maha shivratri 2020 पूजा विधि और महत्त्व

मेरी तरफ से maha shivratri 2020 की सब को दिल  से हार्दिक शुभ कामनाए | दोस्तों इस बार 2020 की maha shivratri बहुत ही खास मानी जा रही है कहा जा रहा है की इस महा शिरात्रि का संयोग पूरे 51 साल बाद आया है |

यह संयोग आज से 51 साल पहले बना था जो की हर शिव भक्त के लिए बहुत लाभ दाई सिद्ध हुआ था | तो इस बार आप भी 2020 की इस महाशिरात्रि के अद्भुत अवसर पर पूरी श्रद्धा और भक्ति भाव से शिवलिंग और शिव जी की पूजा करे |

51 साल बाद आए इस अद्भुत अवसर को अपने हाथ से मत जाने देना |

maha shivratri 2020 – दोस्तों यह बताते हुए बहुत ही खुशी का अनुभव हो रहा की महा शिवरात्रि (maha shivratri) का पर्व बहुत ही नजदीक है |

करोड़ो शिव भक्त इस दिन का बड़ी ही बेसबरी से इंतज़ार कर रहे होते है क्योकि हर इंसान के जीवन मे महाशिरात्रि (maha shivratri)का यह अद्भुत संयोग बहुत अधिक महत्व रखता है और महादेव हर किसी पर अपनी किरपा करते है जिससे जीवन धन्य हो जाता है |

 

maha shivratri 2020 पूजा विधि और महत्त्व

 

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इस बार 2020 मे महा शिवरात्रि (maha shivratri) 21 फरवरी को पड़ रही है |

 

भगवान भोले नाथ का यह पवित्र त्योहार हर वर्ष फरवरी माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है |इस दिन व्रत कई शिव भक्त अपनी श्रद्धा भक्ति अनुसार व्रत रकते है ,शिव पूजा शिवलिंग पूजा ,शिव की का ध्यान ,मंत्रो जा जाप ,तथा यथा संभव दान पुण्य करते है |

 

महा शिवरात्रि मुहूरत –(maha shivratri)

2020 की 21 तारीख को शाम को 5बजकर 20 मिनट से शुरू अगले दिन यानी 22 फरवरी को शाम 6 बजकर 41 मिनट से रात 12 बजकर 52 मिनट तक रहेगा | अगले दिन यानी 23 फरवरी की सुबह मंदिरो मे सभी शिव भक्त अपनी श्रद्धा अनुसार विधि विधान से मंदिरों मे शिवलिंग की पूजा कर अपने भक्ति भाव से शिव जी को प्रससन्न करेंगे |

 

 

 

महा शिवरात्रि (maha shivratri) पूजा विधि –

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दोस्तों सभी देवों मे भगवान शिव की पूजा सबसे सरल है | रोजाना शिवलिंग पर पर श्रद्धा अनुसार मात्र जल चढ़ाने से ही शिव जी प्रसन्न हो जाते है और अपने भक्त के सारे दुख दूर कर देते है |  भगवान शिव /शिवलिंग पर श्रद्धा अनुसार बेल पत्र ,धतूरा , भांग के पत्ते जल ,दूध समर्पित करने से मात्र से से उस शिव भक्त पर भगवान भोले नाथ की किरपा हो जाती है |

जी हाँ दोस्तो ऐसे ही है हमारे भोले बाबा भण्डारी  जो हर किसी पर अपनी दृष्टि बनाए रखते है |

भगवान शिव की पूजा के लिए  जिन  पूजा सामाग्री की आवश्यकता होती है वो बहुत ही सरलता से प्राप्त हो जाती है |

 

शिव पूजा सामग्री – जल ,दूध दहि ,शहद  यानि पंचामृत ,बेल पत्र ,भांग के पत्ते  धतूरा ,गन्ना या गन्ने का रस ,धतूरे का फूल ,|

