health tips 2 | स्टील के बर्तन मे खाना पकाना खतरनाक

health tips 2 – पूरी दुनिया मे 98% लोग खाना पकाने के लिए एल्युमीनियम या स्टील के बर्तनो का उपयोग करते है दोस्तों मैं जानता हूँ आप भी इनमे से एक है जो खाना पकाने और खाने के लिए अधिकतर स्टील के बर्तन का उपयोग करते है.

तो  इस पोस्ट मे आज हम आपको एक ऐसी सच्चाई से रूबरू करवाएंगे जिसे जानने और समझने के बाद आप हमेशा के लिए इन बर्तनो मे भोजन पकाना बंद कर देंगे.

तो चलिए जानते है की क्यों नहीं पकाना चाहिए एल्युमीनियम या स्टील के बर्तनो मे खाना.

पूरी दुनिया की बात करे तो 60 फीसदी बर्तन एल्युमीनियम या stiil के ही बने होते है. क्योंकि यह धातु बाकी धातुओं के मुकाबले सस्ती होती है.

यह बर्तन किस तरह से हमारी जिंदगी मे जहर घोल रहे है चलिए जानते है.

 

health tips 2 | स्टील के बर्तन मे खाना पकाना है कितना खतरनाक?

 

इन बर्तनो की शुरुआत – इतिहास 

आज से लगभग 100 से 150 साल पहले यह बर्तन भारत मे आए थे. इससे पहले इन बर्तनो का उपयोग पहले कभी नहीं होता था.

यह तो आपको पता ही है की अंग्रेजो ने भारत मे 200 साल तक राज किया. और इन 200 सालो मे अंग्रेजो ने भारतीय लोगो पर बहुत अत्याचार किये.

और  इन अंग्रेजो ने भारत मे बहुत से ऐसे क़ानून बनाए जिससे भारतीयों को कभी भी न्याय ही ना मिल सके.

अब यह कहते हुए मुझे बहुत दुःख हो रहा है की आज भी अंग्रेजो द्वारा बनाए गए लगभग 34 हजार 735 कानून भारत मे चल रहे है जो अंग्रेजो ने हमें लूटने के लिए बनाए  थे.

एल्युमीनियम का अविष्कार 18वीं शताब्दी मे अंग्रेजो के समय मे ही हुआ था. इसका अविष्कार अंग्रेजो ने इस मकसद से किया था ताकि वो इस धातु से हवाई जहाज मिसाइल, चंद्रयान, रॉकेट आदि, बना सके क्योंकि एल्युमीनियम मे प्रेशर बर्दाश्त करने की बहुत ताक़त होती है.

 

 

यह धातु हलकी होने के साथ बहुत मजबूत भी होती थी. इस धातु की बनी चीजों मे जंग नहीं लगती था. इस धातु को बनाने मे जो cost आती थी वो बाकी धातुओं के मुकाबले बहुत कम होती थी.

 

शोध मे निकाल कर आया चौका देने वाला तथ्य

 

उस समय इस धातू पर जब शोध किया जा रहा था तब इनके देश के उन शोध कर्ताओ ने स्टील और एलुमिनियम के बारे जानकारी देते हुए कहा की स्टील या एलुमिनियम की धातु से बने बर्तन भोजन पकाने के लिए या उसमे भोजन खाने के लिए बहुत खराब धातु है.

इस पर अंग्रेजो ने इस और जानकारी लेते हुए पुछा की यदि इस धातु के बने बर्तन पर खाना खाया जाए तो क्या होगा..

तब वो शोध करता बोले इस धातु से एक खतरनाक कैमिकल निकलता है जो की भोजन के साथ मिलकर यदि हमारे शरीर मे गया तो यह एक धीमे जहर के रूप मे काम करता है.

बस यहीं से यह बात जब भारत मे रह रहे अंग्रेजो को पता चली उन्होंने इस बर्तन का प्रयोग जेल मे बंद भारतीय क्रांतिकारियों पर की.

 

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 अंग्रेज़ो ने बना दिया कानून 

जिसके लिए सबसे पहले एक क़ानून बनाया गया की कैदियों को एलुमीनियम के बर्तन मे ही खाना दिया जाए.
भारतीय क्रन्तिकारी कैदियों को एल्युमुनियम के बर्तन मे खाना दिया जाने लगा ताकि यह ज्यादा देर तक ना जी सके. जिसके चलते कैदी लम्बे समय तक नहीं जी पाते गंभीर बीमारी के चलते मर जाते थे.

 

लेकिन भारत मे इस सच का पता ना होने की वजह से तब से लेकर आज भी जेल के कैदियों को खाना एलुमिनियम के बर्तन मे दिया जाता है.

