Olympic history ओलंपिक की शुरुआत

Olympic history – दोस्तो खेलो (sports)का  जिंदगी मे कितना महत्तव है यह हर कोई जानता है | खेल जीवन का एक अनमोल हिस्सा है जो शरीर को न सिर्फ मानसिक और शारीरिक तौर पर मजबूत रखता है बल्कि यह एक बेहतरीन मनोरंजन का भी अनुभव करवाता है |

 

 

खेलो के मामले मे सबसे बड़ा मंच ओलम्पिक (Olympic) है जसमे कई प्रकार के खेलो का आयोजन करवाया जाता. ओलम्पिक (Olympic) मे जीतने वाले खिलाड़ी को उनके पोजीशन के हिसाब से तीन प्रकार के पदक से सम्मानित किया जाता है.

 

जो खिलाड़ी बेहतरीन प्रदर्शन करता है उसे स्वर्ण पदक से सम्मानित किया जाता है. बाकि के दो खिलाड़ियों को सिल्वर और ब्रॉन्ज मैडल द्वारा सम्मानित किया जाता है.

 

 

Olympic history ओलंपिक की शुरुआत

ओलम्पिक (Olympic) को खास बनाती है उसके आयोजन मे जलाई गई मशाल.जिसका इतिहास उतना ही पुराना है जितना पुराना यह खेल है.

 

 

क्या आपने कभी सोचा है की क्यों इस मशाल को जलाया जाता है? क्यों इसे इतना खास माना जाता है?
और क्यों ओलम्पिक (Olympic) खेलो की शुरुआत की गई थी? तथा इस खेल का नाम ओलम्पिक (Olympic) कैसे पड़ा?ओलंपिक के चिन्ह यानि 5 छल्लो का राज क्या है ?

 

 

तो चलिए इन सब सवालों का जवाब जानने की कोशिश करते है और इतिहास के उस दौर मे चलते है जहाँ से इसकी शुरुआत हुई..

athens-olympic

 

इस खेल की शुरुआत ईसामसि के जन्म से भी पूर्व यूनान मे हुई थी. इन खेलो को यूनान की राजधानी एथेंस मे धार्मिक खेलो के रूप मे खेला जाता था.

इन खेलो का आयोजन उस समय देवताओं के देवता ज्यूस के सम्मान मे किया जाता था.

इसके इलावा यह खेल सैनिको के प्रशिक्षण और यूद्ध अभ्यास मे भी काम आते थे.

 

athens-olympic

 

धारणाओं की माने तो उस  समय इन खेलों मे ., रथ की तैयारी, घुड़ सवारी, कुश्ती, दौड़ और मुक्केबाजी शामिल होते थे. 

 

athens-olympic
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ओलंपिक (Olympic) मशाल का इतिहास 

athens-olympic
athens-olympic

माना जाता है की उस समय ओलम्पिक (Olympic) मे जो मशाल जलाई जाती थी वह  मशाल सूरज की गर्मी से जलाई जाती थी.
इस मशाल को तब तक जलाए रखा जाता था जबतक खेलो का समापन ना हो जाए.

 

यह मशाल बहुत ही महत्त्वपूर्ण मानी जाती थी क्योकि उस समय अग्नि को बहुत पवित्र माना जाता था |

यह प्रथा आज भी जारी है |

 

तब से लेकर आज भी हर ओलंपिक (Olympic) खेलो का आगाज इन्ही मशालों को जलाकर किया जाता  है |

 

ओलम्पिक (Olympic) की यह मशाल जीवन मे कभी ना रुकने , हार ना मानने तथा बार बार प्रयास करते रहने का प्रतिक है.

 

आधुनिक ओलंपिक मे मशाल जलाकर खेल का आरंभ करने की शुरुआत सबसे पहले 1928 मे एम्स्टर्डम मे की गई थी |

 

 

प्राचीन समय मे इन्हे खेल के रूप मे ही नहीं बल्कि योद्धा अपने युद्ध अभ्यास के लिए भी इन खेलो का आयोजन करते थे |

 

लेकिन आज के समय मे ओलंपिक बहुत बड़े पैमाने पर खेली जाने वाली प्रतियोगिताओं का एक  मेला है | जिसमे कई अलग अलग देशो से बेहतरीन खिलाड़ी हिस्सा लेते है | 

 

 

कैसे और कहाँ से पड़ा इन खेलों का नाम ओलंपिक (Olympic) पड़ा?

