना।

 

 

* यदि भूलवश किसी निंदक से बात कर भी ली तो भगवान सूर्यनारायण के दर्शन कर धूप-दीप से श्री‍हरि की पूजा कर क्षमा मांग लेना चाहिए।

 

 

* एकादशी के दिन घर में झाड़ू नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि चींटी आदि सूक्ष्म जीवों की मृत्यु का भय रहता है। इस दिन बाल नहीं कटवाना चाहिए। न नही अधिक बोलना चाहिए। अधिक बोलने से मुख से न बोलने वाले शब्द भी निकल जाते हैं।

 

 

* इस दिन यथा‍शक्ति दान करना चाहिए। किंतु स्वयं किसी का दिया हुआ अन्न आदि कदापि ग्रहण न करें। दशमी के साथ मिली हुई एकादशी वृद्ध मानी जाती है।

 

 

वैष्णवों को योग्य द्वादशी मिली हुई एकादशी का व्रत करना चाहिए। त्रयोदशी आने से पूर्व व्रत का पारण करें।

* एकादशी (ग्यारस) के दिन व्रतधारी व्यक्ति को गाजर, शलजम, गोभी, पालक, इत्यादि का सेवन नहीं करना चाहिए।

* केला, आम, अंगूर, बादाम, पिस्ता इत्यादि अमृत फलों का सेवन करें।

* प्रत्येक वस्तु प्रभु को भोग लगाकर तथा तुलसी जल छोड़कर ग्रहण करना चाहिए।

* द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को मिष्ठान्न, दक्षिणा देना चाहिए।

* क्रोध नहीं करते हुए मधुर वचन बोलना चाहिए।

इस व्रत को करने वाला दिव्य फल प्राप्त करता है और उसके जीवन के सारे कष्ट समाप्त हो जाते हैं

 

 

क्या होती है निर्जला एकादशी –

इस दिन भगवान विष्णु की पूजा-आराधना का विशेष महत्व है, इसके साथ ही यह एकादशी  सूर्योदय से द्वादशी (दूसरे दिन के ) के सूर्योदय तक का समय निर्जल यानी बिना पानी पिए व्रत रखना होता है।

 

इसके साथ ही सभी 24 एकादशियों में निर्जला एकादशी का विशेष महत्व होता है। इसे सभी एकादशियों में सबसे पवित्र माना जाता है। निर्जला एकादशी का व्रत ज्येष्ठ महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन होता है।

 

शास्त्रों में ऐसा माना जाता है कि निर्जला एकादशी के दिन उपवास करने से   पूरे साल भर में आने वाली एकादशी व्रत का फल मिलता है।

 

ये व्रत सबसे कठिन व्रत क्यो माना जाता है 

सभी व्रतों में निर्जला एकादशी का व्रत सबसे कठिन माना जाता है क्योंकि इस दिन पानी का एक बूंद भी ग्रहण नहीं करना होता है.इस व्रत में भोजन के साथ पानी का भी त्याग करना पड़ता है.इसीलिए  इस व्रत को निर्जला एकादशी का व्रत कहा जाता है 

इस व्रत को निर्जला यानि की बिना पानी के रखना होता है. इस वजह से इस व्रत को सबसे कठिन माना जाता है.

 

इस व्रत में अगले दिन यानि की द्वादशी के दिन  (अगला दिन ) सूर्योदय होने के बाद ही आप पानी ग्रहण कर सकते हैं. इस साल यह व्रत 13 जून 2019 को होगा. इस व्रत का फल पाने के लिए व्रत को पूरे विधि- विधान से रखना जरूरी है

 

 

क्या मनन्यता है निर्जला एकादशी की- 

मान्यता है कि इस व्रत को करने से जीवन में सुख-समृध्दि प्राप्त होती है. सभी एकादशियों में निर्जला एकादशी व्रत का अधिक महत्व माना जाता है. मान्यता है कि इस व्रत को रखने से साल भर की सभी एकादशियों का फल मिल जाता है.

 

 

क्या महत्त्व है निर्जला एकादशी का –

शास्त्रों के अनुसार निर्जला एकादशी के व्रत के शुभ प्रभाव से चंद्रमा से उत्पन्न हुआ नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं।
निर्जला एकादशी का उपवास करने से ध्यान लगाने की क्षमता बढ़ती है।

निर्जला एकादशी पर अगर भक्त पूरी रात जागकर भगवान विष्णु की पूजा करे तो जीवन में सकारात्मक प्रभाव पडता है। एकादशी व्रत करने वाले को द्वादशी की सुबह(दूसरे दिन की सुबह) व्रत का पारायण करना चाहिए।

 

 

जानिए ज़रूरी बाते –

शास्त्रों में माना जाता है कि निर्जला एकादशी की रात सोना मना है, व्रत की रात सोने से शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

निर्जला एकादशी के दिन भक्त को ‘ओम नमोः भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करना चाहिए। साथ ही ब्राह्मणों को सामर्थ के अनुसार दान चाहिए।

 

 

 

निर्जला एकादशी व्रत 2019 की पूजा विधि-

हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी व्रत का काफी महत्व माना जाता है इसलिए इसे पूरे यत्न के साथ इस व्रत को करना चाहिए. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करें और सूर्योदय तक अन्न और जल का त्याग करना होता है

 

जरूरतमंद को अपने सामर्थअनुसार  खाना, वस्त्र, फल दान जरूर करें. इस दिन ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का उच्चारण करें और निर्जला एकादशी की कथा को पढ़ना और सुनना चाहिए.

 

 

इसके अलावा शाम में तुलसी जी की पूजा करें उन्हें जल चढ़ाएं और दीपक जलाएं. इसके बाद अगले द्वादशी वाले दिन सूर्यादय के बाद ब्राह्मण को भोजन करवाने के बाद खुद अन्न और जल ग्रहण करें.

 

 

जानिए क्या है पुत्रदा एकादशी – कैसे मनाया जाता है । पूजा विधि – और इसके लाभ –

 पढ़ने के लिए नीचे  नंबर 2 पर click करे  

 

 

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