सबसे बड़ा पुण्य | moral story in Hindi

सबसे बड़ा पुण्य | moral story in Hindi | religious story in hindi

 

moral story in Hindi (मोरल स्टोरी इन हिन्दी)- स्वागत है आपका ज्ञान से भरी रोचक कहानियों की इस दुनिया मे। दोस्तों जीवन मे कहानियों का विशेस महत्तव है | इन कहानियो के माध्यम से हमे बहुत कुछ सीखने को मिलता है | इनकहानियों के माध्यम से आपको ज़रूरी ज्ञान हासिल होंगे जो आपको आपकी लाइफ मे बहुत काम आएंगे | यहाँ पर बताई गई हर कहानी से आपको एक नई सीख मिलेगी जो आपके जीवन मे बहुत काम आएगी | हर कहानी मे कुछ न कुछ संदेश और सीख छुपी हुई है | तो ऐसी कहानियो को ज़रूर पढ़े और अपने दोस्तो और परिवारों मे भी शेयर करे 

 

 

 

 

सबसे बड़ा पुण्य | moral story in Hindi – एक राजा बहुत बड़ा प्रजापालक था, हमेशा प्रजा के हित में प्रयत्नशील रहता था. वह इतना कर्मयोगी  था कि अपना सुख, ऐशो-आराम सब छोड़कर सारा समय जन-कल्याण (लोगो की भलाई) में ही लगा देता था . यहाँ तक कि पूजा पाठ – भजन कीर्तन , के  लिए भी समय नहीं निकाल पाता था.

एक सुबह राजा वन की तरफ भ्रमण (धूमने के लिए) करने के लिए जा रहा था, कि उसे एक देव के दर्शन हुए. राजा ने देव को प्रणाम करते हुए उनका अभिनन्दन किया और देव के हाथों में एक लम्बी-चौड़ी पुस्तक देखकर उनसे पूछा- “ महाराज, आपके हाथ में यह क्या है?”

 

यहां click करे-कैसे बना उल्लू माँ लक्ष्मी का वाहन | लक्ष्मी माता  ने क्यो चुना उल्लू को ? जानने के लिए यहा click करे और जानिए धर्म से जुड़े रोचक तथ्य 

 

सबसे बड़ा पुण्य | moral story in Hindi

देव बोले “राजन! यह हमारा बहीखाता है, जिसमे सभी भजन करने वालों के नाम हैं.”

राजा ने निराशायुक्त भाव से कहा- “कृपया देखिये तो इस किताब में कहीं मेरा नाम भी है या नहीं?”

देव महाराज किताब का एक-एक पृष्ठ उलटने लगे, परन्तु राजा का नाम कहीं भी नजर नहीं आया.

राजा ने देव को चिंतित देखकर कहा- “महाराज ! आप चिंतित ना हों , आपके ढूंढने में कोई भी कमी नहीं है. वास्तव में ये मेरा दुर्भाग्य है कि मैं भजन-कीर्तन के लिए समय नहीं निकाल पाता, और इसीलिए मेरा नाम यहाँ नहीं है.”

 

सबसे बड़ा पुण्य | moral story in Hindi

 

उस दिन राजा के मन में आत्म-ग्लानि-सी उत्पन्न हुई लेकिन इसके बावजूद उन्होंने इसे नजर-अंदाज कर दिया और पुनः परोपकार की भावना लिए दूसरों की सेवा करने में लग गए.

कुछ दिन बाद राजा फिर सुबह वन की तरफ टहलने के लिए निकले तो उन्हें वही देव महाराज के दर्शन हुए, इस बार भी उनके हाथ में एक पुस्तक थी. इस पुस्तक के रंग और आकार में बहुत भेद था, और यह पहली वाली से काफी छोटी भी थी.

 

यहां click करे- क्या कर्मो का फल और दंड इसी जन्म मे मिल जाता है ? कुछ कर्मो का फल और दंड अगले कई  जन्मो तक झेलना पड़ता है | इंसान अपना भाग्य -किस्मत अपने कर्मो से से बनाता हैयहा click करे और जानिए धर्म से जुड़े रोचक तथ्य  karmo ka fal -motivational story in hindi for success

 

 

 

 

 

राजा ने फिर उन्हें प्रणाम करते हुए पूछा- “महाराज ! आज कौन सा बहीखाता आपने हाथों में लिया हुआ है?”

देव ने कहा- “राजन! आज के बहीखाते में उन लोगों का नाम लिखा है जो ईश्वर को सबसे अधिक प्रिय हैं !”

राजा ने कहा- “कितने भाग्यशाली होंगे वे लोग ? निश्चित ही वे दिन रात भगवत-भजन में लीन रहते होंगे !! क्या इस पुस्तक में कोई मेरे राज्य का भी नागरिक है ? ”

 

 

देव महाराज ने बहीखाता खोला , और ये क्या , पहले पन्ने पर पहला नाम राजा का ही था।

राजा ने आश्चर्यचकित होकर पूछा- “महाराज, मेरा नाम इसमें कैसे लिखा हुआ है, मैं तो मंदिर भी कभी-कभार ही जाता हूँ ?