 

बाद मे इन खेलो का आयोजन ब्रिस के ओलपिंया  पर्वत के पीछे करवाया जाने लगा वही से इन खेलो को उस पर्वत के नाम पार रख दिया गया.

तब से इन खेलों को ओलंपिक (Olympic) खेलों के नाम से जाना जाने लगा | 

प्राचीन समय मे ओलम्पिक (Olympic) मे जीतने वाले को ज्यूस भगवान की सुंदर मूर्ती दी जाती थी.

प्राचीन ओलम्पिक (Olympic) खेलो का आख़री आयोजन 394 ईस्वी मे हुआ था.

 

उसके बाद रोम के सम्राट थेओरोसिस ने इसको मूर्ती पूजा का आयोजन बता कर इन खेलो को बंद करवा दिया था. यानी प्रतिबंध लगवा दिया

 

इसके बाद सेकड़ो सालो तक यह खेल नहीं करवाए जा सके. जिसके चलते लोगो ने इसे भुला दिया था..

 

आधुनिक ओलंपिक (Olympic) खेलो का आरंभ 1896 

इसके बाद एक बार फिर से आज के  आधुनिक युग मे एक नए सिरे से एक नए रूप मे ओलम्पिक खेलों की शुरुआत की गई. इसके बहुत से नए खेल भी शामिल किए गए |

Panathenaic-Stadium
Panathenaic Stadium 1896

 

जिसका आयोजन इंटरनेशनल कमेटी द्वारा सबसे पहली बार 1896 मे एक सिस्टेमेटिक ढंग से ग्रीस यानी यूनान की राजधानी एथेंस मे पेंथेनिक स्टेडियम मे करवाया गया |

international Olympic committee  का मुख्यालय लुसाने यानी स्विट्जरलैंड मे है |

अब के आधुनिक ओलंपिक मे लगभग सभी प्रकार के खेल सम्मिलित हैं |

 

आधुनिक ओलम्पिक (Olympic) खेलो के जनक पियरे दि कोबर्टन (Pierre de Coubertin) को माना जाता है.

इन्ही की तमाम कोशिशो के बाद ही ओलंपिक की यह इंटरनेशनल कमेटी तैयार की गई और इन खेलो का आयोजन फिर से करवाया जा सका था .

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Pierre de Coubertin

international committee of Olympic established in 1896

 

ओलंपिक (Olympic) के झंडे और सिंबल का इतिहास 

 

ओलम्पिक (Olympic)खेल का झंडा सफ़ेद रंग का होता है जिस पर  5 एक ही आकर के छल्ले (rings) बने होते है जो की एक दूसरे से जुड़े होते है. इन छल्लो के रंग अलग होते है.

ओलंपिक (Olympic) के इन छल्लो की शुरुआत 1912 से की गई | 1912 मे इन छल्लो को सफ़ेद झंडे मे उकेरा गया |

 

 

Olympic-Ring
Olympic rings

 

 

ओलम्पिक (Olympic) के 5 छल्लो का सुझाव भी पियरे दि कोबर्टन (Pierre de Coubertin) की ही थी.

इनके मन मे एक विचार आया की कोई ऐसा चिन्ह /सिंबल बनाना होगा जो ओलम्पिक को दर्शाए.

जिसके चलते इन्होने अपनी टीम के साथ  लम्बे समय के सोच विचार के बाद ओलम्पिक (Olympic) के लिए झंडे का यह डिजाइन तैयार किया. जिस पर यह एक दूसरे से जुड़े हुए अलग अलग रंग के 5 छल्ले बनाए गए.

 

 

ओलंपिक (Olympic) के सभी चिन्ह (symbol) यानो 5 rings क्या दर्शाती है ?

झंडे पर बने 5 अलग अलग रंग के यह छल्ले बेहद ही खास है जो की अलग अलग देश को दर्शाती है. यह 5 rings धरती के सार्वभौमिकता यानी धरती के अलग अलग  हिस्सो (महाद्वीपो) की एकजुटता को दर्शाती है |

 

पहला छल्ला नीला रंग का है जो की योरोप महाद्वीप को दर्शाता है |

दूसरा छल्ला पिला रंग जा है जो की एशिया महाद्वीप को दर्शाता है |

तीसरा छल्ला काला रंग का है जो की अफ्रीका महाद्वीप को दर्शाता है |

चौथा छल्ला हरा रंग का है जो की आस्ट्रेलिया महाद्वीप को दर्शाता है |

पाँचवा छल्ला लाल रंग का है जी की अमेरिका महाद्वीप को दर्शाता है |

 

 

 

कब कब नहीं हुआ ओलंपिक (Olympic) का आयोजन ?

