Jamshedji-tata

Jamshedji TATA biography hindi

श्री जमशेद जी टाटा जीवन परिचय – Jamshedji TATA biography hindi – Jamshedji tata success story hindi.

 

भारत मे ऐसे बहुत से लोग हुए जिन्होंने अपने अपने तरीके से देश को आगे लेजाने मे अपनी अपनी भूमिका निभाई. जैसे चाणक्य, स्वामी विवेकानंद जी, महात्मा गाँधी जी,भीम राव आम्बेडकर,.

लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हुए जिन्होंने देश को आर्थिक तौर पर मजबूत बनाने के लिये,अपनी बड़ी भूमिका निभाई. जिसमे सबसे पहला नाम जमशेद जी टाटा आता है.

जी हाँ वही Jamshedji tata जिन्होंने जो अपने देश और देशवासियो के लिए कमाते है, उनके लिए कंपनी के लाभ-हानि से ज्यादा नैतिकता का महत्त्व है 

 

जी हाँ दोस्तों ये भारत के पहले ऐसे इंसान बने जिन्होंने देश को आर्थिक तौर पर मजबूत बनाने के लिये निजी स्वार्थ की मानसिकता से कभी नहीं सोचा.

 

उनका मानना था की ज़ब हर कोई बढ़ेगा तो देश बढ़ेगा, सिर्फ एक इंसान के पास सारी संपत्ति जमा होने से देश कभी प्रगति नहज कर सकता. अतः ऐसे मे देश के हर व्यक्ति को सशक्त होना होगा.

 

जी हाँ हम बात कर रहे है उस जमशेद जी टाटा की जिन्होंने ये समझा! की देश मे बिना इंडस्ट्रियल क्रांति के देश आर्थिक तौर पर कभी प्रगति नहीं कर सकता. भारत मे resources कच्चे माल की कमी नहीं,  कमी है तो बस सही जानकरी, सही मार्गदर्शन और सही शिक्षा की.

 ये वही जमशेद जी टाटा है जिनके नाम पर ही पूरे जिले का नाम पड़ ही जमशेद नगर पड़ गया. अब इससे बड़ी उपाधि क्या होगी.

 

तो चलिए आपको इस महान इंसान के जीवन परिचय से अवगत करवाते है और जानते है की कितने संघर्ष के बाद इन्होने देश की तस्वीर बदली, लोगो की सोच बदली और कैसे आने वाली industrial क्रांति का बीज बोया.

 

Jamshedji tata biography hindi 

श्री मान जमशेदजी टाटा का जन्म 3 मार्च 1839 मे गुजरात के नवसारी जिले मे हुआ था. उनके पिता का नाम नुसीरवानजी और माता का नाम जीवनबाई टाटा था।

 

पारसी पादरीओ के घर मे  नुसीरवानजी पहले व्यापारी थे।

भाग्य परिवार को मुंबई लें आया, मात्र 14 वर्ष की उम्र मे Jamshedji tata अपने पिता के साथ व्यवसाय करने लगे।

 17 वर्ष की उम्र मे Jamshedji tata ने एलफ़िंसटन कॉलेज मे अपनी पढ़ाई पूर्ण की, उसी दौरान उनका विवाह हीरा बाई दबू से हुआ। 1858 मे स्नातक पूर्ण किया और पूर्ण रूप से व्यवसाय मे जुड़ गए।

 

Jamshedji करियर की शुरुआत

29 वर्ष की उम्र तक वें पिता के साथ कारोबार मे जुड़े रहे लेकिन मंजिल कहीं और थी.  इसलिए उन्होंने अपने बचत के 21000 Rs. से सन 1869 मे एक दिवालिया तेल कारखाना ख़रीदा उसे Jamshedji tata ने रुई के कारखाना मे परिवर्तत कर दिया.

उस फैक्ट्री का नाम एलेक्जेंडर रखा गया।

वह दौर अत्यंत कठिन था अंग्रेज अत्यंत बर्बरता से 1857 की क्रांति को कुचलने मे सफल हुए.

2 वर्ष पश्चात  मुनाफे कमा कर कारखाने को बेच दिया.