देव ने कहा- “राजन! इसमें आश्चर्य की क्या बात है? जो लोग निष्काम होकर संसार की सेवा करते हैं, जो लोग संसार के उपकार में अपना जीवन अर्पण करते हैं.

 

 

जो लोग मुक्ति का लोभ भी त्यागकर प्रभु के निर्बल संतानो की सेवा-सहायता में अपना योगदान देते हैं उन त्यागी महापुरुषों का भजन स्वयं ईश्वर करता है.

 

ऐ राजन! तू मत पछता कि तू पूजा-पाठ नहीं करता, लोगों की सेवा कर तू असल में भगवान की ही पूजा करता है. परोपकार और निःस्वार्थ लोकसेवा किसी भी उपासना से बढ़कर हैं.

 

देव ने वेदों का उदाहरण देते हुए कहा- “कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेच्छनं समाः एवान्त्वाप नान्यतोअस्ति व कर्म लिप्यते नरे..”
अर्थात ‘कर्म करते हुए सौ वर्ष जीने की ईच्छा करो तो कर्मबंधन में लिप्त हो जाओगे.’सबसे बड़ा पुण्य | moral story in Hindi

 

राजन! भगवान दीनदयालु हैं. उन्हें खुशामद नहीं भाती बल्कि आचरण भाता है.. सच्ची भक्ति तो यही है कि परोपकार करो. दीन-दुखियों का हित-साधन करो. अनाथ, विधवा, किसान व निर्धन आज अत्याचारियों से सताए जाते हैं इनकी यथाशक्ति सहायता और सेवा करो और यही परम भक्ति है..”

 

राजा को आज देव के माध्यम से बहुत बड़ा ज्ञान मिल चुका था और अब राजा भी समझ गया कि परोपकार से बड़ा कुछ भी नहीं और जो परोपकार करते हैं वही भगवान के सबसे प्रिय होते हैं।

 

यहाँ  click करे – कर्मों का फल या दंड मिलता ही मिलता है ऐसी 4 कहानिया  जो आपको अच्छा कर्म करने के लिय मजबूर कर दे यहा click करे और जानिए धर्म से जुड़े रोचक तथ्य 

 

मित्रों, जो व्यक्ति निःस्वार्थ भाव से लोगों की सेवा करने के लिए आगे आते हैं, परमात्मा हर समय उनके कल्याण के लिए यत्न करता है. हमारे पूर्वजों ने कहा भी है-सबसे बड़ा पुण्य | moral story in Hindi

 

“परोपकाराय पुण्याय भवति” अर्थात दूसरों के लिए जीना, दूसरों की सेवा को ही पूजा समझकर कर्म करना, परोपकार के लिए अपने जीवन को सार्थक बनाना ही सबसे बड़ा पुण्य है. और जब आप भी ऐसा करेंगे तो स्वतः ही आप वह ईश्वर के प्रिय भक्तों में शामिल हो जाएंगे

 

 

 

 

दोस्तों ये कहानी आपको कैसी लगी? दोस्तो इस कहानी (motivational story) से आपको क्या सीख मिलती है ? नीचे कमेंट करके जरूरु बताना। और इस जानकारी (article) को जादा से जादा लोगो तक शेयर करना ताकि उन तक भी यह  पहुच सके।

 

और यदि आपके पास भी कोई motivational story  , या कोई भी ऐसी ज़रूरी सूचना  जिसे आप लोगो तक पहुचाना   चाहते हो तो वो आप हमे इस मेल (mikymorya123@gmail.com) पर अपमा नाम और फोटो सहित send कर सकते है ।  उसे हम आपके द्वारा सेंद की हुई article के साथ लगा कर यहा पोस्ट करेंगे जितना अधिक ज्ञान बाटोगे उतना ही अधिक ज्ञान बढेगा। धन्यवाद.

 

 

यहां click करे- जानिए क्या है तुलसी पूजा का महत्तव | क्यो ज़रूरी है तुलसी माता की पूजा | तुलसी पूजा के फायदे जानने के लिए यहा click करे और जानिए धर्म से जुड़े रोचक तथ्य 

 

 

 

यहां click करे- इस दिन भूल कर भी न तोड़े तुलसी के पत्ते | tulsi ke patteजानने के लिए यहा click करे और जानिए धर्म से जुड़े रोचक तथ्य 

 

 

सबसे बड़ा पुण्य | moral story in Hindi

 

 

यहां click करे-कैसे बना उल्लू माँ लक्ष्मी का वाहन | लक्ष्मी माता  ने क्यो चुना उल्लू को ? जानने के लिए यहा click करे और जानिए धर्म से जुड़े रोचक तथ्य 

 

यहा click करे- गौतम बुद्ध और अंगुलिमाल-real life inspirational stories in hindiजानने के लिए यहा click करे और जानिए धर्म से जुड़े रोचक तथ्य 

सबसे बड़ा पुण्य | moral story in Hindi

 

 

यहां click करे-tulsi poojan | भूल कर भी मत चढ़ाना गणेश जी को तुलसी| जानिए क्या है इसके पीछे की कहानी |जानने के लिए यहा click करे और जानिए धर्म से जुड़े रोचक तथ्य 

 

 

 

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!