यही से यह सुनिश्चित किया गया की हर चार साल मे ओलम्पिक खेलो का आयोजन अलग देशों मे करवाया जाएगा. तब से हर चार साल बाद ओलम्पिक खेलों का आयोजन होता आरहा है.

चार साल मे यर्ह आयोजन एक बार एक ही देश मे करवाया जाता है फिर अगली बार किसी अन्य देश मे.

इस बींच तीन बार ऐसा समय भी आया जब ओलम्पिक खेलो का आयोजन नहीं करवाया जा सका.

पहली बार 1916 मे प्रथम विश्व युद्ध के चलते यह आयोजन नहीं करवाया जा सका

इसके बाद सन 1940 और 1944 मे दूसरे विश्व युद्ध के चलते यह आयोजन नहीं करवाए जा सके.

 

 

ओलंपिक को तीन  भागो मे बाटा गया है |

1. ग्रीस्म कालीन ओलंपिक (summer olympic) 2. शीत कालीन ओलंपिक (winter olympic) 3. पैरालम्पिक (paralympic)

 

 

ऋतुओं के अनुसार ओलंपिक दो भागो  मे बाटा गया है 1. ग्रीस्म कालीन ओलंपिक (summer olympic) 2. शीतकालीन ओलंपिक (winter olympic) 

 

शीत कालीन ओलंपिक (winter olympic) खेलो की शुरुआत फ्रांस मे 1924 से हुई थी | winter olympic खेलो का आयोजन मुख्यतः बर्फ पर / बर्फीले पर्वतो पर करवाया जाता है |

 

 

पैरालम्पिक (paralympic)

 

 

international-paralympic-committee
international paralympic committee

 

 

जो लोग दिव्याङ होते है उनके लिए पैरालम्पिक (paralympic) होता है यह भी ग्रीस्म कालीन ओलंपिक और शीतकालीन ओलंपिक  के रूप मे करवाए जाते है |

पैरालम्पिक (paralympic) का आयोजन इंटरनेशनल पैरालम्पिक कमेटी  (international paralympic committee)

के द्वारा किया जाता है | इसका मुख्यालय (head quoter) बान यानी जर्मनी मे है |

 

द्वारा करवाया जाता है | पैरालम्पिक (paralympic)  के सभी कायदे कानून ,तथा यह खेल कब कहाँ होना है यह सब इंटरनेशनल पैरालम्पिक कमेटी  (international paralympic committee)    सुनूश्चित (descide) करती है |

 

पैरालम्पिक (paralympic) का सबसे पहला आयोजन 1960 मे रोम (इटली) मे करवाया गया था |

 

 

इस बार 2020 का ग्रीस्म कालीन ओलंपिक (summer olympic) टोक्यो (tokyo) जापान मे किया जाएगा |

इसके बाद 2022 मे शीत कालीन ओलंपिक (winter olympic) बीजिंग मे होगा |

इसके बाद 2024 मे ग्रीस्म कालीन ओलंपिक (summer olympic) पेरिस मे होगा |

इसके बाद 2026 मे  शीत कालीन ओलंपिक (winter olympic) USA मे होगा 

 

 

अभी तक भारत ने कुल 28 पदक जीते है जिसमे से 9 स्वर्ण ,7 रजत और 12 कांस्य पदक है |

 

भारत को सबसे पहला स्वर्ण पदक 1936 मे जर्मनी मे हाकी के खेल मे  मिला था |

यदि बात की जाए की भारत का वह सबसे पहला व्यक्ति कौन था जिसने ओलंपिक मे स्वर्ण पदक जीतातो वो है अभिनव बिंद्रा जिन्होने 2008 के ओलंपिक खेलो मे स्वर्ण पदक जीता था | यह इन्होने गन शूटिंग के खेल मे जीता था |

 

तो आपको यह जानकारी कैसी लगी नीचे कमेन्ट करके जरूर बताएं |

 

 

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