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शिव पूजा के 5 नियम, जिनसे प्रभु होते हैं प्रसन्न। बरसेगी भोलेनाथ की अपार किरपा|| shiv pooja vidhi 

शिवशंकर की पूजा-अर्चना से कई जन्मों का फल प्राप्त होता है। यदि विधिविधान से पूजन किया जाए तो निश्चित ही मनोवांछित फल प्राप्त होता है। आइए जानते हैं कि शिव पूजन में अर्पण किए जाने वाली एक अत्यंत महत्वपूर्ण वस्तु और सिद्ध पूजन विधि के बारे में…

1.बेलपत्र शंकर जी को बहुत प्रिय हैं, बिल्व अर्पण करने पर शिवजी अत्यंत प्रसन्न होते हैं और मनमांगा फल प्रदान करते हैं।

 

2.   लेकिन प्राचीन शिव पुराण के अनुसार भगवान शिव पर अर्पित करने हेतु बेलपत्र तोड़ने से पहले एक विशेष मंत्र का उच्चारण कर बिल्व वृक्ष को श्रद्धापूर्वक प्रणाम करना चाहिए, उसके बाद ही बिल्व पत्र तोड़ने चाहिए। ऐसा करने से शिवजी बिल्व को सहर्ष स्वीकार करते हैं।

 

 

क्या है बेलपत्र पत्र तोड़ने का मंत्र- shiv pooja vidhi 

अमृतोद्धव श्रीवृक्ष महादेवप्रिय: सदा।
गृहामि तव पत्रणि शिवपूजार्थमादरात्।।

 

 

 

3. यह समय निषिद्ध है बेलपत्र तोड़ने के लिए… shiv pooja vidhi 

हमेशा ध्यान रखें कि चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या तिथियों को, संक्रांति के समय और सोमवार को बिल्व पत्र कभी नहीं तोड़ने चाहिए। यदि पूजन करना ही हो एक दिन पहले का रखा हुआ बिल्व पत्र चढ़ाया जा सकता है।

 

 

4 – इसके अलावा बेलपत्र , धतूरा और पत्ते जैसे उगते हैं, वैसे ही इन्हें भगवान पर चढ़ाना चाहिए। उत्पन्न होते समय इनका मुख ऊपर की ओर होता है, अत: चढ़ाते समय इनका मुख ऊपर की ओर ही रखना चाहिए।

 

 

 

 

5-  कैसे चढ़ाएं दूर्वा और तुलसी शिवजी को- shiv pooja vidhi 

दूर्वा एवं तुलसी दल को अपनी ओर तथा बिल्व पत्र नीचे मुख पर चढ़ाना चाहिए। दाहिने हाथ की हथेली को सीधी करके मध्यमा, अनामिका और अंगूठे की सहायता से फूल एवं बिल्व पत्र चढ़ाने चाहिए। भगवान शिव पर चढ़े हुए पुष्पों एवं बिल्व पत्रों को अंगूठे और तर्जनी की सहायता से उतारें।

 

 

सावन और शिव पूजा से जुड़ी  है यह कथा-shiv pooja vidhi 

शिवपुराण में बताई गई कथा के अनुसार प्राचीन काल में गुणनिधि नाम का एक व्यक्ति बहुत गरीब था। वह अपने लिए और परिवार के लिए भोजन की खोज कर रहा था। खोज करते हुए रात हो गई और वह एक शिव मंदिर में पहुंच गया।

 

गुणनिधि ने सोचा कि इसी में रात्रि विश्राम कर लेना चाहिए। रात के समय वहां अत्यधिक अंधेरा हो गया। इस अंधकार को दूर करने के लिए उसने शिव मंदिर में उसने अपनी कमीज जला दी।

 

 

रात के समय भगवान शिवलिंग के प्रकाश करने के फलस्वरूप से उस व्यक्ति को अगले जन्म में देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर देव का पद प्राप्त हुआ।

 

इस कथा के अनुसार ही रात के समय शिव मंदिर में रोशनी करने के लिए दीपक जलाना चाहिए।

 

दीपक जलाते समय ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जाप करना चाहिए। मंत्र जाप कम से कम 108 बार करें। जाप के रुद्राक्ष की माला का उपयोग करना चाहिए। ध्यान रखें मंत्र जाप के समय दीपक बुझना नहीं चाहिए।

 

सावन माह में रोज सुबह तांबे के लोटे से शिवलिंग पर जल चढ़ाना चाहिए। जल चढ़ाते समय ऊँ सांब सदा शिवाय नम: मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करना चाहिए। बिल्व पत्र चढ़ाएं और मिठाई का भोग लगाएं।

 

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  ऊम नमः शिवाय

 

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