 

दिक्कत तो तब आने लगी जब धीरे धीरे कर के यह बर्तन लोगी के रसोई घरो तक पहुंचने लगे.जिसके चलते पहले के मुकाबले अब के लोगो मे 10 गुना अधिक बीमारियां पाई जाने लगी.तब से लेकर आज तक बीमारियां पूरे भारत मे मौत का तांडव मचा रही है.

जिससे लोगो को आए दिन नई नई बीमारियां घेर रही है.

 

 

ओसतन एक दिन मे इन बर्तनो मे खाना खाने से शरीर मे लगभग 4 से 5 मिलीग्राम एल्यूमिनियम चला जाता है. और मानव शरीर इतने सारे एल्यूमिनियम को शरीर से बाहर करने यानी डाइजिस्ट करने मे असमर्थ होता है.

और यहीं से शुरू होता है बीमारियों का खेल.

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शोध पता चला की एल्यूमिनियम कितना कितना खतरनाक ?

 

एल्यूमिनियम कितना खराब है इस बात का पता लगाने के लिए श्री राजीव दीक्षित जी ने CDRI यानी “सेन्ट्रल ड्रग्स रिसर्च इंस्टिट्यूट”, के कुछ वैज्ञानिको से बात की. 

 

जिसमे उन्होने एल्यूमिनियम के बर्तनो पर आपत्ति जताते हुए कहा की आप किर्पया इस पर शोध करके बताए की यह एल्यूमिनियम शरीर के लिए कितना खतरनाक साबित हो सकता है.

 

तब शोध करने के बाद जो रिपोर्ट सामने आई वो वाकई चौंका देने वाले थे.

जिसमे साइंटिस्टों ने राजीव जी को रिपोर्ट देते हुए बताया की कोई भी भोजन बनाने और उसे रखने का दुनिया मे अगर कोई सबसे खराब मेटल है तो वो है एल्यूमिनियम.

 

राजीव दिक्षित जी यह सुन कर दंग रह गए.

18 साल की रिसर्च के बाद यह पता चला की यदि लम्बे समय तक एल्यूमिनियम के बर्तनो मे खाना खाते रहे तो एल्यूमिनियम के कण लीवर किडनी और हड्डियों मे जमा हो जाते है.

 

यह कण ब्लड सेल्स मे मिल जाते है. जिस वजह से डाइबिटीस,टी.बी, अस्थंमा, अर्थराइटिस, कमजोर यादाश, डिप्रेशन, मुँह मे छाले होना, शुगर, एपेंडिक्स की समस्या, किडनी का फेल होना, एल्जाइमर, आँखो की रौशनी कम होना, और डायरिया जैसी और भी अनेक प्रकार की 48 बीमारियां और रोग होने के खतरे बढ़ जाते है.

 

तो अब आप समझ गए होंगे की एल्यूमिनियम शरीर के लिए कितनी खतरनाक धातु है.

लेकिन बात यहीं पर खत्म नहीं होती.

यह तो थी एल्यूमिनियम के बर्तनो की सचाई.

 

अब बताते है स्टील के बर्तनो की खतरनाक सचाई.health tips 2

अब तो हर रसोईघरों मे स्टील के बर्तन देखने को मिलते है चाहे वो चिम्मच हो गिलास हो थाली हो पतीला हो या कटोरा, केतली.

आज के समय मे स्टील का उपयोग रसोई घरो मे किसी ना किसी रूप मे किया जा रहा. यानी खाना पकाने और खाने दोनों रूप मे.

आप लोगो ने स्टील के बारे यह बात तो सुनी ही होगी की स्टील नोनरिएक्टिव है. यानी इसका ना तो अच्छा असर होता है और ना ही बुरा असर.

लेकिन यह अधूरी जानकारी है..

 

चलिए जानते है स्टील का पूरा सच.health tips 2

स्टील जब बनाया जाता है तो इसमें 15% से 20% क्रोमियम और 8 से 10% निकल मिलाया जाता है.

इसी के साथ कोबाल्ट ,टाइटेनियम , कार्बन, गंधक, नाइट्रोजन का उपयोग पूरी धातु जा निर्माण किया  जाता है. जिस वजह से स्टील मे हल्का पन और मजबूती आजाती है और  लंबे समय तक बिना खराब हुए या जंग लगे चलती रहती है |

इस वजह से इसका उपयोग न सिर्फ बर्तनो मे बल्कि और भाई कई छीजो मे किया जाता है |

स्टील कोबाल्ट ,टाइटेनियम , कार्बन, गंधक, नाइट्रोजन जैसे खतरनाक केमिकल रसायन से मिलाकर तैयार किए जाते है जिस वजह से जब यह धातु गरम होती है तो इनमे एक रसायनिक क्रिया होनी शुरू हो जाती जो की आखो से नहीं दिखाई देते | इस रसायनिक क्रिया के दौरान कोबाल्ट ,टाइटेनियम , कार्बन, गंधक, नाइट्रोजन सभी रसायन हवा मे मिलने लगते है |

ठीक ऐसा ही जब स्टील के बर्तनो मे खाना पकाया जाता है तो यह रसायन भजन मे मिल जाते है | फिर इसी भोजन के द्वारा हमारे शरीर मे जाकर बीमारियाँ बनाते है |

 

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एल्यूमिनियम और स्टील कितना खराब है यह हम आपको एक प्रयोग के जरिये बताएंगे.

