article 370 of indian constitution in hindi

चलिए अब जानते है –

क्यों  और  कब  बनया गया यह article 370 और article 35-A ? 

यह जानने के लिए चलिये अतीत के कुछ पन्नो को पलटते है  और चलते है  इतिहास के उस दौर मे जब पाकिस्तान ने कश्मीर पर कब्जा करने के मकसद से कश्मीर पर हमला किया । 

भारत की आज़ादी यानि 1947 के बाद भारत से अलग हुआ पाकिस्तान एक बौखलाए जानवर की तरहा कश्मीर पर घाट लगाए बैठा था । उस समय कश्मीर के राजा “राजा हरी सिंह  हुआ करते थे ।

 

इसका मतलब की उस दौर मे जहा एक तरफ भारतीय संविधान बनने के मकसद से तमाम देसी रियासतों (जो राजाओ और  मुग़लो की सल्तनत (रियासतों) के अंदर थी) को भारत मे विलय (मिलाया जाना ) किया जा रहा था वहां अभी भी  कई रियासते  भारत मे विलय होने को तैयार नहीं थी ।जिनमे से एक कश्मीर भी था ।

 

उस समय इन रियासतों का भारत मे विलय करने का मतलब था की इन तमाम देसी रियासतों पर अब सरकार का अधिकार होगा वो अपने हिसाब से इन रियासतों (राज्यो ) को चलाएगी । अतः इन राज्यो पर कानूनी व संवैधानिक व्यवस्था होगी । 

 

इसे जम्मू और कश्मीर पर  क्यों और कब लागू किया गया ?

इस प्रकार भारत को आजादी मिलने के बाद अगस्त 15, 1947 को जम्मू और कश्मीर भी आजाद हो गया था. भारत की स्वतन्त्रता के समय राजा हरि सिंह यहाँ के शासक थे, जो अपनी रियासत को स्वतन्त्र राज्य रखना चाहते थे. लेकिन 20 अक्टूबर, 1947 को पाकिस्तान समर्थित ‘आजाद कश्मीर सेना’ ने पाकिस्तानी सेना के साथ मिलकर कश्मीर पर आक्रमण कर दिया और काफी हिस्सा हथिया लिया था. 

 

1947 का बाद कश्मीर कए हालत इतने बत्तर हो चुके थे की यह सब कंट्रोल करना अब राजा की हद्द से बाहर था

इस परिस्थिति में महाराजा हरि सिंह ने जम्मू & कश्मीर की रक्षा के लिए शेख़ अब्दुल्ला की सहमति से जवाहर लाल नेहरु के साथ मिलकर 26 अक्टूबर 1947 को भारत के साथ जम्मू & कश्मीर के अस्थायी विलय की घोषणा कर दी और “Instruments of Accession of Jammu & Kashmir to India” पर अपने हस्ताक्षर कर दिये.

इस नये समझौते के तहत जम्मू & कश्मीर ने भारत के साथ सिर्फ तीन विषयों: रक्षा, विदेशी मामले और संचार को भारत के हवाले कर दिया था. समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद भारत सरकार ने वादा किया कि “’इस राज्य के लोग अपने स्वयं की संविधान सभा के माध्यम से राज्य के आंतरिक संविधान का निर्माण करेंगे और जब तक राज्य की संविधान सभा शासन व्यवस्था और अधिकार क्षेत्र की सीमा का निर्धारण नहीं कर लेती हैं तब तक भारत का संविधान केवल राज्य के बारे में एक अंतरिम व्यवस्था प्रदान कर सकता है.

article 370 of indian constitution in hindi

इस प्रतिबद्धता के साथ आर्टिकल 370 को भारत के संविधान में शामिल किया गया था. जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जम्मू&कश्मीर राज्य के संबंध में ये प्रावधान केवल अस्थायी हैं.(मतलब भविस्य मे इसे कभी भी इसे निसक्रिय किया जा सकेगा) इन प्रावधानों को 17 नवंबर 1952 से लागू किया गया था. उस समय भारत के प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू तथा भारत के राष्ट्रपति डॉ॰ राजेंद्र प्रसाद थे।

 

इस प्रकार यह भारतीय संविधान में जम्मू-कश्मीर सरकार की सहमति से राष्ट्रपति के आदेश पर जोड़ा गया. राष्ट्रपति ने 14 मई 1954 को इस आदेश को जारी किया था. यह अनुच्छेद 370 का हिस्सा था. इस प्रकार इसे जम्मू और कश्मीर पर   लागू किया गया।