 

उस मुनाफे से Jamshedji tata ने सन 1874 मे नागपुर मे एक रुई का कारखाना की स्थापना की, यह फैक्ट्री सिर्फ नागपुर मे ही स्थापित करने की मुख्य वजह वहाँ आस पास आसानी से मिलने वाली सुविधा और resources थे. 

 

महारानी विक्टोरिया ने उस समय “भारत की महारानी” का ख़िताब जीता था इसलिए कारखाने का नाम “इम्प्रेस्स मील” रख दिया गया.

 

सन 1869 तक टाटा परिवार को एक छोटा व्यापारी समूह समझा जाता था.

 जिसे मुंबई जगत मे backbencher समझा जाता था, लोगो के उसी भ्रम को तोड़ते हुए Jamshedji tata ने इम्प्रेस मिल स्थापना कर डाली.

 

आलोचनाओं का होना पड़ा शिकार 

उस समय टेक्सटाइल market मुंबई मे हुआ करती थी इसलिए ज़ब जमशेद जी ने नागपुर मे मिल डाली तो उनकी बहोत आलोचना हुई, एक मारवाड़ी फाइनेंसर ने “इम्प्रेस मील” पर निवेश करने पर बोला इस मील पर पैसा लगाना मतलब मिट्टी मे सोना दबाने जैसा है, दरअसल जमशेदजी ने नागपुर को तीन कारणों से चुना था कपास का उत्तपादन आसपास के इलाकों मे होता था रेलवे स्टेशन नजदीक था, पानी और  इधन की प्रचूर मात्रा उपलब्ध थी.

 

Jamshedji की पहली पहली स्वदेशी कंपनी

सन 1874 मे जमशेदजी ने भारतीय कारखाना इतिहास मे अद्भुत कार्य किये. यह घटनाए भारतीयों के लिये लिये सम्मानज पल बन गए. 

उन्होंने “द सेंट्रल इंडिया स्पीनिंग वीविंग एंड मैन्युफैक्चरिंग” की स्थापना की। ये भारतीयों द्वारा पहली कंपनी थी जिसका share का bombay exchange मे कारोबार होता था।

Jamshedji-tata

 उस समय इस कंपनी की पूँजी 5 लाख रूपए थी जिसमे से जमशेदजी ने 1.50लाख रूपए निवेश किये, शायद इसलिए जमशेदजी को मैनेजिंग डायरेक्टर बना दिया गया.

 

डायरेक्ट बनते ही उन्होने इस कंपनी के बैनर तले एक कपास मील बनाने का निर्णय लिया। 

 

इस उद्देश्य के लिए उन्होने नागपुर को चुना, इस मील की स्थापना से लोगों को रोजगार के कई अवसर मिले इसलिए जमशेदजी लोगों के नजर मे चमकता सितारा साबित हुए।

 

गंभीर आर्थिक झटका 

अपने कारोबारी जीवन के शुरुआत मे ही एक गंभीर आर्थिक झटका लगा. कारोबारी साजेदारी प्रेमचंद्र रायचंद्र का कर्ज उतारने के लिए उन्हें अपना घर और जमीन जायदाद बेचनी पड़ी, इसके आलावा 1887 मे खरीदी मील मे उनकी पूरी जमा पूँजी लग गई और वें आर्थिक संकट से घिर गए, फिर भी जमशेदजी ने हार नहीं मानी अंततः वें सभी मुश्किलों से लड़ते हुए ऊपर उभर कर एक बड़ा नाम बन गए। 

 

Jamshedji tata की महान दूरदर्शी सोच 

जमशेदजी एक अलग ही व्यक्तित्व के मालिक थे, उन्होंने ना केवल कपडे बनाने के नए नए तरीके अपनाये बल्कि अपने कारखाने मे काम करने वाले कर्मचारियों का भी ख्याल रखा, उनके भले के लिए अनेक नए श्रमनिधियां अपनाइ, जमशेदजी को उनके कर्मचारी बहोत मानते थे क्योकि कर्मचारियों के अनेक सुविधा का ख्याल रखा था यही कारण था की उनकी मीले, (कारखाने) ना केवल उत्पाद की गुणवत्ता के लिए जानी जाती रही, बल्कि दुनियाभर मे सबसे अच्छी सुसंचालित मीले बन कर उभरी थी।

 

 जमशेदजी की मीलों मे कई ऐसी नीतियां बनाई थी जो अपने समय से दशकों आगे थी.