तो शिवरात्रि  की सुबह  इनमे से जितना भी हो सके कोशिश यही करो की यह सब कुछ शिवलिंग पर  पूरी श्रद्धा और भक्ति भाव अनुसार समर्पित कर पाओ  | 

 

इन सामाग्री से शिवलिंग की पूजा करने की विधि और सावधानियाँ 

शिवरात्रि वाले दिन सुबह 5 बजे नहा धो कर तैयार हो जाए और अच्छे साफ थाली मे इन पूजा संगरो रख ले | 

थाली मे बेल पत्र ,धतोरा और धतूरे का फूल , भांग के पत्ते रख लें |

इसके बाद दो लोटे लें | एक लोटे मे जल भर लें और दूसरे लोटे मे कच्चा दूध  भर लें | इन सब को थाली मे रखे और शिवलिंग के पास जाए |

maha shivratri 2020

सबसे पहले ऊम नमः शिवाय  मंत्र का जाप करते हुए शिवलिंग पर लोटे से जल चढ़ा कर पूजा की शुरुआत करे

इसके बाद ऊम नमः शिवाय मंत्र का जाप करते हुए पहले शिवलिंग के ऊपर बेल पत्र रखें फिर धतूरा तथा धतूरे का फूल तथा भंग के पत्ते अर्पित करें इसके बाद पंचामृत या फिर दूध शिवलिंग पर समर्पित करे|

यह सब समर्पित करते हुए ऊम नमः शिवाय का जाप रुकना नहीं चाहिए | लगातार आपको पूजा शुरू होने से खत्म होने तक ऊम नमः शिवाय का जाप करते रहना है |

तरल रूप मे आप शिवलिंग पर गन्ने का रस ,जल , दूध ,दहि ,शहद मे से कुछ भी चढ़ा सकते है |

 

शिवलिंग पर धतूरा अर्पित करने से शत्रुओं का भय खत्म होता है और जीवन मे शुभ मंगल होता है |

इसके इलवा गन्ना या गन्ने का रस अर्पित करना चाहिए गन्ने की मिठास को सुख का प्रतीक माना जाता है |शास्त्रो मे गन्ने को बहुत पवित्र माना गया है |

और माना जाता है की गन्ने के रस से शिवलिंग का रुद्रभिषेक करने से  धन धान्य की प्राप्ति होती है तथा गृह दोषो से भी मुक्ति मिलती है |

बेल पात्र शिव जी को अति प्रिय है | तीन पत्तों वाला बेल पत्र को  त्रिदेवो यानि ब्रम्हा ,विष्णु, महेश का प्रतीक माना गया है |

 

प्रचलित कथाओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव ने समुद्र मंथन के समय सबसे खतरनाक हलाहल विष का पान पी कर धरती  की रक्षा की थी 

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maha shivratri 2020

विष को भगवान  शिव जी ने अपने कंठ मे धारण कर लिया था जिस वजह से उनका सारा कंठ नीला पड़ गया था | यहीं से उनका नाम नील कंठ भी पड़ा|

हलाहल विष के असर से शिव जी के घबराहट होने लगी उनका मस्तिस्क आग की भांति जलने लगा | यह देख देवी देवताओं ने शिव जी जल और बेल पत्र अर्पित किया | क्योकि बेल पत्र की तासीर ठंडी होती है | जिस वजह से हलाहल विष का असर कम हो गया था |

बस तभी से शिव जी को बेल पत्र चढ़ाया जाता आरहा है |

 

 

 