 

गोपालस्वामी आयंगर ने धारा 306-ए का प्रारूप पेश किया था। बाद में यह धारा 370 बनी। इन अनुच्छेद के तहत जम्मू-कश्मीर को अन्य राज्यों से अलग अधिकार मिले। 1951 में राज्य को संविधान सभा अलग से बुलाने की अनुमति दी गई। नवंबर 1956 में राज्य के संविधान का कार्य पूरा हुआ। 26 जनवरी 1957 को राज्य में विशेष संविधान लागू कर दिया गया।

 

 

कैसे और क्यों हटाया गया कश्मीर से article 370 और article 35-A

जैसा की आप ऊपर ये जन ही चुके हो की article 370 और article 35-A की वजह से  कश्मीरी संविधान  किस प्रकार से ऐसे ऐसे कानून बनाकर कशिमिरी वासियो के लिए विशेस अधिकार तैयार करती थी जिसका खामियाजा पूरे भारत को भुगतना पड़ता था ।

 

इस प्रकार   article 370 और article 35-A का कितना दुरुपयोग हुआ ये आप ऊपर जन ही चुके हो । इसके इलवा  article 370 और article 35-A की वजह से कश्मीर के द्वारा भारत मे आतंकवादी गतिविधिया बहुत बारह गई थी । जिस वजह से भारत को अपने हजारो जवानो को खोना पड़ा।

 

जम्मू & कश्मीर में आतंक की मुख्य वजह वहां के कुछ अलगाववादी नेताओं के स्वार्थी हित थे. ये अलगाववादी नेता पाकिस्तान के इशारों पर जम्मू & कश्मीर के गरीब लड़कों को भडकाते थे और आतंक का रास्ता चुनने को मजबूर करते थे हालाँकि ये नेता अपने लड़कों को विदेशों में पढ़ाते हैं.

 

इसी के साथ इस  नतीजे पर विधानसभा मे दिन सोमवार (monday) 2019 को  एक कड़ा और एतिहासिक फैसला लेते हुए article 370 और article 35-A जम्मू कश्मीर से हटा दिया गया है । राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की मंजूरी के बाद यह फैसला लागू हो चुका है. गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में सरकार के फैसले का एलान किया. इस फैसले का मतलब है कि article 370 और article 35-A के तहत जम्मू-कश्मीर को मिले विशेषाधिकार खत्म हो गए हैं. यानी जम्मू-कश्मीर भी भारत के अन्य राज्यों की तरह एक सामान्य राज्य हो गया है.

 

इस प्रकार सरकार ने सोमवार 2019 को राज्यसभा में एक ऐतिहासिक संकल्प पेश किया जिसमें जम्मू कश्मीर राज्य से संविधान का अनुच्छेद 370 हटाने और राज्य का विभाजन जम्मू कश्मीर एवं लद्दाख के दो केंद्र शासित क्षेत्रों के रूप में करने का प्रस्ताव किया गया है. जम्मू कश्मीर केंद्र शासित क्षेत्र में अपनी विधायिका होगी जबकि लद्दाख बिना विधायी वाली केंद्रशासित क्षेत्र होगा.

 

article 370 of indian constitution in hindi

कैसे हटाया गया कश्मीर से article 370 और article 35-A-

जैसा की आप ऊपर पढ़ ही चुके हो की article 370 तीन खंड से मिल कर बना है जिनमे से सरकार के सोमवार 2019 को राज्यसभा में एक ऐतिहासिक फैसले द्वारा  दो खंड कश्मीर से हटा दिये गए है ।  राष्ट्रपति ने आज जो आदेश जारी किया है, वह भी अनुच्छेद 370 के खंड 1 द्वारा दी गई शक्तियों के आधार पर ही किया है।

 

 

aticle 368 भारतीय संविधान (राज्य सभा – लोक सभा ) को यह अधिकार (power) देती है की वह संविधान द्वारा बनाए गए किसी भी उपबंध या अनुच्छेद (articles) मे  लोई भी बदलाव तथा खत्म भी कर सकती है । लेकिन  राज्यसभा मे  राष्ट्रपति जी  ने बड़ी ही चतुराई से aticle 368 को  चुनने की बजाय उन्होने article 370 (1) का उपयोग करते हुए   एक  एतिहासिक ऐलान करते हुए article 35-A और article 370 के दोनों खंडो को कश्मीर से हमेशा के लिए हटा दिया 