 

यह थी वो नीतियाँ :-

  •  मिसाल के रूप मे अपने कर्मचारियों के प्रशिक्षण का प्रबंध किया था,
  • उन्होने काम के घंटे कम किये कार्य स्थलो को हवादार बनाया,
  • भविष्यनिधि और ग्रेजुएटी योजना की शुरुआत की,
  • उन्होंने कर्मचारियों को दुर्घटना और बीमारी लाभ देना भी शुरुआत कर दिया था
  • कर्मचारियों को छुट्टी का भुगतान दिया और
  • रिटायरमेंट के वृद्ध पेंशन देना शुरू किया,

 

उस दौरान ये सुविधा पच्छिम के देशों मे भी नहीं दी जा रही थी, इस लिहाज से भी वो अपने समय से काफ़ी आगे थे, उन्होंने सफलता को कभी अपनी जागीर नहीं समझी बल्कि उनके लिए उनकी सफलता उन लोगों की थी जो उनके लिए काम करते थे।

जमशेदजी की अनेक राष्ट्रवादी और क्रन्तिकारी नेताओं के साथ नजदीकी सम्भन्ध थे, इनमे प्रमुख थे दादाभाई नौरोजी और फिरोजशाह मेहता। जमशेदजी और इनके सोच पर काफ़ी प्रभाव था उनका मानना था की आर्थिक स्वतंत्रता ही राजनैतिक स्वतंत्रता का आधार है।

 

श्री Jamshedji के बड़े लक्ष्य 

 जमशेदजी के 3 बड़े सपने थे १. लोहा व स्टील कंपनी खोलना २. विश्व प्रशिद्ध अध्यन केंद्र खोलना ३. जल विधुत परियोजना

 

लोहा व स्टील कंपनी :- 

सन 1882 मे नागपुर से कुछ दुरी पर चंदा जिले मे आयरन उच्च कोटि का उपलब्ध है इसलिए स्टील बनाने का सोना साकार करने के लिए जमशेदजी अग्रसर हुए.

 

परन्तु स्टील के लिए कोयला उपलब्ध ना हो सका और भी जरुरी सामग्री प्राप्त नहीं हुए इसलिए यह विचार कुछ दिन के लिए स्थागित किया।

 

लंदन तक जा पहुंचे, jamshedji tata 

सन 1899 मे जब उनकी उम्र 60 वर्ष थी जिस उम्र मे समानत: लोग रिटायरमेंट लेते है उस उम्र मे उन्हें पता चला की भारत मे कई ऐसे जगह है जहाँ लोहा और कोयला मिल सकता है तब अपने सपने को साकार करने के लिए लंदन गए ब्रिटिश गवर्नमेंट से बात करने के लिए की उन्हें भारत मे स्टील प्लांट बनानी है इस प्रस्ताव का ब्रिटिश गवर्नमेंट से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।

 

फिर वें अमेरिका गए जहाँ सर्वष्ठ टेक्निकल एडवाइज लेना चाहते थे जिससे इस बार यह कार्य मे कोई बाधा ना उत्पन्न हो वहां चार्ल्स बेस से मिले जो भारत मे सर्वे के लिए तैयार हो गए। कई साल सर्वे के बाद उन्हें एक शहर मिला जहाँ पानी, कोयला और लोहा मिल सकें वह जगह है जमशेदपुर। 

 

Jamshedji tata का दूसरा सपना विश्व प्रशिद्ध अध्यन केंद्र खोलना.

जमशेदजी का दूसरा सपना था विश्व प्रशिद्ध अध्यन केंद्र खोलना, जिस विषय मे उन्होंने स्वामी विवेकानंद से बात की और उन्होने इस प्रोजेक्ट पर काफ़ी विश्वास दिखाया जिसके बाद ब्रिटिश सरकार के लार्ड कज़ॉन के सामने प्रस्ताव रखा।

 

लार्ड कज़ॉन ने कहा भारत मे कहा ऐसे लोग है जो स्तनातक करना चाहते है और अगर करते भी है तो रोजगार कहा से मिलेगा.