पूजा करते समय ध्यान रखने वाली बाते – यह गलतियाँ भूल कर भी मत करना 

  • ध्यान रहे लोटा साफ सुथरा होना चाहिए | मतलब लोटा किसी भी खाद सामग्री के लिए उपयोग मे लाया हुआ लोटा नहीं होना चाहिए |
  • जल साफ होना चाहिए और उस जाम मे गंगा जल अवश्य डाले चाहे एक बूंद ही डाले लेकिन जरूर डाले |
  • शिवलिंग पर जल या दूध को ऊम नमः शिवाय का जाप करते हुए धीरे धीरे पतली धार से चढ़ाना है |
  • दूध कच्चा होना चाहिए | और ध्यान रहे की दूष तांबे के पात्र(लोटे) मे नहीं होना चाहिए |
  • बेल पहले से चढ़ाया हुआ नहीं होना चाहिए |
  • बेल के पच्चे कटे फटे नहीं होने चाहिए | शिवलिंग पर चढ़ाने से पहले इन सब को अच्छे से धो ले
  • इस दिन किसी भी प्रकार के मांस मदिरा का सेवन न करे |
  • पूजा खत्म होने तक कुछ भी न खाएं | इस दिन हो सके तो व्रत जरूर रखे और सिर्फ फल का ही सेवन करे |
  • इस दिन भूल कर भी भगवान शिव को यानि शिवलिंग पर नारियल का पनि नहीं चढ़ाना चाहिए |
  • महा शिवरात्रि (maha shivratri) वाली दिन भगवान शिव को और शिवलिंग पर कभी भी सिंदूर ,हल्दी ,तुलसी और कुमकुम नहीं चढ़ाना चाहिए |
  • महाशिवरात्री (maha shivratri) पर भगवान शिव को तिल और चावल बिलकुल न चढ़ाएँ |
  • महाशिवरात्री (maha shivratri) पर भगवान शिव को काले रंग का वस्त्र बिलकुल भी अर्पित न करे | 

 

क्यों मनाई जाती है महा शिवरात्रि ? महाशिवरात्री की धार्मिक मान्यताएँ 

पुराणों के अनुसार इसकी अलग कथाएँ प्रचलित है |

कहा जाता है की भगवान भोले नाथ इस दिन धरती पर  शिवलिंग के रूप मे  प्रगट हुए थे |इसी दिन सबसे पहले भगवान विष्णु और भगवान ब्रम्हा ने शिवलिंग की पूजा इसी दिन की थी | और यही कारण है महाशिवरात्री(maha shivratri) के दिन शिवलिंग की विशेस पूजा की जाती है |

इसके इलवा कई ग्रन्थों मे इस दिन को माता पार्वती शिव जी के विवाह का दिन भी माना जाता है | अधिक तर लोग इसी दिन की खुशी मे यह दिन मनाते है जिसमे मान्यता है की भगवान शिव इस दिन रात्री मे माता  पार्वती के साथ धरती पर अवतरित होते है इस दिन भगवान शिव साक्षात शिवलिंग मे वास करते है |

महा शिवरात्रि का यह महापर्व न सिर्फ भारत मे बल्कि कई अलग अलग देशो मे भी मनाया जाता है |

नेपाल मे तो महाशिरात्रि की तैयारियां 3 दिन पहले से ही शुरू हो जाती है | जिसमे ईन दिन पहले से ही भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का मंडप सजना शुरू कर दिया जाता है और  इस दिन माता पार्वती तथा भगवान शिव के विवाहित जोड़े को घर घर घुमाया जाता है |

 

इसके इलवा कुछ प्रचलित कथाओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव ने समुद्र मंथन के समय सबसे खतरनाक हलाहल विष का पान पी कर धरती  की रक्षा की थी 

विष को भगवान  शिव जी ने अपने कंठ मे धारण कर लिया था जिस वजह से उनका सारा कंठ नीला पड़ गया था | यहीं से उनका नाम नील कंठ भी पड़ा|

हलाहल विष के असर से शिव जी के घबराहट होने लगी उनका मस्तिस्क आग की भांति जलने लगा | यह देख देवी देवताओं ने शिव जी जल और बेल पत्र अर्पित किया | क्योकि बेल पत्र की तासीर ठंडी होती है | जिस वजह से हलाहल विष का असर कम हो गया था |

बस तभी से शिव जी को बेल पत्र चढ़ाया जाता आरहा है |

 

पूरी भक्ति भाव से इस दिन शिव जी की पूजा स्तुति करने से हर इच्छाएँ पूरी होती है जीवन मे कस्ट दूर होते है |

 

 

 

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