यह प्रयोग बहुत ही आसन है जिसे आप भी अपने घरो मे आसानी से कर सकते है.

जैसा की आप चित्र मे देख पा रहे है. इसमें एक आदमी सीधा खड़ा है और उसके हाथ खाली है. दूसरा आदमी इसको अपना दायाँ हाथ एक साइड की तरफ सीधा उठाने को कहता है वो भी सिर्फ अपने कंधो के बराबर.

 

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अब दूसरा आदमी अपने एक हाथ से बल लगाते हुए उस आदमी के दाएँ हाथ को नीचे की और धकेलने की कोशिश करता है.

लेकिन काफ़ी कोशिश के बाद भी आदमी का हाथ नीचे नहीं जाता.

इसके बाद उस आदमी के बाएँ हाथ मे स्टील का 3 किलो का एक बर्तन 2मिनट के लिए पकड़े रखने को कहा जाता है.

ठीक 2 मिनट बाद उस आदमी के  दाए हाथ को नीचे करने की फिर वही प्रक्रिया दोहराई जाती है.

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इस बार उसका दाया हाथ थोड़ा सा बल लगाने से ही बहुत आसानी से नीचे हो जाता है.

 

 

तो देखा आपने  मात्र दो मिनट ही स्टील का बर्तन पक़डने से ही शरीर की कितनी ऊर्जा खीच ली इस धातु ने.

तो सोचो स्टील के कण जब भोजन के साथ शरीर मे जाएंगे तो यह कितना लाभ या नुकसान करेंगे यह आप अब खुद समझ जाओ.

 

इसके बाद उसी समय दूसरा प्रयोग किया -इस बार उस आदमी के बाए हाथ मे ताम्बे का बर्तन पकड़ाया गया. और फिर से वही प्रक्रिया दोहराई गई.

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यकीन नहीं करोगे की इस परिणाम चौंका देने वाले थे. उस आदमी की ऊर्जा मानो फिर से वापिस आगई हो. यानी की उसका दाया हाथ नीचे नहीं हो रहा था.

 

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तो यह थी ताम्बे के बर्तन की सकारात्मक ताक़त जो शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है.

सिर्फ यही नहीं ताम्बे की जगह आप मिट्टी, सोने या चांदी के बर्तन भी उपयोग कर सकते है उसमे भी आपको सकारात्मक परिणाम ही मिलेंगे.

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दोस्तों क्या आपने कभी इस बात पर विचार किया की पहले के लोग मतलब आज से लगभग 90 से 100 साल पहले के इंसान  इतना स्वस्थ कैसे रहते थे  वो लोग 50से 60 साल की उम्र  मे भी इतना काम करते थे की आज के नौजवान भी उनका मुक़ाबला नहीं कर सकते | 

तो क्या कारण है उस समय के लोगो मे  लंबे समय तक इतना स्टेमिनर बरकरार रहता था और आज के इन्सानो मे वो बात क्यो नही ?

 

तो इसका साधारण सा जवाब है  – बीमारियाँ |

 

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उस समय के लोगो मे आज के इन्सानो के मुक़ाबले  बीमारियाँ बहुत कम या ना के बराबर पाई जाती थी | और इसके कई कारण है जिनमे से एक है उस समय के लोगो का खान पान | यानी उस समय के लोग आज की तरह किसी स्टील के बर्तन मे नहीं बल्कि तांबे, मिट्टी और लोहे के बर्तन मे खाना पाकाया करते थे |

जो की स्वास्थ्य के नजरिए से बहुत ही लाभदायक माना जाता था |तांबे, मिट्टी और लोहे के बर्तन मे खाना पकाने से इन बर्तन के गुण और ऊर्जा भी भोजन मे अवतरित हो जाती थी |

जब लोहे के बर्तन मे खाना पाकाया जाता था तो लोहे के गुण यानी हमारे शरीर मे भोजन के द्वारा लोहा युक्त भोजन जाता था जो शरीर के लिए बहुत लाभदायक होता था |

इस तरह उन बर्तनो मे भोजन पकाने की वजह से भोजन की शुद्धता भी बरकरार रहती थी |

 

इसलिए उस समय के इन्सानो मे बाईमारियाँ बहुत कम लगती थी | और लंबे समय तक स्वस्थ जीवन व्यतीत करते थे |

health tips 2 यह जानकारी आपको कैसी लगी नीचे कमेन्ट करके जरूर बताएं 

 

 

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