gautam buddha stories in hindi

गौतम बुद्ध और अंगुलिमाल-real life inspirational stories in hindi|| gautam buddha stories in hindi

 

gautam buddha stories in hindi (गौतम बुद्धा स्टोरीस इन हिन्दी)– प्राचीनकाल की बात है। मगध देश की जनता में आतंक छाया हुआ था। अंधेरा होते ही लोग घरों से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा पाते थे, कारण था अंगुलिमाल। अंगुलिमाल ने 100 लोगो  की ह्त्या करने का प्रण  लिया था , वह 99 लोगो को मर चुका था अब एक ही बचा था उसका प्रण पूरा होने को इसी वजह से पूरे गाव मे उसका आतंक फैला हुआ था ।

 

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अंगुलिमाल एक खूंखार डाकू था जो मगध देश के जंगल में रहता था। जो भी राहगीर उस जंगल से गुजरता था, वह उसे रास्ते में लूट लेता था और उसे मारकर उसकी एक उंगली काटकर माला के रूप में अपने गले में पहन लेता था। इसी कारण लोग उसे ‘अंगुलिमाल’ कहते थे।gautam buddha stories in hindi

 

 

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गौतम बुद्ध वैशाली नगर से प्रवास कर रहे थे। लोगों ने उन्हें रोका। बुद्ध को लोगों ने बताया कि वैशाली के बाहर जंगल में अंगुलीमाल नाम का एक पिशाच जैसा लुटेरा रहता है। वो लोगों को लूटता है, मार देता है फिर उनके हाथों की अंगुलियां काट कर उसकी माला बनाकर पहन लेता है। ऐसे खतरनाक इंसान के सामने जाने से अच्छा है आज रात यहीं रुक जाएं।gautam buddha stories in hindi

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गौतम बुद्ध ने कहा कि मैंने एक बार प्रवास करने का मन बना लिया तो मैं पीछे नहीं हट सकता। मुझे जाना ही होगा। लोगों ने बहुत रोका, सुरक्षा के लिए साथ चलने को भी कहा लेकिन बुद्ध अकेले निकल पड़े।

 

 

बुद्ध जंगल में जाने को तैयार हो गए तो गांव वालों ने उन्हें बहुत रोका क्योंकि वे जानते थे कि अंगुलिमाल के सामने से बच पाना मुश्किल ही नहीं असंभव भी है। लेकिन बुद्ध अत्यंत शांत भाव से जंगल में चले जा रहे थे। तभी पीछे से एक कर्कश आवाज कानों में पड़ी- ‘ठहर जा, कहां जा रहा है?’

 

 

बुद्ध ऐसे चलते रहे मानो कुछ सुना ही नहीं। पीछे से और जोर से आवाज आई- ‘मैं कहता हूं ठहर जा।’ बुद्ध रुक गए और पीछे पलटकर देखा तो सामने एक खूंखार काला व्यक्ति खड़ा था। लंबा-चौड़ा शरीर, बढ़े हुए बाल, एकदम काला रंग, लंबे-लंबे नाखून, लाल-लाल आंखें, हाथ में तलवार लिए वह बुद्ध को घूर रहा था। उसके गले में उंगलियों की माला लटक रही थी। वह बहुत ही डरावना लग रहा था।gautam buddha stories in hindi

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बुद्ध ने शांत व मधुर स्वर में कहा- ‘मैं तो ठहर गया। भला तू कब ठहरेगा?’

अंगुलिमाल ने बुद्ध के चेहरे की ओर देखा, उनके चेहरे पर बिलकुल भय नहीं था जबकि जिन लोगों को वह रोकता था, वे भय से थर-थर कांपने लगते थे। अंगुलिमाल बोला- ‘हे सन्यासी! क्या तुम्हें डर नहीं लग रहा है? देखो, मैंने कितने लोगों को मारकर उनकी उंगलियों की माला पहन रखी है।’

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बुद्ध बोले- ‘तुझसे क्या डरना? डरना है तो उससे डरो जो सचमुच ताकतवर है।’ अंगुलिमाल जोर से हंसा – ‘हे साधु! तुम समझते हो कि मैं ताकतवर नहीं हूं। मैं तो एक बार में दस-दस लोगों के सिर काट सकता हूं।’

 

बुद्ध बोले – ‘यदि तुम सचमुच ताकतवर हो तो जाओ उस पेड़ के दस पत्ते तोड़ लाओ।’ अंगुलिमाल ने तुरंत दस पत्ते तोड़े और बोला – ‘इसमें क्या है? कहो तो मैं पेड़ ही उखाड़ लाऊं।’

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महात्मा बुद्ध ने कहा – ‘नहीं, पेड़ उखाड़ने की जरूरत नहीं है। यदि तुम वास्तव में ताकतवर हो तो जाओ इन ‍पत्तियों को पेड़ में जोड़ दो।’

 

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