 

 यह उत्तर किसी और का मनोबल गिराता परन्तु जमशेदजी ने तय कर लिया की भारत के लोगों को शिक्षा की आवश्यकता है भारत मे भविष्य मे इंडस्ट्रीयअल रेवोलुशन आएगी जिसके लिए पढ़े लिखें लोगों की जरुरत होंगी.

 

 लगातार प्रयास से ब्रिटिश सरकार ने उनके जीते जी नहीं लेकिन मृत्यु के पच्यात रिसर्च यूनिवर्सिटी खोलने का आवेदन स्वीकार किया।सन 1909मे बेंगलौर मे indian institute of science स्थापित किया गया 

 

Jamshedji tata ka तीसरा लक्ष्य जल विधुत परियोजना

जमशेदजी समय से आगे चलते थे इसलिए ज़ब मुंबई मे टेक्सटाइल मील की वजह से हर जगह प्रदुषण हो रहा था तब जमशेदजी ने clean fuel और hydroelectric इलेक्ट्रिक पावर देने का सोचा। उनकी कम्पनी ने यह सपना पूर्ण किया।

 

जमशेदजी टाटा के जीवन काल मे तीनों मे से एक भी सपना पूरा नहीं हुआ लेकिन नीव तो रख ही दी थी जो भविष्य मे पूरा होता और हुआ भी.

 

मुंबई मे ताज महल होटल का निर्माण 

एक सपना उन्होने देखा था जो उन्होने पूरा किया वह था ताजमहल होटल जो उन्होंने सन 1903 मे बनवाया।

यह होटल आज ताज होटल के नाम से जाना जाता है.

यह विश्व प्रशिद्ध भव्य होटल उस समय 4 करोड़ 21लाख के शाही खर्च से बन के तैयार हुआ। 

मुंबई की शान ताज होटल के पीछे एक कहानी चर्चित है कहा जाता है 19 वी सदी के अंत मे जमशेदजी टाटा मुंबई के सबसे महंगे होटल मे गए दुर्भाग्य से वहां उन्हें रंगभेद का शिकार होना पड़ा उन्हें होटल से बाहर तक जाने को कह दिया गया था चुंकि वह पहले ही भारत मे शानदार होटल बनाना चाहते थे यह घटना उन्हें उकसाने का काम किया जमशेदजी टाटा ने तत्काल तय किया वें भारतीयों के लिए इससे बेहतर होटल बनाएंगे.

 1903 मे समुद्री तट पर ताजमहल होटल तैयार हो गया। यह मुंबई के पहली ऐसी ईमारत थी जिसमे बीजली थी, अमेरिकी पंखे लगाए गए जर्मन लिफ्ट थी और अंग्रेज chef थे। उस समय यह होटल अन्य होटल की तुलना मे काफ़ी बेहतर था.

आज इस होटल की भव्य इमारत 110 सालो से अधिक का समय हो गया. ताज होटल मे कुल 565 कमरे है.

ताज होटल में रेस्टोरेंट, बार, कॉफी की दुकान, नाइट कल्ब, पेस्टी की दुकान, किताब की दुकान, शॉपिंग सेंटर, पार्किंग, स्विमिंग पूल, हेल्थ क्‍लब, गोल्फ़, बेबी सिटिंग, ब्यूटी सैलून, लाउंडरी, डॉक्टर-आन-कॉल, अटेच्ड बाथ, गर्म पानी, टी.वी., आदि सुविधाएँ है।

 

 

भारत की सबसे बड़ी कम्पनी 

आज टाटा ग्रुप कंपनी भारत का सबसे बड़ा कॉर्पोरेट हॉउस है जहाँ 70000 कर्मचारि को रोजगार मिला, 150 देशों मे स्थापित है, 60 करोड़ ग्राहक तथा 4 लाख share holder है।

 टाटा ग्रुप की नीव जमशेदजी टाटा ने रखी इसलिए आज उन्हें father of indian industry भी कहा जाता है यह उपलब्धि उन्होंने आजादी से पूर्व प्राप्त की, यह आसामन्य था.

 

उम्मीद करता हूं इनके जीवन परिचय से बहुत इंस्पिरेशन मिली होगी.

 

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