 

 

 

गृह मंत्री अमित शाह के अनुसार अनुच्छेद 370 का खंड 1 बना रहेगा और खंड 2 और 3 ख़त्म होंगे। अनुच्छेद 370 का खंड 1 बना रहना ज़रूरी है क्योंकि उसी के तहत राष्ट्रपति केंद्र का कोई भी क़ानून राज्य पर लागू करता है। यदि अनुच्छेद 370 का खंड 1 ही समाप्त हो गया तो राष्ट्रपति जम्मू-कश्मीर पर ये क़ानून कैसे लागू करेगा।

इस प्रकार दूसरे, अनुच्छेद 370 के बने रहने से कोई यह भी नहीं कह सकेगा कि अनुच्छेद 370 को कैसे ख़त्म कर दिया क्योंकि वह तो है ही (भले ही उसका खंड 1 ही बचा हो) और इस आधार पर कोर्ट का दरवाज़ा भी नहीं खटखटा सकेगा।

 

 

चलिये अब जानते है की –

article 370 और article 35-A  के अनुसार (लागू होने से) कश्मीर को कौन कौन से विशेस अधिकार मिले थे –

article 370 advantages and disadvantages

1. जम्मू & कश्मीर; भारतीय संघ का एक संवैधानिक राज्य है किन्तु इसका नाम, क्षेत्रफल और सीमा को केंद्र सरकार तभी बदल सकता है जब जम्मू & कश्मीर की राज्य सरकार इसकी अनुमति दे.

 

 

2. इस आर्टिकल के अनुसार रक्षा, विदेशी मामले और संचार को छोड़कर बाकी सभी कानून को लागू करने के लिए केंद्र सरकार को राज्य से मंजूरी लेनी पड़ती है.

 

article 370 advantages and disadvantages

3. इसी आर्टिकल के कारण जम्मू & कश्मीर का अपना संविधान था  और इसका प्रशासन इसी के अनुसार चलाया जाता था ना कि भारत के संविधान के अनुसार.

 

 

4. जम्मू & कश्मीर के पास 2 झन्डे हैं. एक कश्मीर का अपना राष्ट्रीय झंडा था और भारत का तिरंगा झंडा यहाँ का राष्ट्रीय ध्वज था.

kashmir flag

 

 

5. देश के दूसरे राज्यों के नागरिक इस राज्य में किसी भी तरीके की संपत्ति नहीं खरीद सकते थे अर्थात इस राज्य में संपत्ति का मूलभूत अधिकार अभी भी लागू था।

 

 

6. article 370 और article 35-A के अनुसार कश्मीर के लोगों को 2 प्रकार की नागरिकता मिली हुई थी एक कश्मीर की और दूसरी भारत की.

 

 

7. article 370 और article 35-A के अनुसार यदि कोई कश्मीरी महिला किसी भारतीय से शादी कर लेती थी तो उसकी कश्मीरी नागरिकता ख़त्म हो जाती थी लेकिन यदि वह किसी पाकिस्तानी से शादी कर लेती थी तो उसकी कश्मीरी नागरिकता पर कोई फर्क नहीं पड़ता था।.

 

 

8. article 370 और article 35-A के अनुसार यदि कोई पाकिस्तानी लड़का किसी कश्मीरी लड़की से शादी कर लेता था तो उसको भारतीय नागरिकता भी मिल जाती थी।

 

 

9. article 370 और article 35-A के अनुसार सामान्यतः ऐसा होता था कि जब कोई भारतीय नागरिक भारत के किसी राज्य को छोड़कर किसी अन्य देश की नागरिकता ले लेता था तो उसकी भारतीय नागरिकता खत्म हो जाती थी. लेकिन जब कोई जम्मू & कश्मीर का निवासी पाकिस्तान चला जाता था और जब कभी वापस जम्मू & कश्मीर आ जाता था तो उसको दुबारा भारत का नागरिक मान लिया जाता था।

आगे पढ़ने के लिए नंबर 3 दबाए

7 thoughts on “article 370 of indian constitution in hindi

  1. अच्छी जानकारी थी सर मुझे यह पोस्ट बहुत अच्छा लगा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!